Saharanpur: दूध नहीं जहर पी रहे जनपद के लोग, पांच माह में 57.40 फीसदी बढ़ा जहरीले दूध का कारोबार
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के लोग दूध नहीं जहर पी रहे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आंकड़े दूध की मिलावट की सच्चाई बता रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के जनपद के लोग दूध नहीं जहर पी रहे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आंकड़े दूध की मिलावट की सच्चाई बता रहे हैं। पिछले तीन साल में 233 दूध के नमूने फेल आए हैं। पांच माह में 57.40 फीसदी जहरीले दूध का कारोबार हुआ है।
साल 2020, 21 और 22 में सहारनपुर से जो सैंपल विभाग ने लैब में जांच के लिए भेजे गए थे। उनमें से 233 सैंपल दूध के फेल आए है। इन रिपोर्ट के आने के बाद खुद खाद्य विभाग भी हैरान है। दूध में मिलावट कर मिलावटखोर मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में 377 नमूने लिए गए थे, जिनमें से 59 नमूने फेल आए थे। 2021 में 113 दूध के नमूने फेल आए हैं। 2022 के अप्रैल से 31 अगस्त तक यानी पांच माह में 57.40 फीसदी जहरीले दूध का कारोबार हुआ है।
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मसालों में भी मिलावट
मसालों की बात करें तो 2020 में 377 नमूनों में 191 नमूने फेल आए थे। इसमें से 59 नमूने दूध के थे। 2020 में दूध में 15, मसालों में छ्ह, मिठाई में छह और खोया जमा पांच फीसदी की मिलावट थी। जबकि 2022 में 63.12 प्रतिशत मसालों में मिलावट सामने आई।
हड्डियों को किया कमजोर
विभागीय आंकड़ों पर गौर करे दूध पीने से लोगों की हड्डियां कमजोर हो रही है। पिछले पांच माह में हड्डी रोग विभाग में करीब 1645 हड्डी रोग संबंधी मरीज पहुंचे हैं। जिनमें 700 बच्चे हैं।
तीन साल में 416 हुई छापेमारी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2020, 2021 और 2022 में अब तक कुल 416 छापेमारी की। 2020 में 2711 और 2021 में 2566 और 2022 में 2939 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। विभाग इन मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। सहायक आयुक्त खाद्य (ग्रेड-2) पवन कुमार ने बताया कि तीन सालों में दूध में मिलावट का कारोबार तेज हुआ है। ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। सैंपल भरे जा रहे हैं।