Meerut :ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत, चुनाव तक संभालेंगे पंचायतों की कमान, मेरठ में 479 प्रधान बनेंगे प्रशासक
उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के बाद मेरठ जिले के 479 ग्राम प्रधान पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। प्रधानों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे गांवों के विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव होने तक ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाए रखने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले से मेरठ जिले के ग्राम प्रधानों में खुशी की लहर है। प्रधानों का कहना है कि इस निर्णय से गांवों में चल रहे विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहेगी और ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन सरकार के निर्णय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
मेरठ में 479 ग्राम प्रधान संभालेंगे जिम्मेदारी
मेरठ जिले के 12 विकास खंडों में कुल 479 ग्राम पंचायतें हैं। पंचायत चुनाव संपन्न होने तक इन्हीं ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। जिले में कुल 255 पुरुष और 224 महिला ग्राम प्रधान हैं। इनमें अनुसूचित जाति वर्ग की 38 महिला प्रधान, पिछड़ा वर्ग की 47 महिला प्रधान और आरक्षित महिला सीटों पर निर्वाचित 76 महिला प्रधान शामिल हैं। इसके अलावा सामान्य सीटों पर भी 63 महिलाओं ने जीत दर्ज की थी।
यह भी पढ़ें: West UP Weather: आज झुलसाएगी नौतपा की तपिश, कल से बदलेगा मौसम, बारिश-आंधी से मिलेगी राहत
प्रधानों ने फैसले का किया स्वागत
किशोरपुर की ग्राम प्रधान रीतू चौधरी ने कहा कि यदि किसी अधिकारी को प्रशासक बनाया जाता तो उसके लिए एक साथ कई ग्राम पंचायतों का संचालन करना मुश्किल होता। वर्तमान व्यवस्था से विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।
जलालपुर जोरा के ग्राम प्रधान और राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के मंडल सचिव महेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का यह निर्णय गांवों के हित में है और इससे विकास कार्य पूर्व की तरह चलते रहेंगे। भैंसा के ग्राम प्रधान उमेश चौधरी का कहना है कि जब पंचायतों की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी जाती है तो ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अधिक चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्राम प्रधान सीधे जनता के संपर्क में रहते हैं, इसलिए समस्याओं का समाधान तेजी से हो पाता है।
तोफापुर के प्रधान और संगठन के जिला प्रभारी अजय सागर ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की लंबे समय से यह मांग थी, जिसे सरकार ने स्वीकार किया है। भामौरी के ग्राम प्रधान ठाकुर दिनेश ने कहा कि यदि पंचायतों की जिम्मेदारी पूरी तरह अधिकारियों को सौंप दी जाती तो छोटे-छोटे विकास कार्य प्रभावित हो सकते थे।
अटेरना की ग्राम प्रधान चंचल सोम ने कहा कि ग्राम प्रधान जनता के बीच रहते हैं और स्थानीय जरूरतों को बेहतर तरीके से समझते हैं। इसलिए गांवों की समस्याओं का समाधान भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है। सरधना देहात और अहमदाबाद की ग्राम प्रधान कोमल ने कहा कि इस निर्णय से निर्माणाधीन परियोजनाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं को गति मिलेगी।
मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था रहेगी जारी
प्रधानों का मानना है कि इस फैसले से गांवों में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पंचायतों के माध्यम से चल रही योजनाएं पहले की तरह संचालित होती रहेंगी।
किस विकास खंड में कितनी ग्राम पंचायतें
विकास खंड ग्राम पंचायतें
जानी 44
रोहटा 39
दौराला 45
रजपुरा 45
खरखौदा 30
मवाना 47
मेरठ 21
हस्तिनापुर 46
सरूरपुर 27
माछरा 42
परीक्षितगढ़ 54
(अन्य विकास खंड सहित कुल) 479
ग्रामीण विकास को मिलेगी निरंतरता
पंचायत चुनाव की तिथि घोषित होने और नई पंचायतों के गठन तक ग्राम प्रधानों को प्रशासकीय अधिकार मिलने से ग्रामीण विकास योजनाओं की निरंतरता बनी रहेगी। इससे गांवों में चल रहे कार्यों के रुकने की आशंका भी खत्म हो गई है।