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विधानसभा चुनाव 2022:भाजपा ने हारी हुई सीटों पर भाजपा ने शुरू की तैयारी, दावेदारों की नींद उड़ी

Thu, 17 Dec 2020 05:11 PM IST
Dimple Sirohi अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 17 Dec 2020 05:11 PM IST
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Assembly Elections 2022: BJP in preparations, Meerut city seat also in weak category
पंचायत चुनाव - फोटो : सोशल मीडिया

भाजपा 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। इस बीच हो रहे पंचायत चुनाव पर भी पार्टी की नजर है लेकिन मुख्य लक्ष्य विधानसभा का अगला चुनाव ही है। इसके लिए कमजोर विधानसभाएं चिह्नित कर वहां वरिष्ठ नेताओं को कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

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भाजपा के पश्चिमी क्षेत्र में मुरादाबाद, सहारनपुर और मेरठ मंडल मुख्य हैं हैं। तीनों मंडल में विधानसभा की 70 सीटें हैं। बरेली मंडल के बदायूं जिले की भी एक सीट पश्चिम क्षेत्र में ही और इसे मिलाकर सीटें 71 होती हैं। इनमें से भाजपा के पास 52 सीटें हैं। 21 विधानसभा क्षेत्र संगठन की दृष्टि से कमजोर हैं, इनमें अधिकांश पर गैरभाजपा दलों का कब्जा है। अगले चुनाव में कमजोर सीटें जीतने के लिए पार्टी ने कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए प्रमुख रुप से निगम आदि के चेयरमैन या राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्षों और राज्यसभा सदस्यों को लगाया गया है।
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कैराना सीट पर जसवंत सैनी, सहारनपुर सदर सीट पर संजीव गोयल सिक्का, सहारनपुर सीट पर सुभाष शर्मा, धौलाना सीट पर कैप्टन विकास गुप्ता, नूरपुर सीट पर सूर्यप्रकाश पाल, बेहट सीट पर विजयपाल सिंह तोमर और मुरादाबाद देहात सीट पर कांता कर्दम को लगाया है। अन्य पांच सीटों पर आला नेताओं की तैनाती की जा रही है। इन नेताओं को क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी मोड में लाने की जिम्मेदारी दी गई है।

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नेताओं को निर्देश दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर वे अपने स्तर से विधानसभा क्षेत्रों में जातीय या अन्य समीकरण साधने के लिए दूसरे नेताओं का दौरा भी करा सकते हैं।

मेरठ शहर सीट भी कमजोर श्रेणी में
कमजोर विधानसभा क्षेत्र में मेरठ जनपद की मेरठ शहर सीट भी है। कुछ अन्य सीटों पर  पर जातीय और सांप्रदायिक समीकरण के मद्देनजर ध्रुवीकरण की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए तेज तर्रार नेताओं की सूची तैयार हो रही है।  

पंचायत चुनाव के लिए भी रणनीति
वरिष्ठ नेताओं के जरिए जहां विधानसभा चुनाव जीतना मुख्य लक्ष्य है, वहीं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए भी माहौल बनाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए नेता न केवल दौरा कर रहे हैं, बल्कि उनसे प्रवास के लिए भी कहा गया है।

परिसीमन को लेकर दावेदारों की नींद उड़ी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जनसंख्या निर्धारण का काम हो चुका है। अब पंचायत राज विभाग ने परिसीमन की तैयारी शुरू कर दी है। इससे जिला पंचायत चुनाव के दावेदारों की नींद उड़ गई है। जनपद की तीन बड़ी ग्राम पंचायत नगर पंचायत बन चुकी हैं।

इससे करीब 35 हजार वोट घट गए हैं। ऐसे में जिला पंचायत के वार्डों का परिसीमन नए सिरे से होना है। इस परिसीमन में एक वार्ड अवश्य कम होगा। पंचायत चुनाव पर सबसे ज्यादा भाजपा की नजर है। उसके ही सबसे ज्यादा दावेदार सक्रिय हैं।

उधर, परिसीमन एक सप्ताह के भीतर होने और शासन से स्वीकृति मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि आरक्षण का पेच सभी के दिमाग में फंसा है। वार्ड आरक्षण कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। इसे लेकर भाजपा में आपसी गुटबाजी बढ़ गई है। कई आला नेता अपने विपक्षियों को चुनाव मैदान से हटाने के लिए पहले परिसीमन तो बाद में आरक्षण पर दबाव बना रहे हैं।

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