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मोबाइल की लत से हो रही आंखों की बुरी गत

Thu, 13 Oct 2022 02:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Oct 2022 02:15 AM IST
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Bad eyesight due to mobile addiction
मोबाइल की लत से हो रही आंखों की बुरी गत
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मेरठ। आंखें अनमोल हैं। इनकी सुरक्षा बहुत जरूरी है, लेकिन लापरवाही और प्रदूषण के कारण लोगों में आंखों की बीमारी बढ़ रही हैं। खासकर मोबाइल की लत से आंखों की बुरी गत हो रही है। यही वजह है कि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में हर माह 10 हजार से ज्यादा लोग नेत्र रोग ओपीडी में आ रहे हैं। आंखों की बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल अक्तूबर के दूसरे बृहस्पतिवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि टेलीविजन और मोबाइल की अधिकता आंखों के लिए नुकसानदेह है, लिहाजा इनके इस्तेमाल में सावधानी की जरूरत है। बच्चों की आंखों को भी इनसे बचाना चाहिए। आंखों की सुरक्षा के लिए खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। विटामिन ए और प्रोटीन वाली चीजें खानी चाहिए। मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि बाजार में 100 से भी ज्यादा तरह की आई ड्रॉप मिलती हैं। मेरठ में हर माह आंखों में डाले जानी वाली ड्रॉप्स का करीब 30 से 35 लाख का कारोबार होता है। जिला अस्पताल के नेत्र परीक्षण अधिकारी पीके वार्ष्णेय ने बताया कि कई बार लोग बिना डॉक्टरी सलाह के आई ड्रॉप डालने लगते हैं। यह सही नहीं है। डॉक्टर की सलाह से डालनी चाहिए और उतने ही समय के लिए डालनी चाहिए, जितनी डॉक्टर बताएं। ज्यादा समय तक डालने से आंखों में संक्रमण भी हो सकता है।
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यह रखें ध्यान...
हरी सब्जियां खाएं
धूम्रपान न करें, नियमित व्यायाम करें
धूप का चश्मा पहनें
कंप्यूटर स्क्रीन से दूर रहें, हर 20 मिनट में आंखों को आराम दें
आंखों की नियमित जांच कराएं
नेत्रदान कर मिटा सकते हैं लोगों का ‘अंधेरा’
भारत में अंधता की सबसे बड़ी वजह कार्निया जनित रोग हैं। आंख का सबसे सामने वाला पारदर्शी कांच जैसा हिस्सा कार्निया कहलाता है। प्रकाश की किरणें कार्निया से होते हुए आंख में प्रवेश करती हैं और लैंस से होते हुए अंत में रेटिना (पर्दे) पर फोकस होती हैं। कार्निया की सतह पर आंसू एक महीन परत बनकर रहते हैं। कार्निया में अति सूक्ष्म नसें (नर्व) होती हैं। मेडिकल कॉलेज स्थित आई (आंख) बैंक में हर साल करीब सवा सौ लोगों को नेत्रदान की वजह से नई रोशनी मिलती है। पिछले एक साल में करीब डेढ़ सौ कार्निया दान किए गए।
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