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बिना मान्यता के स्कूल में करंट, मासूम की मौत

Thu, 19 May 2016 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 19 May 2016 02:31 AM IST
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bina manyata ke school
करंट की चपेट में आयी नंदनी सिरोही अस्पताल में भर्ती - फोटो : अमर उजाला
 बागपत रोड स्थित कुराली गांव में बिना मान्यता के चल रहे एम पब्लिक स्कूल में बुधवार सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। कक्षा एक का छात्र अपनी सहपाठी बहन के साथ नल पर पानी पीने पहुंचा तो नल में करंट उतर आया। छात्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बहन भी बुरी तरह झुलस गई। स्कूल प्रबंधन की इस गंभीर लापरवाही से गुस्साए ग्रामीणों ने मेरठ-बागपत हाइवे जाम करते हुए पुलिस को घेर लिया। बच्चे के पिता ने स्कूल प्रबंधक और उसके पुत्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी है।
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गांव कुराली निवासी राजेश का नौ वर्षीय बेटा लक्की उर्फ रचित और उसकी बहन नंदिनी (11) गांव में स्थित एम पब्लिक स्कूल में बुधवार सुबह पढ़ने गए थे। सुबह करीब 10:45 बजे दोनों भाई-बहन पानी पीने स्कूल परिसर में लगे नल पर पहुंचे।
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नल पर टुल्लू पंप रखा था। जिसके तार नल को छू रहे थे। लक्की ने जैसे ही नल पर हाथ लगाया तो उसे नल में उतरे करंट ने चपेट में ले लिया। लक्की नल से ही चिपक गया। पास खड़ी नंदिनी उसे नल से छुड़ाने का प्रयास तो उसे भी तेज झटका लगा। दोनों भाई बहन कुछ देर तक करंट से जूझते रहे।
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इस बीच दोनों क्लास में नहीं पहुंचे तो स्कूल टीचर लक्की की चाची बरखा ने दूसरे बच्चों को उन्हें देखने के लिए भेजा। बच्चों ने दोनों के नल के पास बेहोश पड़े होने की जानकारी दी तो हड़कंप मच गया। नल से चिपके तार को तुरंत हटाया गया।
बरखा की सूचना पर जब तक लक्की के परिजन वहां पहुंचे, स्कूल प्रबंधन के लोग उन्हें जानी के ही एक निजी अस्पताल में ले जा चुके थे। जहां से दोनों मेरठ के सिरोही अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने लक्की को देखते ही मृत घोषित कर दिया, जबकि नंदिनी को गंभीर हालत में भर्ती कर लिया गया। परिजनों का आरोप है कि लक्की की मौत स्कूल में ही हो चुकी थी।
इस हादसे की सूचना पर कुराली के सैकड़ों लोग स्कूल में एकत्रित हो गए, लेकिन स्कूल प्रबंधक, प्रधानाचार्य आदि वहां से गायब मिले। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने मेरठ-बागपत हाइवे जाम कर दिया। स्कूल में तोड़फोड़ का प्रयास किया गया, पुलिस ने उन्हें किसी तरह रोका। पुलिस को घेरकर भी ग्रामीणों ने प्रबंध तंत्र की गिरफ्तारी की मांग की।
बच्चों के पिता राजेश ने जानी थाने में प्रबंधक ताराचंद और उसके बेटे विनय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। उधर, स्कूल में जांच करने पहुंचे बीएसए मोहम्मद इकबाल ने बताया कि स्कूल बिना मान्यता के चल रहा था। इंस्पेक्टर जानी संजीव कुमार के अनुसार बीएसए ने भी बिना मान्यता स्कूल चलने पर प्रबंधक के खिलाफ तहरीर दी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

बच्चा जिंदा ला दो, खोल देंगे जाम   
 करंट से छात्र की मौत की खबर मिलने पर ग्रामीण स्कूल पहुंचे तो वहां ताला लटका देख भड़क गए। मेरठ-बागपत हाइवे जाम कर दिया गया। जाम खुलवाने पहुंची पुलिस को भी उनका गुस्सा झेलना पड़ा। गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस से कहा कि हमारा बच्चा जिंदा ला दो, जाम खोल देंगे। वे घटना के दोषी प्रबंध तंत्र की गिरफ्तारी की जिद पर अड़ गए। करीब एक घंटे बाद प्रबंध तंत्र पर मुकदमा और जल्द गिरफ्तारी के आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम खोला।
इस घटना से ग्रामीणों में बेहद गुस्सा था। उनका कहना था कि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। नल पर बिजली की मोटर तार तार खुला छोड़ना बहुत बड़ी लापरवाही है।
हादसे के बाद स्कूल वालों को पीड़ित परिजनों के साथ होकर उनकी मदद करनी चाहिए थी लेकिन वह ताला लगाकर ही भाग गए। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग को कोसते हुए कहा कि अधिकारी कभी ऐसे स्कूलों में आकर भी नहीं झांकते।
अभिभावकों को क्या पता कि कौन सा स्कूल मान्यता प्राप्त है या नहीं। घटना होने के बाद ही उन्हें ऐसे स्कूलों की याद आती है। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया तो ग्रामीण बोले कि जिसका मरता है, उसे ही पता चलता है।

मिला सरकारी मदद का भरोसा
तहसीलदार मेरठ ने छात्र के घर पहुंचकर पीडित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। वहीं, बीएसए ने भी परिजनों को सांत्वना दी।

स्कूल की लापरवाही ने छीन ली खुशियां
स्कूल के नल पर लगे टुल्लू पंप के तार में कई कट लगे थे। हैरानी की बात थी कि स्कूल प्रबंधन ने इस पर ध्यान नहीं दिया और उनकी इसी लापरवाही ने एक परिवार की हंसती खेलती दुनिया उजाड़ दी। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा था।
लक्की की मां अमृता का रो रोकर बुरा हाल था। राजेश के चार बच्चे हैं। इनमें सबसे बड़ी बेटी 15 साल की बेटी बुलबुल है। नंदिनी दूसरे और लक्की उर्फ रचित तीसरे नंबर का था। जबकि पांच साल का बेटा ललित भी है। उसके भाई बहन बार बार उसे पुकार कर याद कर रो रहे हैं।

शर्मनाक : स्कूल वालों ने सूचना तक नहीं दी
छात्र के पिता राजेश का कहना है कि घटना के बाद स्कूल वालों ने उन्हें जानकारी तक नहीं दी। स्कूल प्रशासन इस घटना को छुपाता रहा। जबकि लक्की करंट लगने के बाद काफी देर तक तड़पता रहा था।

यदि उसे स्कूल में ही प्राथमिक उपचार मिल जाता तो उसे बचाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि बच्चे की मौत स्कूल में ही हो गई थी लेकिन दिखावा करने को स्कूल वाले उसे डॉक्टरों के यहां ले गए थे।
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