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Mission 2024: यूपी की इस सीट पर सस्पेंस बरकरार, भाजपा आज खोल सकती है पत्ते, सपा के दावेदार लखनऊ में डटे

Wed, 20 Mar 2024 04:56 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 20 Mar 2024 04:56 PM IST
सार

Mission 2024 : यूपी की इस सीट पर भाजपा ने अभी तक सस्पेंस बरकरार कर रखा है। चर्चा है कि भाजपा आज अपने पत्ते खोल सकती है। उधर, सपा के दावेदार भी लखनऊ में डटे हुए हैं।

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BJP will announce on west up seats in coming soon and SP leaders are stuck in Lucknow
भाजपा का लोगो। सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भाजपा ने पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर अभी तक अपने प्रत्याशियों के नाम के पत्ते नहीं खोले हैं। चर्चा है कि बुधवार को भाजपा पत्ते खोल सकती है। वहीं, सपा के दावेदार भी लखनऊ में डटे हैं। हालांकि, मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से सपा का टिकट घोषित हो चुका है, लेकिन अन्य दावेदार अभी भी जोर आजमाइश में लगे हैं।

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भाजपा सूत्रों का कहना है कि गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र से जनरल वीके की मजबूत दावेदारी से मेरठ लोकसभा सीट पर पेच फंसा हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों पर भाजपा ब्राह्मण, गुर्जर, जाट, दलित और पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी उतार चुकी है। सहारनपुर से ब्राह्मण और मुरादाबाद से पार्टी क्षत्रिय समाज को प्रतिनिधित्व दे सकती है। ऐसे में वैश्य समाज से एक प्रत्याशी जरूर घोषित किया जाना है। अब देखना यह है कि मेरठ से वैश्य प्रत्याशी घोषित किया जाना है या गाजियाबाद से।

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भाजपा संगठन के हिसाब से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 14 लोकसभा सीटें आती हैं। इनमें मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल की सीटें आती हैं। पहली सूची में भाजपा आठ सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी हैं। बागपत और बिजनौर लोकसभा सीटें रालोद के खाते में चली गई हैं। ऐसे में अब मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर और मुरादाबाद के प्रत्याशी घोषित होने हैं। मुजफ्फरनगर से संजीव बालियान जाट, कैराना और अमरोहा से गुर्जर और गौतमबुद्धनगर से ब्राह्मण समाज से महेश शर्मा को टिकट दिया गया है। दलित और पिछड़ा वर्ग समाज के प्रत्याशी भी घोषित किए जा चुके हैं। 

पार्टी के नेताओं की मानें तो सहारनपुर में ब्राह्मण और मुरादाबाद में क्षत्रिय प्रत्याशी उतारा जा सकता है। ऐसे में गाजियाबाद ने मेरठ का गणित उलझा दिया है। अगर जनरल वीके सिंह का टिकट रिपीट किया जाता है तो मेरठ सीट वैश्य समाज के खाते में आ जाएगी। हर किसी की नजर इस पर लगी है कि पार्टी तीन बार से सांसद राजेंद्र अग्रवाल पर चौथी बार दांव खेलेगी या फिर नए प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया जाएगा।

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वहीं, सपा के प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह की बुधवार को कार्यकर्ताओं के साथ बैठक थी, लेकिन लखनऊ में सपा के टिकट के दावेदारों की वजह से फिलहाल उसे स्थगित कर दिया है। अब यह बैठक बृहस्पतिवार को हो सकती है।

2019 में महज 4729 वोटों से हुई थी जीत
भाजपा से 2019 में राजेंद्र अग्रवाल तीसरी बार सांसद बने, लेकिन जीत का अंतर बेहद कम रहा। बसपा प्रत्याशी हाजी याकूब से वे सिर्फ 4729 वोटों से ही जीत पाए। यही कारण है कि भाजपा इस सीट से राजेंद्र अग्रवाल को चौथी बार प्रत्याशी बनाने की बजाय नया प्रत्याशी ला सकती है। हालांकि, पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अभी कुछ तय नहीं है। अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व को ही लेना है। ऐसे में अभी इसको लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि बुधवार को भी प्रत्याशी घोषित हो जाएंगे। ऐसा भी हो सकता है कि भाजपा सहारनपुर और मुरादाबाद से बुधवार को प्रत्याशी घोषित कर दे लेकिन, मेरठ और गाजियाबाद को होल्ड ही रखा जाए। 

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विपक्ष कर रहा एआईएमआईएम के प्रत्याशी घोषित होने का इंतजार
मेरठ लोकसभा सीट के लिए जितना इंतजार भाजपा के प्रत्याशी का हो रहा है। ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लेमीन (एआईएमआईएम) के प्रत्याशी का इंतजार भी उससे कम नहीं हो रहा। इसकी वजह साफ है। 2023 में हुए मेयर के चुनाव में एआईएमआईएम ने दिग्गजों को पछाड़कर सभी को भौंचक्का कर दिया था। इस चुनाव में एआईएमआईएम दूसरे, सपा तीसरे और बसपा चौथे नंबर पर थी, जबकि 2017 में बसपा ने मेयर का चुनाव जीता था। यही वजह है कि इस बार एआईएमआईएम को लेकर खास कर सपा और बसपा काफी सतर्क हैं। दोनों ही पार्टियों की नजर मेरठ में एआईएमआईएम के प्रत्याशी पर है।

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