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ऑफिसर्स मेस के मेन्यू से बीयर और शराब आउट

Sat, 16 May 2020 01:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2020 01:45 AM IST
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Beer and wine out of the officers' mess menu
ऑफिसर्स मेस के मेन्यू से बीयर और शराब आउट
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मेरठ। ऑफिसर्स मेस के मेन्यू से बीयर और शराब आउट हो गई है। दो महीने से सेना की कैंटीन बंद होने के कारण शराब की सप्लाई हर मेस में बंद है। एकतरफ जहां देहात में शराब की दुकानें खोल दी गई हैं, वहीं सेना की कैंटीन को लेकर प्रशासन की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया है।
सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में सेना में शराब की छूट रहती है। इसकी बड़ी वजह ये होती है कि सैनिक बेहद विपरीत परिस्थितियों में नौकरी करते हैं। सियाचिन और लद्दाख जैसी ठंडी जगह पर जहां तापमान माइनस पचास डिग्री तक पहुंच जाता है, वहां मुस्तैदी से ड्यूटी करना इतना आसान नहीं होता। ऐसे में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिहाज से सैनिकों को शराब दी जाती है। दूसरा कारण इसका यह भी है सैनिकों को घर गए हुए भी काफी समय गुजर जाता है। इसका असर उनके काम पर न पड़े इसके लिए उन्हें शराब पीने से मना नहीं किया जाता। तीसरा रोजाना कठोर परिश्रम वाली नौकरी से वे तनाव में आ जाएं, इसको लेकर भी सोचा जाता है। इसी के चलते बल्कि सरकार की तरफ से जवानों के लिए एक लिमिटिड बजट निर्धारित किया जाता है। मेरठ छावनी में 20 हजार से अधिक जवान और अफसर रहते हैं।
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ड्यूटी पर लापरवाही तो होती है कार्रवाई
हालांकि इन सबका मतलब ये नहीं होता है कि नशे का असर ड्यूटी पर दिख जाए। फौज में इतनी सख्ती है कि अगर किसी जवान के ड्यूटी पर नशे में होकर कोई नियम तोड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है। सेना में ऐसा भी नहीं होता कि हर किसी को पीने के लिए कहा जाता है। बहुत से ऐसे जवान-अफसर होते हैं जो नहीं पीते हैं।
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बहुत पुरानी है परंपरा
ब्रिटिश काल में सेना में अंग्रेजों की एक परंपरा थी। जिसके तहत हर अधिकारी और सेना का जवान एक निश्चित मात्रा में शराब का सेवन करेगा ही। जब सेना में किसी नए जवान की भर्ती होती तो उसका स्वागत करने के लिए सभी को सीमित मात्रा में शराब पीनी पड़ती थी। तब से यह परंपरा चली आ रही है।
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