शर्मनाक! यूपी के जिला अस्पताल की खुल गई पोल, छात्रा ने आबरू देकर चुकाई कीमत
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यूपी के बागपत में एक बार फिर साबित हो गया कि जिला अस्पताल में महिला मरीज सुरक्षित नहीं है। पिछले सात साल से अस्पताल में कई घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। महिलाओं ने कई बार शिकायत की, लेकिन सिस्टम नहीं सुधरा। खोखले सिस्टम का नतीजा यह हुआ कि छात्रा को आबरू देकर कीमत चुकानी पड़ी।
जिला अस्पताल में छात्रा से हुई सामूहिक दुष्कर्म की वारदात ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। जिला अस्पताल वर्ष 2011 में चालू हुआ। इसके बाद से अब तक अस्पताल सुर्खियों में रहा है। सही इलाज नहीं दिए जाने के कई बार आरोप लगे। महिला मरीजों ने कई बार स्वास्थ्य कर्मचारियों पर आरोप लगाए। पांच साल पहले अस्पताल के शौचालय में महिला को प्रसव हो गया था। बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ तो आरोप लगा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों ने डंडे से बच्चे को शौचालय में ही ठूंस दिया। मामला दब गया।
दो माह पहले इलाज न मिल पाने के कारण संतोषपुर के बच्चे की चिकित्सक के सामने ही मौत हो गई। एक माह पूर्व शिशु वार्ड में भर्ती बच्चे की मां से स्वास्थ्य कर्मचारी ने छेड़छाड़ की। पीड़ित महिला ने अस्पताल के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। महिला अपने बच्चे की छुट्टी कराकर निजी अस्पताल में ले गई। एक सप्ताह पूर्व महिला वार्ड ने नवजात बच्चे का अपहरण करने की कोशिश की। तीन दिन पहले शव का पोस्टमार्टम न करने पर युवकों ने चिकित्सकों पर पथराव किया।
वहीं प्रभारी सीएमएस डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि महिला मरीजों की सुरक्षा के प्रति अस्पताल प्रशासन गंभीर है। घटना की विभागीय जांच भी होगी। जांच के बाद कार्रवाई होगी।
जरूरत पड़ी तो अंधे साबित हुए सीसीटीवी कैमरे
जिला अस्पताल में तीन साल पहले सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। कुछ दिन तक कैमरे चालू रहे, लेकिन इसके बाद असामाजिक तत्वों ने कैमरे तोड़ दिए। इमरजेंसी के बाहर कैमरे लगाए हैं। अस्पताल में कोई वारदात हो जाए तो कैमरें साथ नहीं देंगे। सीसीटीवी कैमरे के रूप में ताला लटका रहता है। एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे बहुत जरूरी है। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि जिला अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजकर सीसीटीवी कैमरों के बारे में जानकारी ले। प्रभारी सीएमएस डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि कुछ कैमरे चालू हैं। अस्पताल के बाहर कैमरे खराब हैं। उन्हें जल्दी ही ठीक करा दिया जाएगा।
चौकी पर नहीं रहती पुलिस
जिला अस्पताल में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी का निर्माण कराया। रात्रि में दो होमगार्ड की ड्यूटी लगा दी जाती है। उन्हें वारदात के बारे में जानकारी नहीं मिलती। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि चौकी पर पुलिस तैनात की जाएगी।
महिला मरीजों की जांच करते हैं वार्ड ब्वाय
जिला अस्पताल में महिला मरीज की जांच सिर्फ स्टाफ नर्स ही कर सकती है। इसके अलावा पुरुष चिकित्सक महिला मरीज का इलाज नहीं कर सकता। स्टाफ नर्स की मौजूदगी में चिकित्सक द्वारा महिला की जांच की जा सकती है। जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के 16 पद हैं, लेकिन एक ही स्टाफ नर्स कार्यरत है। दस स्टाफ नर्स ठेकेदारी पर रखी गई हैं। पांच पद अभी भी खाली हैं। रात्रि में स्टाफ नर्स ड्यूटी नहीं करती। महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया जाता है।
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