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बुलंदशहर की उलझन से ठिठकीं मेरठ की योजनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Dec 2016 02:07 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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बुलंदशहर के अरनिया टेहरी हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के लिए हुए भू अधिग्रहण के मुआवजा वितरण में अनियमितता की जांच का असर मेरठ तक नजर आ रहा है। इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने किसानों को अतिरिक्त प्रतिकर देने का फैसला लेने की जांच हाई पॉवर कमेटी से कराने को कहा है। इसके बाद मेरठ की गंगानगर, लोहियानगर और वेदव्यासपुरी में चल रही इसी तरह की प्रक्रिया ठिठक गई है। यहां एडीएम-एलए ने संबंधित पत्रावलियों को वापस करते हुए एमडीए अफसरों को पत्र लिखा है कि बुलंदशहर प्रकरण में दिए गए हाईकोर्ट के आदेश को देखकर काम किया जाएगा।
यह था बुलंदशहर का प्रकरण
बुलंदशहर में यूपीएसआईडीसी ने ग्रोथ सेंटर खुर्जा की स्थापना के लिए चार गांवों की लगभग 969 एकड़ जमीन का अधिग्रहण वर्ष-1991 में किया था। किसानों को मुआवजा भुगतान कर दिया गया था पर लंबे समय तक जमीन पर कब्जा नहीं हो पाया। बाद में इस जमीन को हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट को दे दिया गया। किसानों ने जमीन पर कब्जा नहीं किया तो उन्हें समझौते के आधार पर फिर से 721 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान तय कर दिया गया। यह रकम लगभग 387 करोड़ रुपये की बनी। इसी मामले में एक किसान कमल सिंह ने अपने अधिकार के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर अदालत ने सख्त आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 29 अगस्त को आदेश जारी किया कि जब किसानों को मुआवजा दिया जा चुका था, तो इतने लंबे समय तक कब्जा क्यों नहीं लिया गया। अब इतना बड़ा प्रतिकर कैसे तय कर दिया गया? अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश दिए कि हाई पॉवर कमेटी से इस प्रकरण की जांच कराई जाए। जांच की जद में 13 वरिष्ठ अधिकारी हैं। 15 दिसंबर को इस प्रकरण में सुनवाई है और मुख्य सचिव को भी अपना पक्ष रखना है।
मेरठ में फंस गया पेच
मेरठ की लोहियानगर, वेदव्यासपुरी और गंगानगर योजना में अतिरिक्त अनुग्रह राशि के बदले भूखंड देने का प्रस्ताव बोर्ड में पास हो चुका है। किसानों का हिसाब बनाया जा रहा है। गणना का काम चल रहा है। तीनों योजनाओं के किसानों की फाइलें एडीएम-एलए के यहां जा रही हैं। अब बुलंदशहर के आदेश का हवाला देते हुए एडीएम-एलए ने पेच अटका दिया है। उन्होंने पत्रावलियों के साथ इस आदेश की प्रति लगाते हुए एमडीए अफसरों को पत्र भेजा है। कहा है कि इस आदेश को देखा जाए, जो भी कार्यवाही करनी है, वह ध्यान में रखते हुए ही की जाए। हालांकि, एमडीए अफसर अभी गणना का काम कर रहे हैं, क्याेंकि उनका मानना है कि यह आदेश उन पर लागू नहीं होगा।
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यह था बुलंदशहर का प्रकरण
बुलंदशहर में यूपीएसआईडीसी ने ग्रोथ सेंटर खुर्जा की स्थापना के लिए चार गांवों की लगभग 969 एकड़ जमीन का अधिग्रहण वर्ष-1991 में किया था। किसानों को मुआवजा भुगतान कर दिया गया था पर लंबे समय तक जमीन पर कब्जा नहीं हो पाया। बाद में इस जमीन को हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट को दे दिया गया। किसानों ने जमीन पर कब्जा नहीं किया तो उन्हें समझौते के आधार पर फिर से 721 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान तय कर दिया गया। यह रकम लगभग 387 करोड़ रुपये की बनी। इसी मामले में एक किसान कमल सिंह ने अपने अधिकार के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर अदालत ने सख्त आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 29 अगस्त को आदेश जारी किया कि जब किसानों को मुआवजा दिया जा चुका था, तो इतने लंबे समय तक कब्जा क्यों नहीं लिया गया। अब इतना बड़ा प्रतिकर कैसे तय कर दिया गया? अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश दिए कि हाई पॉवर कमेटी से इस प्रकरण की जांच कराई जाए। जांच की जद में 13 वरिष्ठ अधिकारी हैं। 15 दिसंबर को इस प्रकरण में सुनवाई है और मुख्य सचिव को भी अपना पक्ष रखना है।
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मेरठ में फंस गया पेच
मेरठ की लोहियानगर, वेदव्यासपुरी और गंगानगर योजना में अतिरिक्त अनुग्रह राशि के बदले भूखंड देने का प्रस्ताव बोर्ड में पास हो चुका है। किसानों का हिसाब बनाया जा रहा है। गणना का काम चल रहा है। तीनों योजनाओं के किसानों की फाइलें एडीएम-एलए के यहां जा रही हैं। अब बुलंदशहर के आदेश का हवाला देते हुए एडीएम-एलए ने पेच अटका दिया है। उन्होंने पत्रावलियों के साथ इस आदेश की प्रति लगाते हुए एमडीए अफसरों को पत्र भेजा है। कहा है कि इस आदेश को देखा जाए, जो भी कार्यवाही करनी है, वह ध्यान में रखते हुए ही की जाए। हालांकि, एमडीए अफसर अभी गणना का काम कर रहे हैं, क्याेंकि उनका मानना है कि यह आदेश उन पर लागू नहीं होगा।
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