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कार्यकारिणी चुनाव में फिर मात खा सकती है भाजपा

Mon, 31 Aug 2020 02:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 02:00 AM IST
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BJP can beat the executive elections again
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में एक बार फिर भाजपा की किरकिरी हो सकती है। इसकी प्रमुख वजह गुटबाजी के बीच कुछ नेताओं की निगम में चल रही ठेकेदारी को माना जा रहा है। तीन सितंबर को कार्यकारिणी का चुनाव होना है, लेकिन संगठन ने अभी तक पार्षदों की बैठक नहीं बुलाई है।
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छह सदस्यों का होना है चुनाव
नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में इस बार छह सदस्य चुने जाने हैं। नियम अनुसार लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से बाहर हो चुके छह सदस्यों की जगह उनका चुनाव होना है।
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उपाध्यक्ष पद पर है नजर
वर्तमान में महापौर खेमे से डिप्टी मेयर हैं। पिछली कार्यकारिणी में भाजपा के 12 में से मात्र पांच सदस्य चुनकर आए थे। लॉटरी सिस्टम में तीन सदस्य बाहर हो चुके हैं। अब इनकी संख्या महज दो रह गई है। ऐसे में भाजपा को यदि अपना डिप्टी मेयर बनाना है तो कार्यकारिणी में पांच सदस्य निर्वाचित कराने होंगे। यह असंभव नहीं तो मुश्किल जरूर दिख रहा है। इसमें एक निर्णायक वोट महापौर का भी रहेगा। यह भाजपा के आंकड़े बिगाड़ने के लिए काफी है।
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भाजपा संगठन का नहीं है ध्यान
नगर निगम में भाजपा की तूती बोलती थी परंतु अब हाशिए पर नजर आती है। सूबे में अपनी सरकार होने के बावजूद उसके पार्षद अपने काम कराने के लिए धक्के खाते हैं। इसका कारण भाजपा की अंदरुनी गुटबाजी है। कई पदाधिकारी पहले निगम में प्रत्यक्ष ठेकेदारी करते थे। वहीं, अब अप्रत्यक्ष रूप से जुडे़ हैं। इनके दबाव के चलते पार्षदों की अहमियत खत्म हो गई है। कार्यकारिणी चुनाव को मात्र तीन दिन शेष रह गए हैं। इसके बावजूद भाजपा संगठन द्वारा अपने पार्षदों को एक छत के नीचे इकट्ठा नहीं किया जा सका है। सूत्रों की माने तो भाजपा के पार्षद दल नेता तक ने चुनाव को लेकर बैठक नहीं बुलाई है। वहीं, दूसरी ओर महापौर खेमा रातदिन तैयारी में जुटा है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि ऐन मौके पर चुनाव टालने की तैयारी है। वर्तमान परिस्थिति में साफ है कि इस बार दूसरा खेमा भाजपा की किरकिरी करा सकता है।

नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव की चौसर बिछनी शुरू
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी के तीन सितंबर को होने जा रहे छह सदस्यीय चुनाव के लिए भाजपा और बसपा समेत अन्य दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। वहीं, ताल ठोंकने वाले संभावित पार्षदों के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें भाजपा की ओर से पार्षद राकेश शर्मा, संदीप रेवड़ी, महेंद्र भारती, प्रिया शाक्य, सुमन और सुनीता के नाम की चर्चा है। वहीं, बसपा और महापौर खेमे से पार्षद परमानंद, हिमांशी, सितारा बेगम और अब्दुल गफ्फार के नाम सामने आ रहे हैं। संख्या बल के आधार पर भाजपा के 43 सदस्य हैं और उसे अपने 3 सदस्य जिताने के लिए 48 वोट चाहिए। वहीं, बसपा और सपा समेत निर्दलीय आदि चार सदस्य जिताने की जुगत में हैं। हालांकि ये दूर की कौड़ी नजर आ रही है। चुनावी समीकरण की बात करें तो 90 वार्डों में से दो वार्ड पार्षदों की मृत्यु हो जाने से 88 निर्वाचित पार्षद वोट करेंगे। इनके अतिरिक्त महापौर, आठ पदेन सदस्यों को मिलाकर कुल 97 वोट हैं। पदेन सदस्यों में एक लोकसभा सांसद, दो राज्यसभा सांसद, तीन विधायक और दो एमएलसी हैं। पदेन सदस्यों में भाजपा के पास 8 वोट हैं। इस हिसाब से भाजपा 43 पार्षद और 8 पदेन सदस्यों की वोट के आधार पर अपने तीन सदस्यों को आसानी से जीता सकती है। हालांकि विपक्ष घेराबंदी में जुटा है।
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