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अहंकार की दीवार हटाएंगे तो होगा परमात्मा का दीदार : बाबा गुरिंदर सिंह महाराज

Thu, 07 Mar 2019 12:39 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 07 Mar 2019 12:39 AM IST
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Baba Gurinder Singh ji says that removing the wall of ego will be divine grace
सत्संग में अनुयायियों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

राधा स्वामी ब्यास डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह महाराज ने कहा कि परमात्मा और आत्मा हमारे अंदर विद्यमान है, लेकिन अहंकार रूपी दीवार हमें उन तक नहीं पहुंचने देती है। इस दीवार को हटाएंगे तो परमात्मा के दर्शन होंगे। इसके लिए हमें प्रभु का सिमरन करना होगा। 

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सहारनपुर में सरसावा के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग के प्रमुख केंद्र पर बुधवार को ब्यास डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह महाराज ने खुली जीप में घूमकर संगत को दर्शन दिए। इसके पश्चात लुधियाना से आए आरके कालरा ने पाठ कर संगत को निहाल कर दिया। सत्संग के दौरान डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह महाराज ने कहा कि अहंकार को समाप्त करने के लिए हमें प्रभु का सिमरन करना चाहिए। शरीर पर बाहर की बीमारी को तो हम स्वयं ढूंढ लेंगे, लेकिन अंदर की बीमारी को ढूंढने के लिए हमें चिकित्सक के पास जाना होगा और स्वयं प्रयत्न करना होगा। जिस प्रकार अंधेरे वाले कमरे में बत्ती जगाने से प्रकाश हो जाता है, उसी तरह मन की बत्ती को जगाने से परमात्मा की प्राप्ति होती है। इसके लिए हमें स्वयं प्रयत्न करना होगा।

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उन्होंने कहा कि सबका मालिक एक है, लेकिन हम मनुष्यों ने उस मालिक को अलग-अलग धर्मों में बांट दिया। मालिक ने इंसान को बनाया है, लेकिन इंसान ने अपने- अपने रास्ते अलग अलग बना लिए। सत्संग का अर्थ सत्य का संग है। संत और महापुरुष मनुष्य को भक्ति के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। सेवा प्रभु को पाने के लिए वातावरण बनाना है, जिससे मन में नम्रता आती है और भक्ति से जुड़ने में आसानी होती है। गुरु की महिमा के बारे में कहा कि गुरु ज्ञान देने वाला होता है और अंधकार से उजाले की ओर ले जाता है। शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि शरीर की हद शमशान घाट तक है। वह इससे आगे नहीं जा सकता। मगर शब्द वह धुन है, जो परमात्मा की ओर ले जाती है। जानवर और मनुष्य में सिर्फ विवेक अर्थात बुद्धि का अंतर है। मानव योनि में ही मुक्ति को हासिल की जा सकती है। इसके लिए हमें सदा प्रभु का सिमरन करना चाहिए। तभी मानव जाति का कल्याण हो सकेगा।

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