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बाणी गुरु, गुरु है बाणी, विच बाणी अमृत सारे
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गुरुद्वारा कंकरखेड़ा में सजा गुरु दरबार
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मेरठ। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा कंकरखेड़ा में नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, भाई मतीदास, भाई सतीदास और भाई दयाला की देश व धर्म के लिए दी गई लासानी कुर्बानी को समर्पित 350-साला शहीदी शताब्दी कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर बड़ी संख्या में संगत ने कीर्तन, कथा-विचार और अरदास के बाद सामूहिक रूप से जपुजी साहिब का पाठ किया। श्री सहज पाठ साहिब की शुरुआत की गई। भाई गुरप्रीत सिंह जी ने बाणी गुरु, गुरु है बाणी, विच बाणी अमृत सारे शब्द का गायन कर संगत को भक्ति रस से सराबोर कर दिया ।
ज्ञानी चरणप्रीत सिंह ने श्री सहज पाठ साहिब की महत्ता पर प्रकाश डाला। गुरुद्वारा साहिब के प्रधान मनजीत सिंह कोछड़ ने संगत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर जी और उनके साथियों की 350 वीं शहीदी शताब्दी के उपलक्ष्य में यह आयोजन शुरू किया गया है। इसका समापन 25 नवंबर की सुबह नौ बजे गुरुद्वारा साहिब में होगा।
मनजीत सिंह ने कहा कि हर गुरसिख को जीवन में एक बार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पूर्ण पाठ करना चाहिए। आयोजन को सफल बनाने में अजीत सिंह, किशन सिंह छाबड़ा, हरप्रीत सिंह सलूजा, सुरजीत सिंह मजीठिया, बलवीर सिंह, धीर सिंह, इकबाल सिंह धारीवाल, माता जसविंदर कौर, परमजीत कौर और बब्बल बहन जी ने महत्वपूर्ण सेवा निभाई।
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ज्ञानी चरणप्रीत सिंह ने श्री सहज पाठ साहिब की महत्ता पर प्रकाश डाला। गुरुद्वारा साहिब के प्रधान मनजीत सिंह कोछड़ ने संगत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर जी और उनके साथियों की 350 वीं शहीदी शताब्दी के उपलक्ष्य में यह आयोजन शुरू किया गया है। इसका समापन 25 नवंबर की सुबह नौ बजे गुरुद्वारा साहिब में होगा।
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मनजीत सिंह ने कहा कि हर गुरसिख को जीवन में एक बार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पूर्ण पाठ करना चाहिए। आयोजन को सफल बनाने में अजीत सिंह, किशन सिंह छाबड़ा, हरप्रीत सिंह सलूजा, सुरजीत सिंह मजीठिया, बलवीर सिंह, धीर सिंह, इकबाल सिंह धारीवाल, माता जसविंदर कौर, परमजीत कौर और बब्बल बहन जी ने महत्वपूर्ण सेवा निभाई।
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