फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Baba Tikait

बेहाल किसानों का सहारा थे बाबा टिकैत

Mon, 15 May 2017 02:47 AM IST
राजदीप जाखड़  
राजदीप जाखड़   Updated Mon, 15 May 2017 02:47 AM IST
विज्ञापन
Baba Tikait
बाबा टिकैत की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

प्रदेश के किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की आर्थिक स्थिति को उबारने के लिए किए जा रहे प्रयास सफलता के पटल पर नहीं उतर पा रहे हैं। इस साल भी गन्ने का बकाया भुगतान नहीं होना और आलू किसानों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में किसानों को एक बार फिर अपने मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की याद आ रही है। कारण, अब किसानों के दर्द को हक की आवाज में बदलने वाला बाबा टिकैत जैसा नेतृत्व उनके पास नहीं है।  

विज्ञापन


6 अक्तूबर सन् 1935 में मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में जन्में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को आठ साल की उम्र में ही बालियान खाप का मुखिया बनाया गया था। वह 15 मई 2011 को कालजयी हो गए थे। 1986 में भारतीय किसान यूनियन की कमान टिकैत को सौंपी गई। 1987 में करमूखेड़ी बिजलीघर से पहले आंदोलन की शुरूआत हुई थी।
विज्ञापन


यहां धरना और प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में किसान जयपाल सिंह और अकबर की मौत से प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया था। 1988 में मेरठ कमिश्नरी का ऐतिहासिक धरना 44 दिन तक चला था। किसानों को बाबा पर पूरा भरोसा था। भाकियू का रणसिंघा बजते ही किसान टिकैत के इर्द-गिर्द जमा हो जाते थे। यह टिकैत के ही बूते की बात थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह को सिसौली महापंचायत में धूप में खड़े होकर करवे से पानी पीने को मजबूर कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


टिकैत के रुख से मिल चलाने वाले पूंजीपतियों की इतनी हिम्मत नहीं थी कि गन्ना लेने के बाद किसानों को भुगतान के लिए ठेंगा दिखा सके। आज भारतीय किसान यूनियन और उसके नेता भी है लेकिन बाबा के नहीं होने से किसानों की आवाज कमजोर पड़ी है। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कलंजरी का कहना है कि किसानों के इतने बड़े नेता बनने के बाद भी वे मरते दम तक साधारण किसान ही रहे। 

जाति-धर्म से दूर थे बाबा
बाबा मरते दम तक जाति-धर्म से दूर रहे। वे जाति व मजहब के नाम पर किसानों की खेमेबंदी नहीं करते थे। उनकी पंचायत में हर-हर महादेव और अल्लाह हू अकबर का स्वर एक साथ गूंजता था। 


बाबा टिकैत की प्रतिमा लगाने की मांग 
भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी ने शहर में बाबा टिकैत की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि उनका संगठन यह मांग लंबे समय से उठा रहा है। सोमवार को चौधरी चरण सिंह पार्क में किसान गोष्ठी होगी। 

सफरनामा
जन्म: 6 अक्तूबर 1935 को मुजफ्फरनगर के गांव सिसौली में  
मुखिया: बालियान खाप  
1987 : करमूखेड़ी बिजलीघर पर पहला आंदोलन 
1988 : मेरठ कमिश्नरी का 44 दिन तक घेराव
1988 : रजबपुर में 18 दिन तक सत्याग्रह
1989 : खैर में पुलिस के खिलाफ आंदोलन 
1993 : दिल्ली के वोट क्लब पर एतिहासिक धरना
2000 : लखनऊ और मुरादाबाद किसान आंदोलन में कई बार गिरफ्तार हुए
15 मई 2011 : हड्डियों में कैंसर के कारण मुजफ्फरनगर में निधन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed