चुनावी सरगर्मियां बढ़ीं..., सुरक्षित ठिकाने की चाह में सक्रिय हुए नेता, चलेगा दल-बदल का दांव
- पंचायत चुनाव के साथ ही साल 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय हो गए नेता
- चुनाव घोषित होने के साथ कई चर्चित चेहरे लगा सकते हैं दल-बदल का दांव
विस्तार
कोरोना संक्रमण काल में अनलॉक की प्रक्रिया के बाद माहौल धीरे-धीरे सामान्य की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में अब पंचायत चुनाव के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी सरगर्मियां बढ़नी शुरू हो गई हैं। कमोवेश सभी दलों के नेता सक्रिय हो गए हैं। अधिकांश नेताओं की प्राथमिकता यही है कि उनकी सुरक्षित ठिकानों की चाहत पूरी हो जाए। माना जा रहा है कि चुनाव घोषित होने के साथ ही कई चर्चित चेहरे दल-बदल का दांव खेल सकते हैं।
सबसे ज्यादा सक्रियता उच्च स्तर पर जिला पंचायत चुनाव को लेकर है। कई बड़े नेता जिला पंचायत सदस्य ही नहीं बल्कि उसके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर भी नजर टिकाए हैं। इसके साथ ही आने वाले सियासी माहौल को भी भांप रहे हैं, जिसके तहत विधानसभा चुनाव की भी अप्रत्यक्ष तैयारी शुरू हो चुकी है।
जीत पक्की करने कवायद
इस पूरे माहौल में इन नेताओं की कवायद यही है कि पहले तो वह उस पार्टी से मजबूत दावेदारी प्राप्त कर लें और ऊपर से जीत का माहौल भी तैयार कर लें। इसे लेकर कई नेता अभी से दल बदल की जोड़तोड़ में लगे नजर आ रहे हैं।
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नेतृत्व और बिरादरी पर नजर
बसपा में इस समय तेज तर्रार गुर्जर नेता के नेतृत्व की कमी है। मेरठ की राजनीति में गुर्जर बिरादरी अहम भूमिका अदा करती है। इसी को देखते हुए भाजपा के एक गुर्जर नेता ने बसपा के वरिष्ठ नेताओं से इन दिनों संपर्क साधा हुआ है।
हालांकि अभी बात नहीं बनी है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह नेता जिला पंचायत से लेकर विधानसभा चुनाव तक की तैयारी को लेकर बसपा नेताओं के संपर्क में है।
बंद किया दरवाजा खोलने की तैयारी
ऐसा ही एक मामला सपा के गुर्जर नेता का है, जो पिछले दिनों भाजपाइयों से संपर्क बनाने के चलते चर्चा में आया था। लेकिन भाजपा के ही एक गुट ने इसका विरोध कर भाजपा में आने का दरवाजा बंद कर दिया। लेकिन अब एक बार फिर से बदली रणनीति के तहत विरोध करने वाले ही इस नेता को भाजपा में सक्रिय कराने की फिराक में है।
जिला पंचायत चुनाव जाति और बिरादरी के आधार पर होता है। इस बार भाजपा पंचायत चुनाव सिंबल पर कराने की तैयारी में है। ऐसे में कई नेताओं ने बसपा के अनुसूचित जाति के वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए दल बदल की रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
चर्चा है कि चुनाव घोषित होने के साथ ही कई चर्चित चेहरे पार्टी बदल सकते हैं, जिसमें भाजपा के साथ अन्य दलों के प्रमुख दावेदार शामिल हैं।
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