सरधना में बसपा का दलित-मुस्लिम कार्ड
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सरधना तथा बागपत सीट पर बसपा ने राजनीतिक पैंतरा चलते हुए दलित-मुस्लिम कार्ड खेला है। बागपत में हुए सम्मेलन में बसपा के वेस्ट यूपी प्रभारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इमरान कुरैशी को सरधना से उम्मीदवार घोषित कर दिया। वहीं, सिवालखास के उम्मीदवार बनाए गए अहमद हमीद को बागपत से चुनाव लड़ाने की घोषणा की गई है। हाजी याकूब कुरैशी के बेटे इमरान को सरधना से उम्मीदार घोषित कर जहां सपा का मुस्लिम वोट बैंक खिसकाने की जबरदस्त दावेदारी पेश की है तो पूर्व मंत्री कोकब हमीद के बेटे अहमद को बागपत से चुनावी मैदान में उतारकर जबरदस्त दांव खेला है। कोकब हमीद पांच बार बागपत में विधायक रह चुके हैं। उनकी वहां अच्छी पकड़ है।
करीब 3.50 लाख वोटरों वाले सरधना विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा संख्या मुसलिमों की है। मुस्लिम वोटर सपा तथा बसपा को सबसे ज्यादा वोट करता आया है। पिछले चुनाव की बात करें तो रालोद के चुनाव चिन्ह पर यहां से हाजी याकूब कुरैशी को पचास हजार से ज्यादा वोट मिले थे और मुस्लिमों ने भी उन्हें खूब वोट किया था। हालांकि भाजपा से संगीत सोम ने 62 हजार से ज्यादा वोट लेकर विजय पताका फहरा दी थी। उधर, सपा प्रत्याशी अतुल प्रधान भी याकूब कुरैशी से थोड़ा ही पीछे ही रह गए थे। उन्हें 48 हजार से ज्यादा वोट मिले। इस चुनाव में बसपा उम्मीदवार चंद्रवीर को झटका लगा था। वे 45 हजार वोटों पर ही सिमट गए थे, जबकि उससे पिछला चुनाव वह हाथी पर सवार होकर इसी सीट से जीत चुके थे।
बसपाई थिंक टैंक का गणित कहता है कि सरधना में लगभग अस्सी हजार मुस्लिम वोटर हैं। लगभग साठ हजार दलित वोटर हैं। इस बार बसपा का लक्ष्य इन्हीं वोटरों को साधने का है। हालांकि ठाकुरों, जाटों और गुर्जरों की संख्या भी कम नहीं है। वह किसी भी चुनाव को बदलने का माद्दा रखते हैं। उन पर निर्भर करेगा कि उनका रुझान किस तरफ है। सपा ने अतुल प्रधान को इस बार चुनावी रण में उतारा है। गुर्जरों के अलावा उनकी निगाह भी मुस्लिम वोटों पर है। इमरान के आने से यदि मुस्लिम वोटों में तगड़ी सेंध लगी तो इसका सीधा खामियाजा सपा को भुगतना पड़ सकता है।
भाजपा अपनी रणनीति को अब वर्तमान परिस्थिति के हिसाब से तैयार कर रही है। सवर्ण और पिछड़ी जाति के वोट बैंक के जरिए भाजपा चुनावी वैतरणी पार करती आई है और यहां से पांच बार भाजपा का कमल खिल चुका है। ऐेसे में भाजपा की तैयारी यहां इस बार भी प्रबल है। इसके अलावा कश्यप, सैनी, ब्राह्मण, पाल, त्यागी आदि की वोटों को लेकर सभी के अपने-अपने दावे हैं। उधर, सिवालखास सीट पर नदीम चौहान के नाम की चर्चा चल रही थी, पर घोषणा नहीं हो पाई। माना जा रहा है कि इस सीट पर पार्टी अभी मंथन कर रही है।