एक्सक्लूसिव: मां के दूध का कमाल, इंजेक्शन लगने पर भी नहीं रोये लाल, अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
मेरठ मेडिकल कॉलेज में डेढ़ से तीन माह के बच्चों पर हुए एक अध्ययन में स्तनपान को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्टडी में सामने आया है कि स्तनपान करने वाले ज्यादातर बच्चों को टीकाकरण के दौरान दर्द का एहसास नहीं हुआ।
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मां का दूध किसी चमत्कार से कम नहीं है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में हुए अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि यह स्थानीय निश्चेतक से भी ज्यादा दर्द निवारक है। डेढ़ से तीन माह के 120 बच्चों पर किए गए इस अध्ययन में यह पता चला कि जो बच्चे स्तनपान कर रहे थे, उन्हें टीकाकरण के दौरान होने वाले दर्द का अहसास नहीं हुआ। वे रोये नहीं, जबकि बिना स्तनपान कर रहे बच्चों और जिन बच्चों के हाथ पर स्प्रे से या क्रीम के जरिए स्थानीय निश्चेतक लगाया गया था, उन्हें टीके के दर्द का ज्यादा अहसास हुआ और वे रोये।
शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी मां का दूध
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि मां का दूध बच्चे के लिए अमृत का काम करता है। इसके सेवन से न सिर्फ शिशु का अच्छी तरह से पेट भर पाता है, बल्कि उसके शारीरिक और मानसिक विकास में भी यह बहुत ही तीव्र कार्य करता है।
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महिलाओं को बीमारियों का खतरा
स्तनपान न सिर्फ एक नवजात बच्चे को तंदुरुस्त रखने के लिए जरूरी होता है, बल्कि यह एक नवजात के साथ-साथ महिला के लिए भी उतना ही जरूरी है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम सिरोही ने बताया कि अगर कोई नई मां बनी महिला बच्चे को स्तनपान नहीं कराती है, तो वह कुछ गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकती है।
40-40 बच्चों के बनाए गए थे तीन ग्रुप
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नवरत्न ने बताया कि इस अध्ययन के लिए 40-40 के बच्चों के तीन ग्रुप ए, बी और सी बनाए गए थे। ए ग्रुप के बच्चों को महिला चिकित्सक ने तब टीका लगाया, जब वे स्तनपान कर रहे थे, जबकि बी ग्रुप को तब टीका लगाया, जब वे स्तनपान नहीं कर रहे थे।
सी ग्रुप के बच्चों को टीका लगाने से पहले उनके उस स्थान पर स्थानीय निश्चेतक स्प्रे या क्रीम लगाने के बाद टीका लगाया गया। टीका लगाने के दौरान ग्रुप ए वाले बच्चे नहीं रोए या उन्हें बहुत मामूली सा एहसास हुआ।
ग्रुप बी वाले बच्चे रोए और ग्रुप सी वाले बच्चे बहुत ज्यादा रोये। इससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि मां का दूध बच्चे के दर्द निवारक की तरह भी कार्य करता है। बच्चों को रोटावायरस दस्त, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी, खसरा, निमोनिया से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं।
ये चिकित्सक थे शामिल
डॉ. नवरत्न
डॉ. विजय जायसवाल
डॉ. आस्था
डॉ. निखिल
डॉ. अजीत