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Meerut News: बिल्डरों ने बेच डाले 15 बंधक प्लॉट, फाइलें भी गायब कराई

Wed, 02 Apr 2025 01:53 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Apr 2025 01:53 AM IST
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Builders sold 15 mortgaged plots and made the files disappear
मेरठ। बिल्डरों ने कॉलोनी में विकास कार्य तो दूर जरूरी सुविधाएं तक नहीं दीं। बाह्य विकास शुल्क के एवज में मेडा में बंधक रखे गए 15 प्लॉट भी बेच डाले। प्लॉट पर कब्जा लेने और पैमाइश के लिए जब खरीदार मेडा दफ्तर पहुंचे तो यह खुलासा हुआ। मेडा के उपाध्यक्ष ने मानचित्र व नियोजन विभाग से तत्काल रिपोर्ट मांगी। पता चला कि ये प्लॉट मेडा के पास बंधक थे। इन्हें जालसाजी कर पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर बेच दिया गया। देर शाम मेडा की ओर से थाना गंगानगर और सिविल लाइंस में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई।
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अम्हेड़ा ग्राम की भूमि पर मैसर्स ग्रेविल कॉलोनाइजर्स प्रा. लि. के अशोक सैनी निवासी सरायकाजी गढ़ रोड, राजगुरू खोखर निवासी ग्राम बदरखा तहसील बड़ौत और सुनील कुमार निवासी दत्तावली गेसूपुर ने वृंदावन एन्क्लेव कॉलोनी विकसित की थी। इसमें आंतरिक विकास कार्यों के सापेक्ष भूखंड 24 भूखंड बंधक मोर्टगेज रखे गए थे। मेडा के मुख्य नगर नियोजक विजय कुमार ने बताया कि इनमें से प्लॉट संख्या 60, 61, 62 को फकीर चंद मोघा निवासी शकुंतलम कॉलोनी मुजफ्फरनगर को बेच दिया गया। इस पर थाना गंगानगर में अवर अभियंता ओमकार शर्मा की ओर से धारा बीएनएस 318, 338, 339 व 340 के तहत एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
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उन्होंने बताया कि मैसर्स दयानंद बिल्डर्स के ईश्वरपाल, कुंवरपाल, धर्मपाल निवासी रजपुरा तथा मनोज कुमार सेन निवासी सूर्य नगर ने ग्राम रजपुरा के खसरा संख्या 30 के 13850 वर्ग मीटर की भूमि पर गंगापुरम कॉलोनी विकसित की थी। बाह्य विकास शुल्क के मद में 8 लाख 85 हजार 147 रुपये के सापेक्ष एक लाख 21 हजार रुपये जमा कराते हुए लेआउट पास कराया गया। अवशेष विकास शुल्क के सापेक्ष 12 भूखंड प्राधिकरण के पक्ष में बंधक रखे गए। इन सभी की मार्गेज डीड निष्पादित की गई और कॉलोनी के सभी भूखंडों को भी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर विक्रय किए जाने का अधिकर लेते हुए बेच दिए गए। इस मामले में भी तहरीर थाना गंगानगर में दी गई है।
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इसके अलावा प्राधिकरण में कई पत्रावलियां गायब होने पर जांच कर कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने को थाना सिविल लाइंस में भी पत्र भेजा गया है। मुख्य नगर नियोजक ने बताया कि एनजीटी में दायर वाद के तहत एक मानचित्र की पत्रावली भी प्राधिकरण में नहीं मिल रही हैं। सभी पत्रावलियों का टेबुलेशन कराया गया। इसमें कई पत्रावलियां नहीं मिलीं। मास्टर रजिस्टर भी नहीं मिला। ऐसे में पदस्थ रिकॉर्ड कीपर द्वारा बताया गया कि 2006-07 में अत्याधिक बारिश के कारण मेडा के बेसमेंट में पानी भर गया था। यहीं पर रिकॉर्ड रूम था। इसमें कई पत्रावलियां नष्ट हो गईं। मुख्य नगर नियोजक विजय कुमार सिंह ने बताया ऐसे कर्मियों की जांच कर सुसंगत धाराओं में कार्रवाई कराई जाएगी।


विकास के लिए बंधक रखे जाते हैं प्लॉट
मेडा किसी भी कॉलोनी का लेआउट स्वीकृत करते हुए कुुछ प्लॉट तथा एफडीआर अपने पास बंधक रखता है। कई बार बिल्डर के विकास कार्य न करने पर आवंटियों की मांग पर इन प्लॉट का बेचकर मेडा ये विकास कार्य कराता है। वहीं, जो विकासकर्ता कॉलोनी में विकास कार्य पूर्ण करा लेता है तो मेडा की टीम स्थलीय निरीक्षण करती है। सबकुछ दुरुस्त पाए जाने पर बिल्डर को कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है और प्लॉट व एफडीआर बंधकमुक्त कर दिए जाते हैं। मेडा इनकी देखरेख करता है और बाद में इन्हें नगर निगम को हस्तांतरित किया जाता है।
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