बीएचयू विवाद: सामने आई दिल की बातें...शीबा को खुश रखती है 'संस्कृत' तो सुशीला को 'उर्दू' से मोहब्बत
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत धर्म विद्या संकाय में प्रोफेसर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर मचे विवाद पर देवबंद की शिक्षिका शीबा परवीन और सुशीला ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि भाषाएं किसी की मोहताज नहीं हैं। इसलिए भाषाओं को धर्म में कभी नहीं बांटा जाना चाहिए।
कुलसत गांव निवासी सुशीला शर्मा देवबंद स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय नंबर-1 में तैनात है। वह पिछले करीब 23 साल से उर्दू की खिदमत कर बच्चों को उर्दू भाषा का ज्ञान करा रही हैं। उनका कहना कि 1994 में उनकी नियुक्ति हुई थी। उर्दू बीटीसी इंटेंस में उन्होंने जिला टॉप किया था। सुशीला ने बताया कि बचपन से ही उन्हें उर्दू से बेहद लगाव रहा है।
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उन्होंने बताया कि धर्म व जातपात से ऊपर उठकर योग्यता को वरीयता दी जानी चाहिए। वहीं, ठाकुर कृपाल सिंह डिग्री कॉलेज रणखंडी में डॉ. शीबा परवीन संस्कृत भाषा पढ़ा रही हैं। सहारनपुर की रहने वाली शीबा ने बताया कि उन्होंने सीसीएस यूनिवर्सिटी से संस्कृत में पीएचडी की है। शीबा ने बताया कि संस्कृत लेते समय उनके परिजनों ने भी कोई एतराज नहीं किया था।
उनका कहना है कि भाषाएं किसी की मोहताज नहीं हैं, इसलिए भाषाओं का बंटवारा धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि भाषाएं दिलों को तोड़ती नहीं बल्कि जोड़ती हैं।
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