फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Boxa tribe was expert in extracting gold from the river.

Meerut News: नदी से सोना निकालने में माहिर थी बोक्सा जनजाति

Tue, 09 Jan 2024 12:27 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Updated Tue, 09 Jan 2024 12:27 AM IST
विज्ञापन
Boxa tribe was expert in extracting gold from the river.
बिजनौर, अफजलगढ़। रामगंगा नदी के रेत से सोना निकालने में बोक्सा जनजाति माहिर रही है। मगर सरकार की पाबंदी के चलते यह काम अब बंद हो चुका है। दरअसल रामगंगा नदी के पास बसे कुआंखेड़ा और भोगपुर गांव में बोक्सा जनजाति के 175 परिवार निवास करते हैं। जोकि अब बदलते दौर के साथ कदमताल करने को आतुर हैं। हालांकि इनके एक गांव कुआंखेड़ा तक आज तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी। इस वजह से गांव के मुहाने पर ही कीचड़ पसरा हुआ है।
विज्ञापन

मुगलकाल में राजस्थान-पंजाब आदि अन्य राज्यों से बोक्सा जनजाति के लोग कुंआखेड़ा व भोगपुर आकर बसे थे। जिसमें कुऑखेड़ा में 84 परिवार के 406 लोग तथा भोगपुर में 91 परिवार में करीब 350 लोग निवास करते हैं। यहां बसने के बाद ये लोग नदियों से कच्चे सोने की तलाश कर और मछली पकड़कर गुजर बसर करते रहे। बोक्सा खुद को राजा जगतदेव का वंशज मानते हैं तथा बिरादराना को भगवान मानते हैं। 84 परिवारों में से कुछ ही लोगों के पास खेती की जमीन है, अधिकतर लोग राजमिस्त्री व खेतों पर मजदूरी करते हैं।
विज्ञापन



गांव निवासी राजू सिंह ने बताया कि करीब 17वीं शताब्दी के आसपास उनके परिवार के लोग मुगलों के उत्पीड़न से तंग आकर उनके पूर्वज यहां आकर बसे थे। तभी से उनकी कई पीढ़ी यहीं रही है। मजदूरी कर गुजर बसर कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




मुनीम सिंह ने बताया कि पूर्व में उनके पूर्वज रामगंगा नदी सहित आसपास की अन्य सहायक नदियों से रेत से सोना निकालने का कार्य करते थे, उन्होंने भी काफी समय तक यहीं कार्य किया। करीब 40 वर्षों से सरकार ने रेत का खनन बताते हुए ठेका देना बंद कर दिया।



पवन सिंह ने बताया कि क्षेत्र में अच्छे स्कूलों का अभाव है। गांव के बच्चों काे 8वीं के बाद कादराबाद व अफजलगढ़ में उच्च शिक्षा के लिए जाना पड़ता है। गांव में कम से कम इंटर तक काॅलेज व क्षेत्र में आईटीआई स्कूल स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुल आबादी में से करीब 15 प्रतिशत युवा पढ़े लिखे हैं जिनमें से करीब 20 से 25 लोगों ने बीए भी कर रखा है। वहीं गांव की पिंकी गांव में अन्य बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रही है। यहां के कुछ युवा पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी करने की इच्छा रखते हैं।




ग्राम प्रधान सतपाल सिंह का कहना है कि पूर्व में पूर्व में मूलभूत सुविधाओं की कमी थी। जो धीरे-धीरे सरकार की ओर से पूरी करने का कार्य किया जा रहा है, जिसमें बिजली की लाइन, पीने के लिए पानी की लाइन तथा घरों में खाने बनाने के लिए गैस सिलिंडर उपलब्ध करा दिए गए हैं, वहीं मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 23 लोगों के मकान का निर्माण जारी हुआ है, वे करीब 30 लोग सूची में हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा मोबाइल टावर, छात्रावास, बरातघर तथा इंटर काॅलेज के लिए भूमि की व्यवस्था कर स्थापित कराने के लिए प्रयास किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed