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मेरठ: बोर्ड बैठक में जबरदस्त हंगामा, गफ्फार को सदन से बाहर निकालने की जिद पर अड़े भाजपा पार्षद

Sat, 28 Dec 2019 03:49 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 28 Dec 2019 03:49 PM IST
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CAA Protest, Ruckus in Municipal Corporation board meeting at Meerut of Uttar Pradesh
नगर निगम की बोर्ड बैठक में जमकर हंगामा - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में शनिवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक शुरू होते ही हंगामा हो गया। भाजपा पार्षदों ने गफ्फार अहमद का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान सभी भाजपा पार्षद गफ्फार को सदन से बाहर करने या फिर माफी मांगने की मांग जिद पर अड़ गए। उधर, गफ्फार के पक्ष में सभी मुस्लिम पार्षद और बसपा के अन्य सभी पार्षद भी उतर आए। इस बीच महापौर सुनीता वर्मा और नगर आयुक्त डॉ अरविंद कुमार चौरसिया दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास करते रहे लेकिन आधे घंटे तक जमकर हंगामा हुआ।

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इसके बाद धक्का- मुक्की के साथ नौबत मारपीट तक की आ गई। वहीं हंगामा बढ़ता देख 15 मिनट के लिए सदन की बैठक को स्थगित कर दिया गया। हालांकि इससे पहले हंगामे के दौरान बसपा और मुस्लिम पार्षदों ने बजट को पास कराने के लिए जमकर नारेबाजी की। इस दौरान जहां भाजपा पार्षदों ने वंदे मातरम जिंदाबाद के नारे लगाए तो वहीं मुस्लिम पार्षदों ने हिंदुस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए।
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पार्षद ने काले रंग की जैकेट पर लिखा था मैं आतंकवादी नहीं
नगर निगम के एक पार्षद ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलग तरीके से प्रदर्शन किया था। पार्षद गफ्फार अहमद ने काले रंग की जैकेट पर पीछे लिखा था आई एम नॉट टेरेरिस्ट, बैकअप सीएए, एनआरसी।
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पार्षद इस जैकेट को पहनकर दिन भर निगम और शहर की सड़कों पर घूमते रहे थे। नगर निगम पहुंचने पर उन्होंने बताया कि नागरिक संशोधन कानून सभी लोगों के लिए है न की अकेले मुस्लिमों के लिए। सरकार को इस कानून को लाने की जरूरत नहीं थी। सरकार को पहले पांच साल में ही देश से घुसपैठियों को निकाल देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया तो यह सरकार की विफलता है। अब कानून का औचित्य नहीं है। सरकार ने विशेषकर एक धर्म को टारगेट करके कानून बनाया है, उससे तो ऐसा लगता है कि तमाम मुस्लिम आतंकवादी हैं। सबूत न दे सके तो मुस्लिमों को देश से बाहर कर दिया जाएगा। यह भेदभाव, संविधान के खिलाफ है। इसलिए मैंने मैसेज दिया है। मैं भीड़ के रूप में मैसेज नहीं देना चाहता। प्रशासन का सहयोग करता हूं। जरूरत पड़ने पर भीड़ का भी सहारा लेंगे।

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