नौकरी ठगी मामले में चौंकाने वाला खुलासा, जानें- कहां और कैसे तैयार होते हैं सॉल्वर गैंग
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ग्राम विकास अधिकारी की परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं में कई कोचिंग सेंटरों की भूमिका संदिग्ध मिली है। अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का खेल यहीं से शुरू होता है। सॉल्वर कोचिंग सेंटरों से ही तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा अभ्यर्थियों से रकम तय करने और भरोसा दिलाने का काम कोचिंग सेंटर संचालक करते हैं। जिस तरह दो सॉल्वर पकड़े गए हैं, उससे आशंका है कि कहीं परीक्षा में भी सॉल्वर न बैठे हो। एसटीएफ हरियाणा के सोनीपत और रोहतक में भी गैंग के लिंक की तलाश में जुट गई है। सोनीपत के कुलदीप को चिन्ह्ति कर लिया गया है। यह मामला यूपी के बागपत जिले का है।
आगरा में 23 दिसंबर को ग्राम विकास अधिकारी की परीक्षा के दौरान बागपत के सांकलपुट्टी निवासी विश्वेंद्र डागर और खेकड़ा के बसी निवासी सचिन को मोबाइल और अन्य सामग्री के साथ परीक्षा केंद्रों से पकड़ा गया था। एसटीएफ की टीम ने इसके बाद जाल बिछाना शुरू कर दिया। लखनऊ से इनपुट के बाद टीम ने बड़ौत में गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे साफ है कि नौकरी के नाम पर ठगी का खेल बागपत ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों के संदिग्ध कोचिंग सेंटरों से ही शुरू होता है। कई सेंटर ऐसे भी हैं, जो सिर्फ इसी कार्य के लिए खोले गए हैं।
एसटीएफ ने इनकी छानबीन शुरू कर दी है। पकड़े गए सॉल्वरों से एसटीएफ यह जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं वह परीक्षा में तो नहीं बैठे थे। अकेले बागपत से ही इस गैंग के संपर्क में 50 से 70 अभ्यर्थी थे, जिनमें से करीब 10 ने प्रमाणपत्र, चेक भी दे दिए थे। 15 लाख में भर्ती का दावा कर 12 लाख में सौदा किया जा रहा था।
सॉल्वर अजय पहले भी जा चुका है जेल
बड़ौत कोतवाली प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि बालैनी का सॉल्वर अजय पहले भी जेल जा चुका है। प्रतियोगी परीक्षा कराने में वह पहले पकड़ा गया था।
पकड़े गए वीरेंद्र और शैलेंद्र उर्फ सूरज मलिक दोनों ठग शातिर हैं। एसटीएफ कई माह से उनकी तलाश में लगी थी। दोनों के नंबर सर्विलांस पर लगा रखे थे, पर ये एसटीएफ के हाथ नहीं चढ़ रहे थे। ये लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ले लेते थे। जिसका नंबर आ जाता था लोगों से यह कहकर पैसा ऐंठ लेते थे कि उन्होंने ही उनकी नौकरी लगवाई है। नौकरी न लगने पर जो लोग पैसा मांगते थे, उन्हें धमकी देते थे।
एसटीएफ नोएडा की टीम ने शिवालाकलां पुलिस के साथ गांव मझौला गुर्जर में छापा मारकर गांव के गुलाब सिंह के पुत्र वीरेंद्र सिंह व मेरठ जिले के गांव भदौड़ा थाना रोहटा हाल निवासी बागपत रोड मुल्तान नगर सुमनपुरी किशनपुरा मेरठ निवासी शैलेंद्र मलिक उर्फ सूरज मलिक को दबोचा है। दोनों के पास से ठगी किए गए एक लाख 65 हजार रुपये नगद, पांच एडमिट कार्ड, चार मोबाइल, दो कार बरामद की हैं। दोनों को दबोचने वाली टीम में एसटीएफ नोएडा के प्रभारी अक्षयवीर त्यागी, दरोगा ब्रह्मप्रकाश शर्मा, पुलिसकर्मी बबलू चौधरी, देवदत्त, मनोज कुमार, सुनील तोमर के अलावा शिवालाकलां थानाध्यक्ष अमन सिंह शामिल रहे।
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