बसपा में फूट, शाहिद अखलाक आउट तो याकूब को बनाया संयोजक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव में बसपा की हार को लेकर मंगलवार को पार्टी कार्यालय में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में हुए बखेड़े की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान के पास पहुंची तो दोपहर बाद ही कई पदाधिकारी दिल्ली तलब कर लिए गए। इस दौरान पार्टी की गतिविधियों की रिपोर्ट ली गई। जिसके बाद बसपा जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव ने जारी प्रेस नोट में बताया कि देर शाम पूर्व सांसद शाहिद अखलाक को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। वहीं, याकूब कुरैशी को मेरठ लोकसभा सीट का संयोजक बनाया गया है।
शाहिद अखलाक को 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद विस चुनाव से पहले उनकी वापसी हो गई थी। उन्हें वेस्ट के मुस्लिमों को साधने की जिम्मेदारी दी गई थी। चर्चा है कि मंगलवार को हुए बखेड़े के अलावा विस चुनावों के प्रत्याशियों की राय को भी अहम माना जा रहा है। पार्टी की आपसी गुटबाजी के कारण ही शाहिद को पार्टी से बाहर कर दिया गया। पिछली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने के कारण उन्हें पार्टी से बाहर किया गया था। उधर, अखलाक कैंप का दावा है कि समीक्षा बैठक विभिन्न कारणों से पहले भी तीन बार स्थगित हुई थी। आखिर में रोहटा रोड स्थित बैंक्वेट हॉल में बुकिंग की गई थी। खुद शाहिद अखलाक का दावा है कि उन्होंने अपने खर्च पर बैंक्वेट हाल बुक कराया था। बसपा जिलाध्यक्ष ने पैसा लेकर बैठक पार्टी कार्यालय पर रख ली गई। सूचना न मिलने के कारण शाहिद वहां नहीं पहुंच सके थे।
वहीं, शाहिद अखलाक का कहना है कि पार्टी से निकाले जाने का उन्हें कोई अफसोस नहीं है। हालांकि एकतरफा कार्रवाई से आहत हूं। बसपा में कई मुस्लिम नेता पार्टी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। पहले उन्होंने चुनाव में पार्टी को बुरी तरह से हार दिलाई। अब मजबूत लोगों को पार्टी से निकलवा रहे हैं।
इससे पहले मंगलवार को ही विस चुनाव में बसपा की हार को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी जिसमें बखेड़ा हो गया था। पूर्व विधायक योगेश वर्मा और पूर्व जिलाध्यक्ष प्रशांत गौतम आपस में भिड़ गए थे। साथ में कार्यकर्ता भी उलझ गए थे। कार्यकर्ताओं ने एमएलसी अतर सिंह राव का पुतला फूंका तो वेस्ट यूपी प्रभारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस बीच नसीमुद्दीन चुपचाप खिसक लिए। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद मंगलवार को बसपा की पहली समीक्षा बैठक पार्टी कार्यालय पर हुई। नसीमुद्दीन सिद्दीकी बैठक संबोधित करने खड़े हुए तो एक कार्यकर्ता ने मंडल कोऑर्डिनेटर अतर सिंह राव हटाओ का नारा लगा दिया। इस पर नसीमुद्दीन ने नाराजगी जतायी तो पूर्व विधायक योगेश वर्मा बीच में बोल पड़े। उन्होंने कहा कि अतर सिंह राव को नहीं, बल्कि उन्हें हटाना चाहिए जिनकी ड्यूटी उत्तराखंड में लगी थी। लेकिन उन्होंने वहां से हस्तिनापुर आकर मुझे चुनाव हरवाने का काम किया।
योगेश वर्मा का इशारा प्रशांत गौतम की तरफ था। यह सुनकर प्रशांत गौतम भड़क गये और बोले कि उत्तराखंड का जिक्र क्यों कर रहे हो। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई। दोनों के समर्थकों में मारपीट और हंगामा होने लगा। एक पक्ष ने नारेबाजी कर बाहर अतर सिंह राव का पुतला फूंक दिया। वहीं, कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के भीतर नसीमुद्दीन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें हटाने की मांग कर दी। बसपा सूत्रों की मानें तो ऐसा बखेड़ा होगा, इसकी जानकारी नसीमुद्दीन को पहले ही मिल गयी थी। उन्होंने सोमवार से ही प्रमुख नेताओं को फोन कर विरोध को शांत करने की कोशिशें शुरू कर दी थीं।