भाजपा की बड़ी जीत पर जश्न में डूबे भाजपाई
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विधानसभा चुनाव में भाजपा ने क्रांतिधरा पर भी इतिहास रच दिया है। पार्टी की बड़ी जीत पर भाजपाइयों ने गुलाल उड़ाते हुए आतिशबाजी कर एक साथ होली-दिवाली मना ली। भगवा ब्रिगेड ने सपा को करारा झटका देते हुए जिले की सात में से छह सीटों पर कब्जा जमा लिया है। वहीं बसपा लगातार दूसरे विधानसभा चुनाव में खाता नहीं खोल पाई है। चुनावी बिसात पर जिले के दो दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है। शहर सीट से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को सपा के रफीक अंसारी ने 28769 वोटों से शिकस्त दी। जबकि, किठौर से सपा प्रत्याशी कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर को भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने 10822 मतों से हराया। इनके अलावा हस्तिनापुर से सिटिंग विधायक सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि और सिवालखास से हाजी गुलाम मोहम्मद को हार का मुंह देखना पड़ा।
प्वाइंटर्स
- 76619 मतों से जीत हासिल कर लगातार चौथी बार विधायक चुने गए सत्यप्रकाश अग्रवाल।
- 21625 मतों से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम ने।
- 35395 मतों से जीत दर्ज की पहली बार चुनाव मैदान में उतरे भाजपा के डॉ. सोमेंद्र तोमर ने।
- 11421 मतों से जीते सिवालखास प्रत्याशी जितेंद्र सतवाई ने। ये भी पहली बार चुनाव लड़े थे।
- 36062 मतों से जीते हस्तिनापुर प्रत्याशी दिनेश खटीक। पहली बार उतरे थे चुनाव मैदान में।
- 10822 मतों से जीत दर्ज की भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर पर।
- 28769 मतों से डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को हराकर सपा को एकमात्र जीत दिलाने में कामयाब रहे रफीक अंसारी
भाजपा को मिला सत्ता विरोधी लहर का फायदा
भाजपा की जीत की लहर ने सूबे की राजनीति एकदम पलट दी है। सत्ता और विपक्ष को खारिज करते जनता जनार्दन ने कमल खिला दिया। प्रचंड बहुमत की वजह गिनाए जा रही हैं। राजनीति शास्त्री और सीसीएसयू के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व हेड प्रो. एसके चतुर्वेदी ने भाजपा की जीत के कारण गिनाए। उन्होंने कहा एंटी इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का अच्छा फायदा भाजपा को मिला। सपा के विकास को जनता ने नकार दिया। सपा के सामने बसपा का कमजोर विपक्ष था। मतदाताओं को उसमें भी भरोसा नहीं था। कुछ शिकायतें भी थीं। इसका लाभ भाजपा को मिला। भाजपा का संगठन मजबूत है। चुनाव में वह अपनी बात पहुंचाने में कामयाब रहे। लोगों ने सोचा कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होगी तो विकास और काम में बाधा नहीं आएगी। यह मैसेज देने में कामयाब रहे। किसानों के कर्ज माफ कर देने के वादे ने भी असर दिखाया। तलाक के मुद्दे पर कुछ हद तक मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा को वोट किया है। मुस्लिम क्षेत्रों से वोट का मिलना इस बात का प्रमाण है। भाजपा का शहर सीट हारने का समीकरण अलग है। पार्टी पहले भी यहां हारी है। नजदीक के मुकाबले में हार का रिस्क हमेशा रहता है।
करप्शन, क्राइम और कॉडर की वजह से बनी सरकार
भाजपा का परचम लहराने की वजह पर समाजशास्त्री और सीसीएसयू के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व हेड प्रो. जेके पुंडीर का कहना है कि सूबे की सियासत में बदलाव की तीन मुख्य वजह करप्शन, क्राइम और कॉडर रही हैं।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया। केंद्र की तीन साल की सरकार पर करप्शन का अभी तक कोई आरोप नहीं है। सपा और बसपा पर करप्शन के आरोप लगे हैं। इसको कैश किया गया। प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहद खराब है। जनता पिछले 10 साल में बसपा और सपा को आजमा चुकी है। इसलिए जनता ने इस बार भाजपा को मौका दिया है। सत्ता विरोधी लहर में नोटबंदी का असर नहीं दिखा। पार्टी यह मेसेज देने में कामयाब रही कि नोटबंदी सही लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं की गई। चुनावी रणनीति में भाजपा सबसे आगे रही। जिन विधानसभा में भाजपा के दिग्गज हारे हैं, वहां स्थानीय मुद्दे हावी हैं। मेरठ शहर की सीट पर चुनाव की हार-जीत ध्रुवीकरण पर टिकी रहती है। भाजपा ध्रुवीकरण को इस बार अपने हक में नहीं करा पाई।