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बर्ड फ्लू ने बढ़ाई प्रवासी पक्षियों की मुश्किलें

Sat, 16 Jan 2021 02:14 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jan 2021 02:14 AM IST
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Bird flu increases migratory birds' problems
हस्तिनापुर। सात समुद्र पार कर शीतकालीन प्रवास के लिए हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में सालाना आने वाले प्रवासी पक्षियों की मुश्किलें बर्ड फ्लू ने बढ़ा दी हैं। इनके लिए वापसी का सफर चुनौती भरा है। हालांकि अभी तक वन विभाग ने सेंक्चुअरि में किसी भी बीमार पक्षी मिलने की पुष्टि नहीं की है, रात-दिन निगरानी और देखभाल की जा रही है, ताकि ये मेहमान परिंदे सुरक्षित अपने वतन लौट सकें।
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बर्ड फ्लू के प्रकोप से सेंक्चुअरि में यूरोपीय देशों के पक्षियों की जान मुसीबत में है। कई राज्यों में कई ऐसे पक्षियों के मरने के मामले सामने आए हैं जिसे चलते सेंक्चुअरि में पशुपालन, स्वास्थ्य विभाग और वन विभाग को अलर्ट रखा गया है। उन्हें खास ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि वे इन पक्षियों को ठीक से समझें और उनका बेहतर ध्यान रख पाएं।
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पक्षी प्रेमी भी आहत
इन खूबसूरत और दिल लुभाने वाले मेहमान परिंदों पर आई बर्ड फ्लू बीमारी से पक्षी प्रेमी भी आहत हैं। प्रवासी पक्षी आहार की खोज में भारत जैसे गर्म देशों में आते हैं, क्योंकि अपने देश में उन्हें हर तरफ जमी बर्फ की वजह से आहार मिलने में दिक्कत होती है। ये जिन कीट, वनस्पतियों या जीवों को खाते हैं, वे बर्फीले मौसम में समाप्त हो जाते हैं या फिर जमीन के अंदर चले जाते हैं जिससे इन्हें भोजन के संकट से जूझना पड़ता है इसलिए यह यूरोपीय देशों से सेंक्चुअरि सहित कई स्थानों का रुख करते हैं और चार-पांच माह का समय यहीं बिताते हैं। अप्रैल माह में यह अपने वतन लौटने लगते हैं
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रफ्तार के बाजीगर
इन प्रवासी पक्षियों के उड़ने की क्षमता अद्भुत होती है। कुछ तेज तो कुछ बिना रुके लगातार लंबी उड़ान भर सकते हैं। यह भले ही अविश्वसनीय लगे, पर ये दो अलग-अलग गुण हैं, जो हर परिंदे में नहीं होते, मगर स्वीडन की पेरेग्रीन फॉल्कॉन नामक पक्षी में ये दोनों विशेषताएं होती हैं।

दिमाग भी उतना तेज
इन प्रवासी परिंदों का रफ्तार के साथ दिमाग भी उतना ही तेज चलता है। तभी तो ये हर साल उसी स्थान पर आते हैं, जहां वे बीते वर्ष आते रहते हैं। इसके लिए वे सूर्य की दिशा और तारों की स्थिति के साथ पर्वत, नदी, वन, झील आदि की भी सहायता लेते हैं। किस वक्त यात्रा शुरू करनी है, इसका भी इन्हें पता होता है इन्हें, तभी उड़ान भरने और बर्फ जमने से पहले ही ये अपने शरीर में पर्याप्त वसा जमा कर लेते हैं। यही इनका ईंधन है, जिसे लेने के बाद ही इनकी यात्रा भारत की ओर तय होती है।
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