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बागपत : उत्खनन में मिले प्राचीन सभ्यता के सबूत

Sun, 28 Jan 2018 11:04 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत Updated Sun, 28 Jan 2018 11:04 AM IST
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Baghpat : evidence of the loss of ancient civilization found in excavation
बड़ागांव में प्राचीन टीलों की जांच करती टीम - फोटो : अमर उजाला

यूपी के बागपत में शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने टीम के साथ क्षेत्र के रावण उर्फ बड़ा गांव में प्राचीन कालीन टीलों का सर्वेक्षण किया। उन्होंने कहा टीले का उत्खनन होने से प्राचीन सभ्यता को नुकसान होने के सबूत मिले हैं। 

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खेकड़ा क्षेत्र के रावण उर्फ बड़ागांव प्राचीन कालीन सभ्यता के प्रमाणों का प्रसिद्ध स्थल है। इसके संबंध में मान्यता है कि रावण जब मंशा देवी की मूर्ति को लेकर लंका जा रहे थे। तब उन्हें प्राचीन कालीन यहां के टीले पर पहुंचने पर लघु शंका हुई और वहा पशुओं को चरा रहे ग्वाले को वह मंशा देवी की मूर्ति को थमाकर लघुशंका के लिए चले गए। तभी मंशा देवी टीले पर विराजमान हो गई। अथक प्रयास करने के बाद भी रावण मंशी देवी की मूर्ति वहां से नहीं उठा पाए। तभी से मंशा देवी की मूर्ति यहां पर विराजमान है। यहां मंशा देवी का भव्य मंदिर हैं। समय समय पर शोधकर्ता यहां आकर शोध कर प्राचीन सभ्यता से जुडे़ प्रमाण एकत्र करते रहे हैं। 
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बुधवार को शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन अपनी टीम के साथ इन टीलों का सर्वे करने पहुंचे। उन्होंने टीले उत्तरी छोर पर स्थित प्राचीन कालीन टीलों के स्थलों का खुदाई कर सर्वेक्षण किया। उन्होंने बताया कि टीलों के ऊपरी सतह से ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे के लिए मिट्टी के खनन से अनेक प्राचीन कालीन अवशेष जमींदोज हो गए हैं। 

पूर्व स्थल से प्राप्त अवशेषों के आधार पर इतिहासकार अमित राय जैन ने दावा किया कि बड़ागांव के इस स्थल पर कम से कम दो हजार वर्ष पुराने मानव एवं स्त्री रहा करते थे, क्योंकि यहां से प्राप्त ईंटें कुषाण कालीन युग की है। प्राचीन मृद्व भांडो के खंडित पुरावशेष यहां जगह जगह बिखरे पडे़ हैं। 


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दरअसल यहां से गुजर रहे ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे के लिए वह प्राचीन टीलों व खेतों को खोदकर रातों रात मिट्टी आदि दब गई। इस कारण यहां जमीन में दबी मानव एवं स्त्री के प्राचीन कालीन प्रमाण जमींदोज हो गए हैं। इसके बावजूद टीले से झांकती प्राचीन कालीन दीवारों एवं अन्य पुरावशेषों से अभी भी विपुल मात्रा में यहां ऐसे प्रमाण मौजूद हैं, जिनको देखकर सहज ही अनुमान लग जाता है। बात दे कि समय समय पर  शोधकर्ता यहां आकर शोध कर प्राचीन सभ्यता से जुडे़ प्रमाण एकत्र करते रहे हैं। 

उनका कहना है कि यहां भी बरनावा उत्खनन ही तरह केंद्र सरकार को जमीन का उत्खनन कराना चाहिए, ताकि प्राचीन कालीन सभ्यता से पर्दा उठ सके। उन्होंने मंशा देवी मंदिर के साथ ही त्रिलोक तीर्थ जैन मंदिर का भी दौरा किया। उनके साथ डॉ. कुलदीप त्यागी, मोहित जैन आदि रहे।

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