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है धन्य तेरी माया जग में ओ दुनिया के रखवाले
Tue, 05 Aug 2025 08:10 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Tue, 05 Aug 2025 08:10 PM IST
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- श्री रामा संकीर्तन मंदिर लालकुर्ती में हुई शिवमहापुराण कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रीरामा संकीर्तन मंदिर लालकुर्ती में शिवमहापुराण कथा के 26वें दिन कथा व्यास पंडित अंबुज मिश्रा ने भक्ति और ज्ञान की अमृतवर्षा की। उनके भजन ‘है धन्य तेरी माया जग में, ओ दुनिया के रखवाले शिव शंकर डमरू वाले’ ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंडित मिश्रा ने शिव की विभिन्न लीलाओं और ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। भक्तों के मन को शिवमय कर दिया।
पंंडित अंबुज मिश्रा ने शुक्राचार्य की कथा सुनाई। नंदीश्वर द्वारा दैत्य गुरु शुक्राचार्य का अपहरण और भगवान शिव द्वारा उन्हें निगलने की घटना को विस्तार से सुनाया। शुक्राचार्य संजीवनी विद्या के स्वामी थे। जब शिव को उनके इस विद्या के दुरुपयोग का पता चला तो उन्होंने शुक्राचार्य को निगल लिया। ऐसे में असुरों का पुनर्जन्म से रोक दिया गया। सौ वर्ष तक शिवलिंग के मार्ग से तपस्या करने के बाद शुक्राचार्य बाहर निकले। शिव ने उनका नाम ‘शुक्र’ रखा। पंडित मिश्रा ने मृत्युंजय मंत्र और शिवाष्टोतरशतनामस्तोत्र की महिमा भी बताई।
कथा में पंडित मिश्रा ने पांच ज्योतिर्लिंगों की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर में विंध्य पर्वत की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने ज्योतिर्लिंग रूप लिया। केदारनाथ में पांडवों को दर्शन देकर शिव ने उनके पापों से मुक्ति दिलाई। काशी विश्वनाथ में शिव स्वयं वाराणसी में ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हैं। यजमान पूनम अरोड़ा, प्रेम मूर्ति और नवीन अग्रवाल रहे। ट्रस्ट के महामंत्री सुरेश छाबड़ा ने बताया कि जैसे-जैसे कथा अपने विश्राम की ओर बढ़ रही है। भक्तों के मन में धार्मिक भाव जाग रहा है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रीरामा संकीर्तन मंदिर लालकुर्ती में शिवमहापुराण कथा के 26वें दिन कथा व्यास पंडित अंबुज मिश्रा ने भक्ति और ज्ञान की अमृतवर्षा की। उनके भजन ‘है धन्य तेरी माया जग में, ओ दुनिया के रखवाले शिव शंकर डमरू वाले’ ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंडित मिश्रा ने शिव की विभिन्न लीलाओं और ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। भक्तों के मन को शिवमय कर दिया।
पंंडित अंबुज मिश्रा ने शुक्राचार्य की कथा सुनाई। नंदीश्वर द्वारा दैत्य गुरु शुक्राचार्य का अपहरण और भगवान शिव द्वारा उन्हें निगलने की घटना को विस्तार से सुनाया। शुक्राचार्य संजीवनी विद्या के स्वामी थे। जब शिव को उनके इस विद्या के दुरुपयोग का पता चला तो उन्होंने शुक्राचार्य को निगल लिया। ऐसे में असुरों का पुनर्जन्म से रोक दिया गया। सौ वर्ष तक शिवलिंग के मार्ग से तपस्या करने के बाद शुक्राचार्य बाहर निकले। शिव ने उनका नाम ‘शुक्र’ रखा। पंडित मिश्रा ने मृत्युंजय मंत्र और शिवाष्टोतरशतनामस्तोत्र की महिमा भी बताई।
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कथा में पंडित मिश्रा ने पांच ज्योतिर्लिंगों की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर में विंध्य पर्वत की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने ज्योतिर्लिंग रूप लिया। केदारनाथ में पांडवों को दर्शन देकर शिव ने उनके पापों से मुक्ति दिलाई। काशी विश्वनाथ में शिव स्वयं वाराणसी में ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हैं। यजमान पूनम अरोड़ा, प्रेम मूर्ति और नवीन अग्रवाल रहे। ट्रस्ट के महामंत्री सुरेश छाबड़ा ने बताया कि जैसे-जैसे कथा अपने विश्राम की ओर बढ़ रही है। भक्तों के मन में धार्मिक भाव जाग रहा है।
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