सुविधा: मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट तैयार, मिलेगा इलाज, अब नहीं लगानी पड़ेगी दिल्ली की दौड़
मेरठ और आसपास के गंभीर रुप से जले मरीजों को अब दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मेरठ मेडिकल कॉलेज में आने वाले गंभीर मरीजों को अभी तक रेफर किया जाता है। लेकिन अब मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट बन गई है। जिससे इन मरीजों को यहां इलाज मिल सकेगा। बर्न यूनिट में पांच बेड की आईसीयू बनी है। 20 बेड का जनरल वार्ड तैयार किया गया है।
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मेरठ और आसपास के गंभीर रूप से जले हुए मरीजों के लिए दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी, मेडिकल कॉलेज में ही उन्हें इलाज मिलेगा। यहां बर्न यूनिट बन गई है। नवंबर माह में इसे शुरू करने की तैयारी है।
मेडिकल कॉलेज में आने वाले गंभीर मरीजों को अभी तक रेफर किया जाता है। इस बर्न यूनिट में पांच बेड की आईसीयू बनी है। 20 बेड का जनरल वार्ड तैयार किया गया है। इसके लिए सर्जन और अन्य स्टाफ के लिए भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने शासन को लिखा है। बर्न वार्ड को पूरी तरह बैक्टीरिया फ्री रखा जाएगा। इसके लिए यहां अलग से व्यवस्था करवाई जाएगी।
जले हुए मरीजों को इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है। इनकी प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। जलने की वजह से शरीर में पानी की कमी भी रहती है। ऐसे में फंगल इंफेक्शन जल्दी घेर लेता है। इंफेक्शन से बचाने के लिए वार्ड को बैक्टीरिया प्रूफ बनाया जाएगा। महिलाओं का भी खास ख्याल रखा जाएगा। एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए खास व्यवस्थाएं की जाएंगी। शासन ने इसके लिए पांच करोड़ से अधिक का बजट पारित किया था।
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जिला अस्पताल में भी नहीं है बर्न यूनिट
पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में भी बर्न यूनिट नहीं है। यहां जो जले हुए मरीज आते हैं उनको मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। हालांकि डायलिसिस यूनिट वाली बिल्डिंग में बर्न वार्ड बना है, लेकिन स्टाफ न होने के कारण वह संचालित नहीं हो पा रहा है।
यह है जले हुए मरीजों की स्थिति
मेडिकल कॉलेज में समान्य तौर पर हर माह 20 से 25 गंभीर मरीज जलने की स्थिति में आते हैं।
कम जले मरीजों को तो भर्ती कर लिया जाता है, लेकिन 10 से 12 मरीज ऐसे भी आते हैं, जिन्हें रेफर करना पड़ता है।
साल भर में करीब 100 से 150 गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
नई बर्न यूनिट हैंडओवर होने वाली है। उम्मीद है कि इसको अगले माह शुरू कर दिया जाएगा। स्टाफ और सर्जन के लिए भी शासन को पत्र भेजा गया है। - डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज