चौंकाने वाला खुलासा: 473 युवाओं को निकला हेपेटाइटिस-एचआईवी, इन कारणों से होती हैं ये बीमारियां
Meerut News : ब्लड बैंकों की सालाना रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 473 युवाओं में हेपेटाइटिस और एचआईवी की पुष्टि हुई है।
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रक्तदान न सिर्फ दूसरों लोगों की जिंदगी बचाने का जरिया बन रहा, बल्कि खुद को भी जीवनदान दे रहा है। दरअसल, युवाओं को पता ही नहीं चल रहा है कि वे एचआईवी और हेपेटाइटिस बी व सी की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन रक्तदान करने की उनकी अच्छी सोच उनके लिए वरदान बन रही है। उन्हें गंभीर बीमारियों का पता चल रहा है और इलाज से वे ठीक हो रहे हैं।
एलएलआरएम मेडिकल और जिला अस्पताल के ब्लड बैंकों की एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिला अस्पताल और मेडिकल में इस दौरान माह के दौरान 473 रक्तदान करने वाले हेपेटाइटिस सी व बी और एचआईवी के शिकार निकले हैं। इनमें अधिकांश 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
एलएलआरएम मेडिकल के ब्लड बैंक में 346 रक्तदाता बीमार मिले हैं, उनमें 18 एचआईवी पॉजिटिव हैं। 173 हेपेटाइटिस सी और 152 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित पाए गए। वहीं, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की रिपोर्ट में 11 लोग एचआईवी पॉजिटिव, 67 हेपेटाइटिस सी और 52 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित निकले। जांच के बाद बीमार लोगों का खून नष्ट कर दिया गया। अस्पताल के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन लोगों से संपर्क किया और इलाज शुरू कराया है।
समय पर इलाज से ठीक हो सकता है हेपेटाइटिस-सी
मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि हेपेटाइटिस सी (यकृतशोथ ग) इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता। इस कारण यह जानलेवा हो जाती है। मेडिकल में इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है।
जानलेवा है हेपेटाइटिस-बी
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस बी (यकृतशोथ बी) एक संक्रामक बीमारी है। इसके कारण लीवर की सूजन और जलन पैदा होती है। इसके वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में जाने से होता है। इसका इलाज वायरस रोधी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं, जिससे लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है एचआईवी
मेडिकल के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर तरह तरह की बीमारियां और इंफेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8-10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है।
इन कारणों से होती हैं ये बीमारियां
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना।
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल।
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा।
- दूषित सुईं से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना।
- असुरक्षित यौन संबंध।