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Meerut News: ब्रिटिश काल में बने पुल हो चुके हैं जर्जर, अफसर डाल रहे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी
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मेरठ। गंगनहर पर ब्रिटिश काल में बने पुल जर्जर हो चुके हैं। ये पुल कब गंगनहर में समा जाएं, कुछ नहीं पता। शनिवार को सलावा में गंगनहर का पुल टूटने से हड़कंप मच गया लेकिन सिंचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी एक दूसरे पर ही जिम्मेदारी का ठीकरा फोड़ रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही के चलते निकट भविष्य में भी इस तरह के हादसों से छुटकारा मिलने की उम्मीद नहीं है।
हरिद्वार हर की पौड़ी से निकली गंगनहर को ब्रिटिश काल में बनवाया गया था। उस समय गंगनहर पर मेरठ जिले में भोला झाल, जानी, नानू, सरधना, अटेरना, टीकरी, भलसोना, सोंदा, डिडोली, सठहेड़ी समेत काफी स्थानों पर पुल बनवाए गए थे। सिंचाई विभाग के रिकार्ड के अनुसार इन पुलों की उम्र 100 साल से अधिक हो चुकी है। फिलहाल जानी, नानू गंगनहर पर ही नए पुल बने हैं। बाकी सभी पुराने पुलों पर अब भी भारी वाहन दौड़ रहे हैं। भोले की झाल पर पनचक्की, टरबाइन समेत तीन पुल हैं। तीनों ही पुल जर्जर हैं। इन पुलों का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। इन पुलों पर वाहन काफी संख्या में गुजरते हैं।
नहरों पर जितने भी पुल हैं, उनको बनाने और रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की है। यानी जिसका मार्ग उसी का पुल। सिंचाई विभाग पूर्व में नहरों के 100 साल पुराने सभी पुलों की रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को दे चुका है। सलावा में भी गंगनहर के पुल को बनाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। सिंचाई विभाग ने सलावा पुल पर जर्जर होने की सूचना का बोर्ड लगाया था, जिसे किसी ने उखाड़ दिया। - नीरज लांबा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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गंगनहर के पुलों के रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है, फिर भी अधिशासी अभियंता से बात करेंगे। सलावा गंगनहर के पुल के गिरने की सूचना मिली है। - ओपी सोनकर, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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हरिद्वार हर की पौड़ी से निकली गंगनहर को ब्रिटिश काल में बनवाया गया था। उस समय गंगनहर पर मेरठ जिले में भोला झाल, जानी, नानू, सरधना, अटेरना, टीकरी, भलसोना, सोंदा, डिडोली, सठहेड़ी समेत काफी स्थानों पर पुल बनवाए गए थे। सिंचाई विभाग के रिकार्ड के अनुसार इन पुलों की उम्र 100 साल से अधिक हो चुकी है। फिलहाल जानी, नानू गंगनहर पर ही नए पुल बने हैं। बाकी सभी पुराने पुलों पर अब भी भारी वाहन दौड़ रहे हैं। भोले की झाल पर पनचक्की, टरबाइन समेत तीन पुल हैं। तीनों ही पुल जर्जर हैं। इन पुलों का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। इन पुलों पर वाहन काफी संख्या में गुजरते हैं।
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नहरों पर जितने भी पुल हैं, उनको बनाने और रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की है। यानी जिसका मार्ग उसी का पुल। सिंचाई विभाग पूर्व में नहरों के 100 साल पुराने सभी पुलों की रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को दे चुका है। सलावा में भी गंगनहर के पुल को बनाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। सिंचाई विभाग ने सलावा पुल पर जर्जर होने की सूचना का बोर्ड लगाया था, जिसे किसी ने उखाड़ दिया। - नीरज लांबा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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गंगनहर के पुलों के रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है, फिर भी अधिशासी अभियंता से बात करेंगे। सलावा गंगनहर के पुल के गिरने की सूचना मिली है। - ओपी सोनकर, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी