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संघ, संगठन, समन्वय और सक्रियता का रखा ध्यान

Thu, 22 Aug 2019 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Aug 2019 12:42 AM IST
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Board of Ministers of Government of Uttar Pradesh
शहर विधायक एवं चरथावल विधायक के मंत्री पद पर चयन होने की शिव चौक पर खुशी में नाचते भाजपाई। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
संघ, संगठन और सक्रियता का रखा ध्यान
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मुजफ्फरनगर। योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में वेस्ट यूपी को खासी तव्वजो मिली है। संघ और संगठन से समन्वय, जनता में सक्रियता का लाभ बनाए गए मंत्रियों को मिला है। जो नए मंत्री बनाए गए है, लंबे समय से पार्टी में सक्रिय है और जमीन से जुड़े रहे हैं। जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। जिले से कपिलदेव अग्रवाल और विजय कश्यप की ताजपोशी की गई है।
भाजपा वोट समीकरण के आधार पर ज्यादातर बिरादरियों को मंत्रिमंडल और आयोग में नुमाइंदगी दे रही है। प्रदेश मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में शहर से विधायक कपिलदेव अग्रवाल को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और चरथावल विधायक विजय कश्यप को राज्यमंत्री बनाने के पीछे जातीय समीकरणों गणित तो अहम है ही साथ ही इन्हें पार्टी और क्षेत्र में सक्रियता व समन्वय का इनाम भी मिला है। लोकसभा चुनाव में सपा, बसपा और रालोद गठबंधन के बावजूद वेस्ट में भाजपा को मिली बंपर सीटों की वजह पर भी मंत्रिमंडल विस्तार में विशेष ध्यान दिया गया, जिन जातियों का रुख भाजपा के पक्ष में रहा, उन्हें मंत्री बनाने में तवज्जो दी गई। सारी कोशिश जातीय संतुलन साधने की है। मुजफ्फरनगर लोकसभा से लगातार दूसरी बार सांसद बने डॉक्टर संजीव बालियान केंद्र के मोदी सरकार में राज्यमंत्री है। पिछली मोदी सरकार में भी वह मंत्री रहे थे, बाद में उनकी जगह बागपत से सांसद सत्यपाल सिंह को मंत्री बनाया गया था। गैर जाट जातियों को साधने के लिए भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल में वैश्य और कश्यप बिरादरी को प्रतिनिधित्व दिया है। जिले में पार्टी ने पहले से नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन डॉक्टर सुभाषचंद्र शर्मा को आयुष बोर्ड का अध्यक्ष बना रखा है। जबकि सरदार सुखदर्शन सिंह बेदी अल्पसंयक आयोग के और जगदीश पांचाल पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य है। पड़ोसी जिले शामली की थानाभवन सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बने सुरेश राणा को मंत्रिमंडल में कैबिनेट के दर्जा देकर राजपूतों को साधा गया है। सहारनपुर से डॉक्टर धर्मसिंह सैनी पहले से सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार है।
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अशोक कटारिया की ताजपोशी से साधे गुर्जर
मुजफ्फरनगर। जातीय संतुलन बनाने को एमएलसी अशोक कटारिया की किस्मत खुली है। बिजनौर लोकसभा क्षेत्र की दो विधानसभा सीटें मीरापुर और पुरकाजी (सुरक्षित) जनपद मुजफ्फरनगर की है। मीरापुर सीट से गुर्जर नेता अवतार सिंह भड़ाना भाजपा टिकट पर विधायक बने थे। मेरठ, फरीदाबाद लोकसभा सीट से सांसद रह चुके अवतार को प्रदेश मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, तो निराश होकर कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि अभी तक उनका इस्तीफा मीरापुर से मंजूर नहीं हुआ है। गुर्जर समुदाय को साधने के लिए बिजनौर के एमएलसी अशोक कटारिया को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा सौंपा गया है। योगी के पहले मंत्रिमंडल में कोई गुर्जर विधायक मंत्री नहीं था। गंगोह उपचुनाव में भी पार्टी को कटारिया को मंत्री बनाने का फायदा मिलेगा।
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क्षेत्र में सक्रियता का सुरेश राणा को मिला इनाम
