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बुखार बेकाबू, जिले में 12 मौतें
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 16 Sep 2016 02:38 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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बृहस्पतिवार को बुखार ने जिले में अपने रौद्र रूप से हाहाकार मचा दिया। बुखार के कारण कुल 12 मौतों से हर ओर मातम मच गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा के पर्याप्त इंतजाम करने में असमर्थ साबित हो रहा है। जिले में सैकड़ों लोग बुखार, डेंगू, चिकनगुनिया की चपेट में हैं और हर दिन मौत के साये में जी रहे हैं।
बहसूमा के मोहल्ला सड़क वाला निवासी मिस्त्री मोबिन ने बताया कि उसके बेटे दिलशाद (34) को तीन दिन पहले बुखार हुआ था। उसे पीएचसी ले गए, लेकिन वहां चिकित्सक मौजूद नहीं था। परिजन दिलशाद को मेरठ में एक नर्सिंग होम में ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। मोबिन का कहना था कि चिकित्सक ने चिकनगुनिया के लक्षण बताए थे।
मोहल्ला चेनपुरा निवासी साबिर ने बताया कि उसकी पत्नी नसरीन (26) को बृहस्पतिवार को अचानक बुखार हुआ। बहसूमा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक न होने के कारण उसे मवाना में प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया। इससे पहले कि उपचार शुरू किया जाता, नसरीन की मौत हो गई। इस संबंध में पीएचसी प्रभारी डॉ. कादिर अहमद का कहना था कि बस न मिलने से वे लेट हो गए थे।
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मोहल्ला मंगल बाजार निवासी अधिवक्ता नीरज शर्मा ने बताया कि उनके पिता पंडित किरण चंद शर्मा (92) को तीन दिन से बुखार था। बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। पंडित किरण चंद शर्मा मंगल बाजार शिव मंदिर समिति के प्रधान भी थे।
सहकारी गन्ना समिति के पूर्व सभासद राजेद्र मुंशी की पुत्री सोनी (21) को दो दिन पहले बुखार हुआ था। सोनी का मेरठ के प्राइवेट चिकित्सक से उपचार चला। बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई।
सरधना के नवाब गढ़ी निवासी महताब की बेटी तैयबा (7) तीन दिन से बुखार से पीड़ित थी। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे मेरठ के एक अस्पताल ले गए, लेकिन तैयबा की जान नहीं बच पाई। वहीं मोहल्ला जोगियान में नईम (21) पुत्र अमीरुद्दीन कई दिन से बुखार से पीड़ित था। बुधवार रात उसे सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देर रात उसने दम तोड़ दिया।
कस्बा हर्रा में रिहान (7) पुत्र शरजील और गुड़िया (11) पुत्री उमर मौहम्मद की मौत हो गई। दोनों बच्चे कई दिन से बुखार से पीड़ित थे।
माछरा क्षेत्र के कायस्थ बड्ढा में इलियास (60), अख्तर (50), साहबजादी (48) की मौत हो गई। तीनों ही कई दिन से बीमार थे।
वहीं, सीसीएसयू के स्थायी कर्मचारी वीरेंद्र आंसर बुक विभाग में तैनात थे। वीरेंद्र को करीब 15 दिनों से बुखार था। बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई।
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बहसूमा के मोहल्ला सड़क वाला निवासी मिस्त्री मोबिन ने बताया कि उसके बेटे दिलशाद (34) को तीन दिन पहले बुखार हुआ था। उसे पीएचसी ले गए, लेकिन वहां चिकित्सक मौजूद नहीं था। परिजन दिलशाद को मेरठ में एक नर्सिंग होम में ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। मोबिन का कहना था कि चिकित्सक ने चिकनगुनिया के लक्षण बताए थे।
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मोहल्ला चेनपुरा निवासी साबिर ने बताया कि उसकी पत्नी नसरीन (26) को बृहस्पतिवार को अचानक बुखार हुआ। बहसूमा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक न होने के कारण उसे मवाना में प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया। इससे पहले कि उपचार शुरू किया जाता, नसरीन की मौत हो गई। इस संबंध में पीएचसी प्रभारी डॉ. कादिर अहमद का कहना था कि बस न मिलने से वे लेट हो गए थे।
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मोहल्ला मंगल बाजार निवासी अधिवक्ता नीरज शर्मा ने बताया कि उनके पिता पंडित किरण चंद शर्मा (92) को तीन दिन से बुखार था। बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। पंडित किरण चंद शर्मा मंगल बाजार शिव मंदिर समिति के प्रधान भी थे।
सहकारी गन्ना समिति के पूर्व सभासद राजेद्र मुंशी की पुत्री सोनी (21) को दो दिन पहले बुखार हुआ था। सोनी का मेरठ के प्राइवेट चिकित्सक से उपचार चला। बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई।
सरधना के नवाब गढ़ी निवासी महताब की बेटी तैयबा (7) तीन दिन से बुखार से पीड़ित थी। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे मेरठ के एक अस्पताल ले गए, लेकिन तैयबा की जान नहीं बच पाई। वहीं मोहल्ला जोगियान में नईम (21) पुत्र अमीरुद्दीन कई दिन से बुखार से पीड़ित था। बुधवार रात उसे सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देर रात उसने दम तोड़ दिया।
कस्बा हर्रा में रिहान (7) पुत्र शरजील और गुड़िया (11) पुत्री उमर मौहम्मद की मौत हो गई। दोनों बच्चे कई दिन से बुखार से पीड़ित थे।
माछरा क्षेत्र के कायस्थ बड्ढा में इलियास (60), अख्तर (50), साहबजादी (48) की मौत हो गई। तीनों ही कई दिन से बीमार थे।
वहीं, सीसीएसयू के स्थायी कर्मचारी वीरेंद्र आंसर बुक विभाग में तैनात थे। वीरेंद्र को करीब 15 दिनों से बुखार था। बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई।