बातचीत: अन्नु बोलीं- लोअर टी-शर्ट पहनने पर उठे थे सवाल, रात में 3 बजे उठ करती थी अभ्यास, पढ़ें संघर्ष की कहानी
Asian Games 2023 : अन्नु रानी ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि रात में ही तीन बजे उठकर अभ्यास करने चली जाती थी और सुबह होने से पहले ही घर आकर सो जाती थी। जिससे परिवार को सामाजिक व गांव वालों की बातें सुनने को ना मिले।
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चीन में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर घर लौटी अन्नु रानी ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि लक्ष्य को पूरा करने में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उसके सामने सामाजिक चुनौती आईं, एक लड़की होकर लोवर टीशर्ट पहनने को लेकर गांव में असमंजसता की स्थिति भी बनी। जिसके चलते परिवार के लोग भी खिलाड़ी बनने में सहयोग करने से पीछे हट गए। वे सब सामाजिक व्यवस्थाओं को चुनौती नहीं दे सकते थे। ऐसे में मैने अपनी दिनचर्या में बदलाव करते हुए रात में ही तीन बजे उठकर अभ्यास करने जाने लगी और सुबह होने से पहले ही घर आकर सो जाती थी। जिससे परिवार को सामाजिक व गांव वालों की बातें सुनने को ना मिले।
इन सब विपरीत परिस्थितियों के बाद आज सफतला का मुकाम हासिल करना गांव की दूसरी बेटियों के लिए भी प्रेरणाश्रोत बन गया है।
अन्नु रानी ने कहा कि उन्होंने बांस की जैवलिन से अभ्यास किया। प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए ट्रेन में सीट नहीं मिलने पर नीचे लेटकर जाना पड़ता था। कभी-कभी खेल छोड़ने के विचार भी आने लगते हैं, लेकिन ऐसे ही समय में यदि दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ा जाए तो सफलता एक दिन जरूर मिलती है।
बताया कि 15 साल पहले मेरे खेल के प्रति समाज के नजरिए को देखते हुए पिता भी नहीं चाहते थे कि वह खेल में जाए। जिसके बाद प्रभात आश्रम के स्वामी विवेकानंद ने परिवार को भरोसा दिलाया। कई बार आसपास कोई उम्मीद नहीं होने के बाद भी वह लक्ष्य से पीछे नहीं हटी। दिन रात मेहनत का नतीजा है कि आज सभी के आशीर्वाद से इस मुकाम पर पहुंची हूं।
अन्नु ने कहा कि युवाओं को किसी भी चुनौतियों का सामने क्यों ना करना पड़े लेकिन अपने परिश्रम में कमी नहीं छोड़नी चाहिए। पिता अमरपाल कहते हैं मुझे तो पहले यह डर सताता था कि बेटी को खेलने के लिए दूर-दूर शहरों में जाना पड़ेगा। लेकिन आज अन्नू की मेहनत और संघर्ष ने गांव से लेकर देश विदेश की दूरी को घटा दिया है। क्षेत्र के हर कोई ग्रामीण अन्नु रानी को अपनी बेटी मानकर गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्हें इससे बड़ी और क्या सोहरत चाहिए।
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मां से बोली अन्नू, तुम्हारी दुआओं की बदौलत दी कमजोरी को मात तो मिला ये मुकाम
अन्नु गांव पहुंची तो मां घर की दहलीज पर आरती की थाली लेकर खड़ी थीं। बेटी को देखते ही खुशी से आंखें छलक आईं। आरती उतारकर बेटी को गले लगा लिया। अन्नु ने गले लगकर कहा कि मां, तुम्हारी दुआओं की बदौलत ही मैने कमजोरी को हराकर ये मुकाम हासिल किया है। तुम हिम्मत नहीं बंधाती तो आज ये मुकाम हासिल नहीं होता।
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