दिल्ली की हिंसा में झुलसा मेरठ का व्यापार, रोडवेज की आय भी घटकर हुई आधी
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दिल्ली में हुई हिंसा से मेरठ का कारोबार प्रभावित हो रहा है। दिल्ली से मेरठ और आसपास के जिलों में होने वाली सप्लाई रुक गई है। लोग दहशत में हैं। कारोबारियों का कहना है कि आगजनी व लूटपाट के डर से माल ढुलाई में लगे लोग छुट्टी पर हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स के यहां भेजा गया माल रास्ते में रोकना पड़ा है। दहशत के चलते ट्रांसपोर्टर दिल्ली के माल की बुकिंग तक नहीं ले रहे हैं।
दिल्ली के चांदनी चौक व आसपास के बाजारों में रेडीमेड का बड़ा काम है। वहां से रोज काफी माल मेरठ आता है। उपद्रव के बाद से दिल्ली के बाजार बंद हैं। माल की सप्लाई रुक गई है। संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता का कहना है कि लोगों में दहशत के चलते दिल्ली और मेरठ का कारोबार प्रभावित हुआ है। भगीरथ पैलेस दवा कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां से मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर समेत कई जिलों में रोज दवा सप्लाई होती है।
मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल और दवा कारोबारी मनोज अग्रवाल के अनुसार, हर रोज तीन से चार करोड़ की दवा दिल्ली से आती है। सप्लाई बंद होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसी प्रकार दिल्ली का नेहरू प्लेस इलेक्ट्रानिक का बड़ा बाजार है। कंप्यूटर कारोबारी संजीव मित्थल ने बताया कि मेरठ का कारोबार डिस्ट्रीब्यूटर्स पर टिका है। होलसेलर सीधे डिस्ट्रीब्यूटर्स से माल खरीदते हैं। हिंसा के बाद से कंपनियों का काम बंद है। माल सप्लाई नहीं हो पा रही है।
स्पोर्ट्स गुड्स के लिहाज से भी कारोबार कुछ हद तक प्रभावित है। हालांकि हिंसाग्रस्त इलाकों से ट्रॉफी व मेडल जैसा माल सप्लाई होता है। आल इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स फेडरेशन के महामंत्री सुनील शर्मा का कहना है कि जिन इलाकों से माल आता है, वहां दहशत के चलते बाजार बंद हैं। लूट, आगजनी से डर से कारोबारी काम नहीं कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा ट्रांसपोर्टर परेशान
हिंसा से ट्रांसपोर्ट कारोबार सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा ने बताया कि दूसरे राज्यों से इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर, स्पोर्ट्स, कपड़ा सहित कई तरह का माल दिल्ली पहुंचता है। वहां से मेरठ और आसपास जिलों में सप्लाई किया जाता है।
हिंसा के बाद ट्रकों को बार्डर पर रोक देना पड़ा है। करीब 200 ट्रक रोज माल लेकर मेरठ पहुंचते हैं, जो तीन दिन से नहीं आ रहे है। जीएसटी का नुकसान तक कारोबारियों को झेलना पड़ रहा है। करीब 40 लाख प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है।
रोडवेज की आय भी घटकर हुई आधी
दिल्ली में हुई हिंसा की वजह से रोडवेज को रोज पांच लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। दिल्ली जाने वाले यात्री सफर से किनारा कर रहे हैं। मेरठ रोडवेज रीजन के मेरठ, गढ़मुक्तेश्वर और बड़ौत डिपो की करीब 100 बसें रोज दिल्ली के लिए चलती हैं। इन बसों से विभाग को रोजाना करीब 10 लाख रुपये की आय होती है।
दिल्ली में हिंसा के बाद से यात्रियों ने सफर से किनारा कर लिया है। बुधवार को मेरठ डिपो की दिल्ली जाने वाली बसों का लोड फैक्टर घटकर आधा रह गया। भैसाली बस अड्डा वीरान पड़ा रहा। आरएम नीरज सक्सेना ने बताया कि दिल्ली जाने वाली बसों से रोज करीब दस लाख की आय होती है। अब आधी रह गई है।