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UP: किसानों के सच्चे पैरोकार थे बड़े चौधरी, गरीबों से मुकदमे की नहीं लेते थे फीस, उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से

Fri, 09 Feb 2024 02:43 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 09 Feb 2024 02:43 PM IST
सार

Chaudhary Charan Singh : गांव की आर्थिक प्रगति के लिए चरण सिंह लघु एवं विकेंद्रित उद्योगों के हिमायती थे। उनका मानना था कि कृषि मजदूरों एवं अन्य लाखों गरीब किसानों एवं ग्रामीण बेरोजगारों की आय बढ़ाने के लिए कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देना अति आवश्यक है।

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Bharat Ratna Chaudhary Charan Singh: true advocate of rural development, untold stories
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बड़े चौधरी को भारत रत्न देने के एलान से वेस्ट यूपी के लोगों में गजब का उत्साह है, चौधरी चरण  सिंह के नजदीक रहे लोगों को कहना है  कि उन्होंने ग्रामीण  विकास के लिए जितना किया वह इसके वह हकदार हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की यादों और बातों की खुशबू खेत-खलिहान तक फैली है। किसानों की समस्याएं बढ़ती गई, लेकिन बड़े चौधरी जैसा रहनुमा अब कोई नहीं दिखता। गन्ने के बकाया भुगतान, बिजली बिल, डीजल के दाम और उर्वरकों की कीमतें बढ़ी है, लेकिन किसान व ग्रामीणों के विकास अगुवाई करने के लिए ऐसा कोई भरोसेमंद चेहरा तक नहीं है।

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गांव की आर्थिक प्रगति के लिए चरण सिंह लघु एवं विकेंद्रित उद्योगों के हिमायती रहे। वह मानते थे कि कृषि मजदूरों एवं अन्य लाखों गरीब, किसानों एवं ग्रामीण बेरोजगारों को सशक्त बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देना बेहद जरूरी है।
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Bharat Ratna Chaudhary Charan Singh: true advocate of rural development, untold stories
शामली में कार्यक्रम के दौरान समर्थकों से वार्ता करते पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह फाइल फोट - फोटो : SHAMLI
चौधरी चरण सिंह गांव के विकास के लिए सरकारी सेवाओं में किसानों की संतानों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के समर्थक थे। उनका मानना था कि हमारे राज्य या देश की परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति सच्चे अर्थों में लोगों की सेवा तब तक नहीं कर सकता जब तक कि वह गांव को और ग्रामीणों की समस्याओं से वास्तविक रूप में रूबरू न हो। अपने पूरे राजनीतिक जीवन में वे ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए प्रयासरत रहे, जब भी उन्हें अवसर मिला उन्होंने इसके लिए ठोस कदम उठाए। धरती पुत्र के इस योगदान के लिए ग्रामीण भारत सदैव ऋणी रहेगा। - डॉ. राजकुमार सांगवान, वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय लोकदल (लेखक चौधरी चरण सिंह से लंबे समय तक जुड़े रहे)
 

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वर्ष 1971 में खतौली के सीताशरण इंटर कॉलेज में आए चौधरी चरण सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : MUZAFFARNAGAR

चौधरी चरण सिंह ने अपने विचारों से कभी समझौता नहीं किया
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी को भारत रत्न का एलान किया गया है। किसानों के हकों की लड़ाई लड़ने वाले चौधरी चरण सिंह सादगी और ईमानदारी की मिसाल थे। उन्होंने अपने विचारों से कभी भी समझौता नहीं किया। जब भी उन्हें सत्ता में आकर ताकत मिली, उन्होंने किसानों की भलाई के लिए काम किए। किसान मसीहा के अनुयायी आज भी उनके संस्मरण, आदर्श और बातें अपनी धरोहर के रूप में दिलों में संजोए हुए हैं।

छपरौली से पांच बार विधायक रहे 92 वर्षीय चौधरी नरेंद्र सिंह को चौधरी चरण सिंह की सभी बातें याद हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में अमर उजाला को बताया कि चौधरी साहब ने कभी भी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। 1959 में नागपुर के अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू कॉपरेटिव फार्मिंग को लागू करना चाहते थे, मगर चौधरी साहब ने इसका खुलकर विरोध किया। अधिवेशन में ही इसके नुकसान बताए। इस किसान विरोधी बताया। प्रस्ताव पास होने के बावजूद भी पंडित नेहरु इस कानून को लागू करने का साहस नहीं जुटा पाए थे। उनका मत था कि किसान, गांव खुशहाल होंगे, तो देश खुशहाल होगा।

यह भी पढ़ें: Bharat Ratna Award: 'दिल जीत लिया' ...पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न मिलने पर बोले चौधरी जयंत

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बागपत में स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के साथ कार्यकर्ता का फाइल फोटो - फोटो : BAGHPAT

बागपत के नौरोजपुर गुर्जर गांव निवासी लोकतंत्र सेनानी जयपाल सिंह बड़े चौधरियों के नजदीकियों में शामिल रहे। जयपाल सिंह कई बार उनके साथ जेल गए। बड़े चौधरी का जिक्र छिड़ते ही वह भावुक हो जाते हैं। कहते हैं कि उनके जैसा किसान मसीहा फिर जन्म नहीं लगा। सियासी हितों के लिए अब लोग उन्हें याद कर रहे हैं, जबकि हकीकत में उनकी नीतियों और आदर्शों पर चलता कोई नहीं दिखता है। किसानों के बीच बैठने वाला उनके जैसा कोई दूसरा नेता नहीं हुआ। ज्ञान का खजाना थे और उन्होंने किसान के दर्द को समझा, समाधान भी किया। देश और प्रदेश के किसानों ने जो तरक्की की है, वह सिर्फ उनकी नीतियों की बदौलत ही संभव हो सका है।

