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बसपा एमएलसी का मकान सरकारी संपत्ति घोषित, दलित महिला से खरीदी थी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:25 PM IST
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बीएसपी एमएलसी महमूद अली
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अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व न्यायालय ने बसपा के एमएलसी महमूद अली एवं पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल समेत चार लोगों द्वारा दलित महिला से खरीदी गई 2564.71 वर्ग गज भूमि पर बनाए गए मकान को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया गया है। बेहट तहसीलदार को इस भूमि पर कब्जा किए जाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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एमएलसी महमूद अली, पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल, मोहम्मद इनाम और अब्दुल वहीद ने बेहट के ग्राम मिर्जापुर पोल निवासी खुशहाली पत्नी भरतू से 22 जुलाई 1999 को 2564.71 वर्ग गज भूमि खरीदी थी। यह मामला काफी समय से एडीएम एफ कोर्ट में विचाराधीन चल रहा था।
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इस मामले में एसडीएम बेहट ने अपनी जांच रिपोर्ट जनवरी 2018 में जिलाधिकारी को दी थी। जिलाधिकारी ने निस्तारण के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व के न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया था। एडीएम वित्त न्यायालय ने तीनों को और मृतक अब्दुल वहीद के उत्तराधिकारियों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष जाना था।
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सरकारी अधिवक्ता ने बहस में कहा था खुशहाली पत्नी भरतू निवासी मिर्जापुर पोल से यह भूमि 22 जुलाई 1999 को चारों लोगों ने बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के खरीदी गई थी। इस पर उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश अधिनियम एवं भू व्यवस्था 1950 की धारा 166-167 और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 104 -105 लागू होती है। जबकि विपक्षी के अधिवक्ता का कहना था वह जमीन आबादी की थी इस लिए यह अधिनियम एवं धारा लागू नहीं होती है। लेकिन विपक्षी अधिवक्ता इसका ठोस आधार कोर्ट में नहीं दे पाए।
अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व विनोद कुमार ने दोनों अधिवक्ताओं की दलीलें और रिकार्ड का परिशीलन करते हुए मान लिया कि यह 2564.71 वर्गगज जमीन इन लोगों द्वारा सक्षम अधिकारी के बिना अनुमति के खरीदी गई है जो गलत है। इसलिए न्यायालय ने इसे सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने तहसीलदार बेहट को आदेश दिया है कि वह जमीन इस जमीन को सरकारी रिकार्ड में सरकार का नाम दर्ज कर उस पर कब्जा प्राप्त कर लें। इस मामले में बात करने पर अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व विनोद कुमार ने बताया कि उनके न्यायालय से यह आदेश पारित किया गया है।
हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है
बसपा एमएलसी महमूद अली का कहना है कि एडीएम एफ कोर्ट द्वारा उन्हें इस मामले में नोटिस भेजा गया था। इस नोटिस के आधार पर उन्होंने एडीएम कोर्ट के निर्णय से पूर्व ही हाईकोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया है।