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40 दिनों तक विधान कराने से नष्ट हो जाते हैं जन्म, जन्मांतर के पाप कर्म
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा के सम्मुख चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 16वें दिन 120 परिवारों द्वारा विधान की मांगलिक क्रियाएं की गई। मुख्य वेदी के अभिषेक के बाद भक्तों ने जिनेंद्र भगवान का मंत्रोच्चार पूर्वक जलाभिषेक किया। सभी दर्शनार्थी त्रिमूर्ति जिनालय पहुंचे, वहां पर भी मंगलाचरण, दिग्वन्धन, पात्रशुद्धि, जलशुद्धि की क्रियाओं पूर्वक जिनेंद्र भगवान का अभिषेक हुआ। शांतिधारा लोकेश जैन, कोमल जैन, निमित जैन, विद्या जैन, पूजा जैन, शंकर ने की। सहयोग नरेंद्र सिंह, कुसुम जैन ने किया।
मुनि भाव भूषण महाराज ने श्रावकों के मध्य प्रवचन करते हुए कहा कि शांतिनाथ विधान करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। आगम में वर्णन है कि जलोदर रोग के कारण जो व्यक्ति पेट के भार से खेद खिन्न है, ऐसे भयानक रोग के कारण जिनकी दशा शोचनीय है, जिनके जीवित रहने की आशा नहीं रही, ऐसे रोगीजन व्यक्ति यदि जिनेंद्र भगवान की धूल अपने शरीर से लगाते हैं तो वह भी निरोग होकर कामदेव के समान सुंदर हो जाते हैं। साथ ही उन्हें किसी का भय भी नहीं सताता। जिनेंद्र भगवान के इस स्तवन को जो पढ़ता है, उसके मदोन्मत्त हाथी, सिंह, दावानल (प्रचंड अग्नि) सर्प, युद्ध, समुद्र, जलोधर आदि रोग तत्काल ही नष्ट हो जाते हैं। हस्तिनापुर की भूमि पर शांतिनाथ भगवान व शांतिनाथ विधान का विशेष महत्व है। ऐसे विधान को 40 दिन जो करते हैं, उनके जन्म, जन्मांतर के पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं।
पंडित आशीष शास्त्री व पंडित आयुष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई। संगीतमय महाआरती में भक्तों ने भजनों पर खूब भक्ति नृत्य किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक प्रश्नमंच प्रतियोगिता आयोजित की गई।
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इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, शशांक जैन, अतुल जैन, अनिल कुमार जैन, वीरेंद्र कुमार जैन, मुकेश कुमार जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, शुभम जैन, लव जैन आदि का सहयोग रहा।
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मुनि भाव भूषण महाराज ने श्रावकों के मध्य प्रवचन करते हुए कहा कि शांतिनाथ विधान करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। आगम में वर्णन है कि जलोदर रोग के कारण जो व्यक्ति पेट के भार से खेद खिन्न है, ऐसे भयानक रोग के कारण जिनकी दशा शोचनीय है, जिनके जीवित रहने की आशा नहीं रही, ऐसे रोगीजन व्यक्ति यदि जिनेंद्र भगवान की धूल अपने शरीर से लगाते हैं तो वह भी निरोग होकर कामदेव के समान सुंदर हो जाते हैं। साथ ही उन्हें किसी का भय भी नहीं सताता। जिनेंद्र भगवान के इस स्तवन को जो पढ़ता है, उसके मदोन्मत्त हाथी, सिंह, दावानल (प्रचंड अग्नि) सर्प, युद्ध, समुद्र, जलोधर आदि रोग तत्काल ही नष्ट हो जाते हैं। हस्तिनापुर की भूमि पर शांतिनाथ भगवान व शांतिनाथ विधान का विशेष महत्व है। ऐसे विधान को 40 दिन जो करते हैं, उनके जन्म, जन्मांतर के पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं।
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पंडित आशीष शास्त्री व पंडित आयुष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई। संगीतमय महाआरती में भक्तों ने भजनों पर खूब भक्ति नृत्य किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक प्रश्नमंच प्रतियोगिता आयोजित की गई।
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इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, शशांक जैन, अतुल जैन, अनिल कुमार जैन, वीरेंद्र कुमार जैन, मुकेश कुमार जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, शुभम जैन, लव जैन आदि का सहयोग रहा।