पूर्व विधायक डॉ. महक सिंह कहते हैं कि चौधरी चरण सिंह एक विचारधारा थे। उनके जैसा लीडर विपक्ष में भी दहाड़ता था। चौधरी साहब ने चौबीस घंटे किसान की चिंता की। उनके दरवाजे किसानों के लिए खुले रहते थे, इसकी बड़ी वजह यह थी कि वह किसान के घर जन्में और समस्याओं को बारीकी से जानते थे। राजनीति में किसानों के लिए आए थे और जिंदगी भर किसानों के ही होकर रहे। वर्तमान समय में किसान राजनीति सिर्फ शब्दों तक सिमट कर रह रही है, धरातल पर किसान राजनीति की स्थिति बेहद कमजोर दिखने लगी है।

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चौधरी चरण सिंह - फोटो : डेमो

सियासत में बढ़ते और चढ़ते चले गए चौधरी चरण सिंह 
बाबूगढ़ छावनी के निकट नूरपुर गांव में किसान मीर सिंह के परिवार में 23 दिसंबर 1902 में चौधरी चरण सिंह का जन्म हुआ। इसके बाद जनपद गाजियाबाद की तहसील मोदीनगर के गांव भदौला आ गए। जब वह छह साल के थे तो उनके पिता मेरठ के पास जानी खुर्द में आकर बस गए थे। आगरा विवि से लॉ की डिग्री लेकर गाजियाबाद में वकालत शुरू की, वह गरीबों से मुकदमे की फीस भी नहीं लेते थे। 1929 में गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया। अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई, सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा, अंग्रेजों भारत छोड़ों आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

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1979 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते चौधरी चरण सिंह। - फोटो : amar ujala

प्रदेश में जमीदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम बिल पास कराया
चौधरी चरण सिंह 1937 कांग्रेस के टिकट पर जनपद मेरठ की दक्षिण पश्चिम सीट से पहली बार संयुक्त प्रांत धारा सभा का चुनाव लड़े और चुनाव जीते भी । उन्होंने 1952 को उत्तर प्रदेश जमीदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम बिल पास कराया। उन्होंने 1953 में उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम बिल पास कराया। उन्होंने किसानों के हित के लिए 1964 में किसान ट्रस्ट की स्थापना की। उन्होंने वर्ष 1964 में किसान हित में मंडी समिति बिल को विधानसभा में पारित कराया।

वर्ष 1967 में कांग्रेस सरकार से खिन्न होकर वह विधान सभा में विरोधी बेंच पर जा बैठे और सरकार का प्रस्ताव बहुमत से गिर गया। तीन अप्रैल 1967 को वह सूबे के मुख्यमंत्री बनें, लेकिन 17 अप्रैल 1967 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। 1969 में यूपी के मध्यावधि चुनाव में चौधरी साहब की बीकेडी पार्टी को भारी सफलता मिली और 98 विधायक चुने गए। 17 फरवरी 1970 को वह फिर मुख्यमंत्री बने। 1977 में वह केंद्र में गृहमंत्री रहे, 1979 में वह उपप्रधानमंत्री और वित्तमंत्री बने और इसके बाद वह देश के प्रधानमंत्री भी चुने गए।

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शाहपुर में एक कार्यक्रम में भाग लेते पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : MUZAFFARNAGAR
चुनाव से एक दिन पहले बदल दिया था प्रत्याशी 
पूर्व सांसद हरपाल पंवार बताते है कि चौधरी चरण सिंह आगरा में 1980 में विधानसभा चुनाव से एक दिन पहले प्रचार में गए। वहां पर पता चला कि प्रत्याशी की छवि खराब है। खुले मंच से प्रत्याशी बदलने का निर्णय लेना पड़ा। निर्दलीय रहे ईमानदार प्रत्याशी को समर्थन देकर विजयी बना दिया।

चौधरी चरण सिंह की राजनीति पाठशाला में जसाला परिवार के पूर्व केबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद अमीर आलम खां, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व विधायक बाबू सिंह, पूर्व सांसद गयूर अली, विधायक अशरफअली, पूर्व विधायक राव राफे खां समेत दिग्गज नेताओं ने क,ख, ग सीखा। चौधरी चरण सिंह वर्ष 1980 में शामली के मंदिर हनुमान धाम और लालू खेड़ी में इंटर काॅलेज सभा में आए। पूर्व विधायक बाबू सिंह के यहां माजरा आवास पर दोपहर भोज लिया। अपनी पत्नी गायत्री देवी के वर्ष 1980 में कैड़ी गांव में चुनाव प्रचार में गए थे।

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शामली पूर्व विधायक स्व बाबूसिंह के आवास पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व चौधरी चरण सिंह सर्मथको के साथ - फोटो : SHAMLI
चौधरी चरण सिंह ने मांगी थी पश्चिमी में हाईकोर्ट की बैंच
वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बैंच का मुद्दा चौधरी चरण सिंह ने तीस दशक पहले उठाया । उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसे वेस्ट यूपी के हक में बताया था। अधिवक्ता देवेंद्र आर्य एडवोकेट ने बताया कि वर्ष 1981 में बागपत के अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उनके दिल्ली स्थित आवास पर जाकर मिला और हाईकोर्ट बैंच के लिए समर्थन मांगा। इस पर बड़े चौधरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर जनता की मांग न्यायोचित ठहराया था।
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