शामली। थानाभवन विधायक और प्रदेश के गन्ना राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार सुरेश राणा को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने के बाद जिले को विकास की आस जगी है। राणा का कद बढ़ने के पीछे सीएम योगी से नजदीकी और क्षेत्र में सक्रियता को बड़ी वजह माना जा रहा है।
पार्टी में सुरेश राणा को हिंदूवादी चेहरे के रुप में जाना जाता है। मुजफ्फरनगर दंगों में उन्हें आरोपी बनाया गया था और कई महीने वे जेल भी रहकर आए थे। प्रदेश में भाजपा की सत्ता आते ही पार्टी ने उन्हें स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाकर इसका इनाम भी दिया था। मंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने विस क्षेत्र और जिले में सक्रियता कम नहीं की। इसी की वजह से वे सीएम के भी नजदीकी होते गए। इसका लाभ भी उन्हें मिला। उन्होंने अपने विस क्षेत्र में राजकीय कालेजों को मंजूरी दिलाई। सालों से खस्ताहाल पड़ी थानाभवन से गढ़ीपुख्ता रोड का बजट मंजूर कराया। कई अन्य संपर्क मार्गों को मंजूरी दिलाकर काम शुरू कराया। थानाभवन कस्बे में बूढ़ा बाबू तालाब के जीर्णोद्धार शुरू कराया। गन्ने के साथ औद्योगिक विकास राज्यमंत्री का भी प्रभार होने के कारण उन्होंने जिले के इंडस्ट्रियल एरिया के विकास के लिए फरवरी माह में 6.86 करोड़ का बजट मंजूर कराया। यहां ये भी गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में इस मद में तहत केवल 19 करोड़ रुपये थे, जिसमें से एक तिहाई से अधिक बजट शामली के खाते में आया। मार्च में राणा ने ही खुद इंडस्ट्रीयल एरिया में इसका शुभारंभ किया था।
किसानों का गन्ना भुगतान बकाया
शामली। हालांकि गन्ना मंत्री अपने क्षेत्र के किसानों को पूरा गन्ना भुगतान अभी तक नहीं करा सके। पेराई सत्र खत्म हो चुुका है, लेकिन जिले की तीनों चीनी मिलों पर अभी भी गन्ना किसानों का करीब 450 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है और किसान भुगतान की मांग कर रहे हैं।
संघ की सेवा से संगठन में बनाई पहचान
चरथावल। आरएसएस के खांटी कार्यकर्ता से पहली बार विधायक बने विजय कश्यप के लिए मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना सपनों सरीखा है। चरथावल विधानसभा क्षेत्र से वह कश्यप बिरादरी के पहले विधायक हैं।
राजनीति में कब किसकी किस्मत चमक जाए कोई कयास नहीं लगा सकता। विधायक विजय कश्यप की दास्तां भी कुछ ऐसी ही है। साधारण परिवार और आर्थिक दिक्कतें, मगर वर्ष 1989 में आरएसएस का प्रशिक्षु बनने का फैसला कामयाबी की नई ऊंचाइयों पर ले गया। सहारनपुर के नानौता के मूल वाशिंदे कश्यप ने खंड कार्यवाह, बौद्धिक प्रमुख का दायित्व निभाया। चरथावल क्षेत्र की सीमा से उनका कस्बा सटा है। संघ के संगठन को लेकर उनकी क्षेत्र में सक्रियता रहती थी। हालांकि यह सीट सुरक्षित थी। वर्ष 2007 में संघ ने उन्हें चुनावी जाति समीकरण साधने को बघरा सीट से भाजपा में एंट्री दिला दी, मगर वह जीत नहीं पाए। पार्टी ने हौसला बढ़ाए रखने को भाजपा ने उन्हें मत्स्य प्रकोष्ठ के प्रांतीय अध्यक्ष बना दिया। शांत प्रवृति के विजय पर पार्टी का भरोसा रहा। यही वजह है कि परिसीमन के बाद जैसे ही चरथावल सीट सामान्य में आई, उन्हें वर्ष 2012 के चुनाव में दोबारा टिकट दे दिया।

बसपा के नूरसलीम राणा के खिलाफ वह जीत नहीं पाए। वर्ष 2012 में पार्टी ने उन्हें लोकसभा कैराना के प्रभारी का जिम्मा सौंपा। पश्चिम में विजय कश्यप भाजपा का चेहरा बन गए। मोदी लहर के बाद वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लगातार तीसरी बार उन्हें टिकट थमा दिया। सपा प्रत्याशी मुकेश चौधरी को शिकस्त देकर कश्यप पहली बार एमएलए बने। योगी मंत्रिमंडल में जगह मिलने से प्रफुल्लित विजय कश्यप ने बताया कि उन्होंने कभी एमएलए बनने का सपना नहीं देखा था। बताते चले कि इससे पहले वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार में चरथावल विधायक उमा किरण समाज कल्याण राज्यमंत्री बनी थी।
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