मेरठ में सोतीगंज के अपराधी कबाड़ियों पर पुलिस कार्रवाई न कर दोस्ती का हक निभा रही है। इसका प्रत्यक्ष नमूना हिस्ट्रीशीटर राहुल काला है, जिसकी तलाश में दबिश के दावे करने वाली पुलिस ने उसे अभी तक नामजद तक नहीं किया है। सवाल है कि पुलिस जब काला को नामजद ही नहीं करना चाहती तो गिरफ्तारी कैसे हो सकती है।
हिस्ट्रीशीटर से दोस्ती... गिरफ्तारी के नाम पर यूपी पुलिस कर रही ड्रामा, आखिर कैसे दबोचा जाएगा राहुल काला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली पुलिस ने तीन दिन पहले वाहन चोर की निशानदेही पर राहुल काला की तलाश में उसके सोतीगंज स्थित गोदाम में दबिश दी थी। इस दौरान स्थानीय पुलिस भी वहां मौजूद थी। राहुल काला सदर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस ने गोदाम से कई बाइकों के चेसिस बरामद किए थे। जिनकी जांच करने के लिए फोरेंसिक लैब में भेजने का दावा भी किया गया था। दिल्ली पुलिस की टीम राहुल काला की तलाश में मेरठ में ही डेरा डाले है। लेकिन तीन दिन से पुलिस टीम राहुल काला को लेकर ड्रामा कर रही है।
पुलिस का दावा कि अभी तक राहुल काला सदर थाने या फिर दिल्ली पुलिस का नामजद आरोपी नही है। ऐसे में सवाल उठता कि जब अभी वह आरोपी ही नहीं है तो उसकी कैसे तलाश की जा रही है। काला पुराने मुकदमे में जमानत पर है। काला से पुलिस दोस्ती निभा रही है। पुलिस इसका मौका दे रही है कि दो-चार दिन में मामला ठंडा होते ही फिर पहले की तरह वह अपना धंधा कर सके।
यह भी पढ़ें: तहसीलदार पत्नी की मौत... सदमे में पति, खौफनाक था हादसा, तीन की गई जान, तस्वीरें
सिर्फ मजाक बना रही पुलिस
दिल्ली पुलिस भी मजाक बना रही है। एक तरह वाहन चोर ने पूछताछ में राहुल काला का नाम लिया। उसकी निशानदेही पर दबिश भी दी गई। दूसरी तरफ सदर थाना पुलिस भी दावा करती है कि राहुल काला सोतीगंज में चोरी की बाइक काटने में माहिर है। बताया जाता है कि काला चोरी की 1000 से अधिक बाइक काट चुका है। इस मामले में मेरठ और दिल्ली पुलिस के दावे बहुत बड़े हैं। लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो रहा है।
पक्की दोस्ती, कैसे करें काला पर कार्रवाई
पुलिस का दावा कि राहुल काला के खिलाफ अभी कोई भी ऐसा सुबूत नहीं है, जिसे उसे मुकदमे में नामजद किया जाए। इससे साफ है कि पुलिस राहुल से पक्की दोस्ती निभा रही है। काला पर कैसे कार्रवाई करें, इसको लेकर कुछ सूझ नहीं रहा है। पुलिस की महज खानापूर्ति की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। काला के खिलाफ कोई भी आरोप नहीं बनता जब तक की एफएसएल रिपोर्ट न आ जाए।