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सीसीएसयू में लाएंगे ऑनलाइन सिस्टम में बड़ा बदलाव: कुलपति

Wed, 27 Mar 2019 03:29 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Wed, 27 Mar 2019 03:29 AM IST
सार

- अमर उजाला से बातचीत में बोले वीसी प्रो. एनके तनेजा, पैसे मांगने वालों को भिजवाएंगे जेल
- आईआईटी और दूसरी एजेंसी के इंजीनियर्स से चल रही बात, जल्द लाएंगे एडवांस ग्रीवांस सेल

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Big changes in online system to bring CCSU: VC
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय - फोटो : File Photo

विस्तार


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 सीसीएसयू में डिग्री-प्रमाण पत्र बनाने में दलाली उजागर होने के बाद कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने जहां दोषी कर्र्मचारियों को सस्पेंड किया है तो ऑनलाइन सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। अमर उजाला से बातचीत में कुलपति ने बताया कि यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार करने वालों पर आगे और भी सख्त कार्रवाई होगी।
सवाल : कैंपस में इस तरह से प्रमाण पत्र बनाने में खेल चल रहा था। इसके बाद भी यह सब पकड़ा क्यों नहीं गया?
कुलपति: इसमें यूनिवर्सिटी के कर्मचारी ही नहीं अधिकारी भी दोषी हैं। इस मामले में कार्यवाहक रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार और दूसरे जिम्मेदार पदों पर बैठे सभी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने रोजाना का रिकॉर्ड चेक क्यों नहीं किया। इस प्रकरण में जांच के बाद सख्त कार्रवाई होगी।
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सवाल: ग्रीवांस सेल सिस्टम पटरी पर नहीं आया। ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था कैसे बदलेगी?
कुलपति : ग्रीवांस सेल सिस्टम चलता रहेगा। लेकिन हम अलग से एक नया ग्रीवांस सेल शुरू कराने जा रहे हैं। इसके लिए आईआईटी और दूसरी नामचीन एजेंसी के इंजीनियर्स से बात चल रही हैं। चाहे कुछ भी हो हम बहुत जल्द एडवांस ग्रीवांस सेल शुरू करेंगे। उसका सारा सिस्टम हमारे ऑफिस से रहेगा। जो भी प्रमाण पत्र बनेंगे उनका पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा। यह बहुत जल्द ही अमल में लाया जाएगा।
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सवाल : प्रमाण पत्र और इस तरह के कार्यों संबंधी गलती पर रजिस्ट्रार या डिप्टी रजिस्ट्रार जवाबदेह क्यों नहीं हैं?
जवाब: रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक अभी आए नहीं हैं। अब इन कार्यों के लिए हर अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। किसी को भी कोई मौका नहीं मिलेगा। लापरवाही की एक हद होती है। जिम्मेदार पदों पर बैठे अफसरों को ऐसी गलतियों पर स्पष्टीकरण देना होगा।
सवाल: इस तरह का अनैतिक कार्य फिर से शुरू हो गया तो क्या करेंगे?
जवाब: जिन छात्र-छात्राओं को किसी कारणवश जल्द प्रमाण पत्रों की आवश्यकता होती है, वे हमारे ऑफिस में आकर संपर्क करते रहे हैं। छात्र-छात्राओं को अगर कोई प्रमाण पत्र बनाने में परेशान करता है या काम के लिए टालता है तो ऐसे में उस कर्मचारी की शिकायत करें। यूनिवर्सिटी छात्र-छात्राओं के कार्यों के लिए ही है। ऐसे में अगर उनको कोई टालता है या पैसे मांगता है तो उसको बख्शा नहीं जाएगा। अगर कोई किसी काम के पैसे मांगे तो सीधे हमारे ऑफिस में शिकायत करें। ऐसे लोगों को जेल भी भिजवाएंगे।

घूसखोरी के मिले पुख्ता प्रमाण, हर कोई हैरान  

 सीसीएसयू में मंगलवार को कुलपति ने सारा रिकॉर्ड अपने कार्यालय मंगाया तो डिग्री और प्रमाण पत्रों में घूसखोरी का खेल देखकर अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक हैरान रह गए। 30 से 40 प्रमाणपत्र रोजाना आवेदन करने वालों के जारी किए जा रहे थे। अकेले सोमवार को 25 डिग्री तुरंत आवेदन करने वालों को जारी की गई। इस खेल में गोपनीय विभाग के कई कर्मचारियों के अलावा कौन अधिकारी लिप्त हैं, इसका राजफाश होने के बाद और बड़ी कार्रवाई होगी। कई घंटे तक इसको लेकर कुलपति ने तमाम अधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं, कैंपस में कर्मचारियों का कहना है कि ऐसा करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। कुछ कर्मचारियों की वजह से सबका नाम बदनाम होता है।
भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल को दरअसल में गोपनीय विभाग के कुछ कर्मचारी ही अंजाम दिला रहे हैं। इन्हीं के संपर्क में रहने वाले बाहर से शिकार तलाशते हैं और फार्म लाकर कर्मचारी को दे देते हैं। कर्मचारी शाम साढ़े चार बजे उन फार्मों को अपने गुर्गों को बुलाकर थमा देते हैं। इनमें कई गुर्गे तो बाहर चाय वाले तक हैं। कई कर्मचारियों का दावा था कि बाहरी दलाल इस काम को अंजाम दे रहे हैं। लेकिन जब मंगलवार को कुलपति ने सारा रिकॉर्ड मंगवाया तो हर कोई हैरान रह गया। साफ हो गया कि गोपनीय विभाग से ही सारी गड़बड़ी चल रही है। अकेले सोमवार को ही 25 डिग्री के फार्म ऐसे मिले जिनका आवेदन सोमवार को ही किया गया था। इसके अलावा पिछले कई दिनों का रिकॉर्ड मंगवाया तो उसमें भी 25 से 40 तक ऐसे फार्म मिले जिनके आवेदन डिग्री दिए जाने वाले दिन ही किए गए थे। इन फार्मों पर हस्ताक्षर करते वक्त किसी भी कर्मचारी या अफसर ने क्यों नहीं देखा। पुराना बैकलॉग होते हुए उसी दिन वाली डिग्रियां आखिर कैसे बन गईं। इस पूरे प्रकरण में आठ से 10 कर्मचारी अभी और फंस सकते हैं। कमेटी को इन कर्मचारियों से स्पष्ट पूछना पड़ेगा कि आखिर उन्होंने इन डिग्रियों को बनाया तो कैसे बनाया। क्यों बनाया? ये बाहर सीधे छात्रों के हाथों में कैसे पहुंच गए। इन सवालों का किसी भी कर्मचारी के पास जवाब नहीं है।

इन पर भी कार्रवाई जरूरी
मंगलवार को कैंपस में इस प्रकरण की चर्चा रही। तमाम कर्मचारियों ने कहा कि जो जैसा करेगा, वैसा ही भरेगा। यूनिवर्सिटी का नाम खराब करने वाला कोई भी हो, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। कर्मचारियों का कहना था कि कुलपति ने सही एक्शन लिया है। लेकिन यह कार्रवाई तो छात्र समस्या केंद्र वालों पर हुई है। जो गोपनीय विभाग में खेल कर रहे थे, उनको भी सजा देनी चाहिए।
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