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जिले का ऐसा हाल: सोते रहे अफसर... 120 दिन में काट दीं 104 अवैध कॉलोनियां, बिल्डरों ने किया करोड़ों का खेल

Wed, 07 Jun 2023 12:30 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 07 Jun 2023 12:30 AM IST
सार

UP News: यूपी के इस जिले में बिल्डरों ने करोड़ों से भी ज्यादा का खेल कर डाला। यहां अधिकारी सोते रहे और बिल्डरों ने 120 दिन में ही 104 अवैध कॉलोनियां काट दीं।

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Builders set up 104 illegal colonies in 120 days in Meerut, but Meda officials did not take action
मेरठ में कार्रवाई। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ जनपद में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के अधिकारी कार्रवाई का दिखावा करते रहे और बिल्डरों ने खेल कर दिया। पिछले 120 दिन में बिल्डरों ने 104 अवैध कॉलोनियां काट दीं। फरवरी में मेडा की वेबसाइट पर 262 अवैध कॉलोनियां थीं, जो अब बढ़कर 366 हो गई हैं। हाईवे और बाईपास पर इनकी संख्या सबसे अधिक है। वर्तमान में शहर में 264 कॉलोनियां ही वैध हैं। यह खुलासा मेडा की ओर से किए गए सर्वे में हुआ है। मेडा की टीम ने अपनी वेबसाइट पर मंगलवार को सूची भी अपडेट कर दी।

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मेडा ने चार जोन बनाए हुए हैं, जिसके अंतर्गत 16 उप जोन बनाकर निगरानी की जाती है। सर्वे में शहर से लेकर देहात तक हर ओर अवैध कॉलोनियां पकड़ में आई हैं। रोहटा रोड, बागपत रोड, किला रोड, हापुड़ रोड, गढ़ रोड, मवाना रोड और एनएच-58 पर सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां काटी गई हैं।
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रसूख के आगे मेडा हुआ असहाय
कोई साधारण व्यक्ति एक छोटा सा मकान भी बनाए तो मेडा की टीम आ धमकती है, नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। लेकिन तेजी से पनप रही अवैध कॉलोनियों पर ध्वस्तीकरण के नाम पर महज खानापूर्ति कर टीम लौट आती है। मामूली तोड़फोड़ कर कागजों में ध्वस्त दिखा दिया जाता है। दूसरी ओर अवैध कॉलोनी काटने में न केवल राजनीतिक रसूख रखने वाले सूरमा शामिल हैं, बल्कि कई व्यापारी नेता भी ऊंचे रसूख के बूते धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं।
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मेडा रखता है प्लॉट बंधक
जालसाजी कर प्लॉट बेचने व ठगने के मामले भी लगातार पुलिस के पास पहुंच रहे हैं। कई लोग मेडा में भी इसकी शिकायत लेकर आते हैं। कोई भी संपत्ति ले रहे हैं तो मेडा की वेबसाइट पर इसे जांच लें।

ये है प्रक्रिया
कॉलोनी को नियम अनुसार, वैध कराने के लिए मेडा में बिल्डर को आवेदन करना होता है। ले-आउट नक्शा बनता है, जिसमें इंगित होता है कि पार्क, पार्किंग, लिफ्ट समेत विभिन्न्न जरूरी सुविधाओं के लिए जमीन छोड़ी गई है या नहीं। बिल्डर से विकास शुल्क लिया जाता है। कुछ प्लॉट बंधक भी मेडा रखता है। बिल्डर द्वारा विकास कार्य बीच में ही छोड़ देने पर इन प्लॉट को बेचकर मेडा अधूरे काम पूरे कराता है। बिल्डर के काम पूरा करने पर बंधक प्लॉट अवमुक्त कर दिए जाते हैं। मेडा द्वारा स्वीकृत कॉलोनियों के नक्शे भी वेबसाइट पर अपलोड हैं।

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अफसर बोले- अपनी कमाई अवैध कालोनियों में न लगाएं, लगातार हो रहा ध्वस्तीकरण
मेडा के सचिव चंद्रपाल तिवारी ने बताया कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। लगातार टीम बनाकर ध्वस्तीकरण कराया जा रहा है। एमडीए मेरठ की वेबसाइट पर अवैध और वैध कॉलोनियों का ब्योरा भी अपलोड कर दिया गया है। लोग अपनी गाढ़ी कमाई को अवैध कॉलोनियों में न झोंकें, इसके लिए मेडा के मुख्य द्वार पर ही चेतावनी बोर्ड लगाया गया है।

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