खिलाड़ियों से खचाखच भरा था स्टेडियम: कोच के पैर छूए, हाथ मिलाया और फिर सीने में उतार दी गोली
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गुरुवार शाम 5:45 बजे स्टेडियम का ग्राउंड खिलाड़ियों से खचाखच भरा था। सभी खिलाड़ी प्रैक्टिस कर रहे थे। वहीं ग्राउंड में कुर्सी पर एथलेटिक कोच संदीव रंधावा बैठे खिलाड़ियों को टिप्स दे रहे थे। तभी शेखर, मनीष व अंशुल कोच के पास पहुंचे। तीनों खिलाड़ी है और रोजाना स्टेडियम में दौड़ लगाने आते थे। आरोपी शेखर ने संदीप पैर छूए तो वह कुर्सी से खड़े हो गए। दोनों ने हाथ मिलाए। तभी शेखर ने संदीप के सीने पर सटाकर गोली मार दी। जबकि मनीष व अंशुल पास में खड़े इधर उधर देखते रहे, ताकि कोई बचाव में न आए। गोली लगते ही संदीप जमीन पर गिर पड़े। यह देख प्रैक्टिस कर रहे खिलाड़ी अतुल यादव, अमित और संदीप दौड़कर वहां पर पहुंचे। तभी तीनों आरोपी हवाई फायरिंग करते हुए भाग गए। वहीं वारदात के बाद ग्राउंड में अफरातफरी मच गई। खिलाड़ी स्टेडियम छोड़कर जाने लगे। ग्राउंड में पुलिस फोर्स लगाई गई। लेकिन खिलाड़ी वहां से चले गए
वर्चस्व या महिला खिलाड़ी?
रंधावा को गोली मारने की पीछे वर्चस्व है या फिर महिला खिलाड़ी। स्टेडियम में चर्चा है कि एक महिला खिलाड़ी के चलते कोच पर हमला हुआ है। उधर, अस्पताल में कोच को देखने पहुंचे क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि हमलावर अक्सर स्टेडियम में गुंडागर्दी करते थे। जिसका विरोध कोच संदीप करते थे। पुलिस का कहना है कि कोच और हमलावरों के फोन की सीडीआर भी निकाली जा रही है। पुलिस के मुताबिक कोच संदीप ने भी बताया कि आरोपी शेखर भाटी और अंशुल बंसल स्टेडियम में दौड़ने आते है। दोनों महिला खिलाड़ियों से छेड़छाड़ करते हैं। संदीप उन्हें टोकते थे। पुलिस का कहना है कि इस छोटी की बात पर कोच को गोली नहीं मारी जा सकती। कोच की हत्या के इरादे से हमला हुआ है।
कोई बोलने को तैयार नहीं
एसएसपी ने कई खिलाड़ियों से बातचीत की, लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। एसएसपी ने उन्हें समझाया कि तुम लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं करेेंगे। तब दो खिलाड़ियों ने जानकारी दी।
शेखर ने मारी मुझे गोली
जसवंतराय हॉस्पिटल में घायल संदीप रंधावा ने पुलिस को बयान दिया कि उसको शेखर ने गोली मारी है। शेखर के साथ मनीष व अंशुल थे। पुलिस ने बताया कि एक आरोपी दबुथआ सरधना का निवासी है। पुलिस ने तीनों हमलावरों पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
आखिर क्यों नहीं लिखी रिपोर्ट
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने बताया कि जून में संदीप ने इसकी जानकारी मुझे दी थी। संदीप की तरफ से सिविल लाइन थाने में शिकायत पत्र दिया गया था। वारदात के बाद पुलिस अधिकारी पहुंचे थे तो उनको भी इसके बारे में बताया गया। रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की, इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
शोषण हो रहा था
अस्पताल पहुंचे संदीप के भाई ने स्टेडियम प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि हम दलित हैं, इसलिए मेरे भाई का शोषण हो रहा था। हमलावर कहते थे कि स्टेडियम में दलित कोच नहीं हो सकता। एक सप्ताह से संदीप को धमकियां मिल रही थीं।
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