सौरभ चौधरी ने जापान के खिलाड़ी को आखिर तक दी टक्कर, फाइनल में मिली थीं 24 एयर पेलेट
पालेम बांग शूटिंग रेंज में एशियाई खेलों की 10 मीटर एयर पिस्टल का फाइनल दशकों तक दुनिया को याद रहेगा। निशाना साधने के लिए खड़े आठ खिलाड़ियों में ओलंपिक पदक विजेता दक्षिण कोरिया के जिन जोंग जैसे खिलाड़ी भी थे, जिनका अनुभव ही सौरभ की उम्र से ज्यादा है। गोल्ड मेडल के लिए जापान के मत्सुदा से मुकाबला हुआ। जानें कैसा था सौरभ का आखिरी मुकाबला :-
दोनों खिलाड़ी लगभग बराबरी पर थे, लेकिन 23वीं गोली से सौरभ ने 10.2 और मत्सुदा ने 8.9 का स्कोर किया। सौरभ की यही बढ़त निर्णायक साबित हुई। मुकाबला 24वीं गोली तक चला और एक अंक के अंतर से स्वर्ण पदक सौरभ ने जीत लिया।
पालेम बांग में फाइनल मुकाबला शुरू होने से पहले दुनिया की नजर ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता जिन जोंग पर थी, लेकिन बागपत के दिलेर सौरभ चौधरी की पिस्टल ऐसी गरजी कि जिन जोंग पांचवें स्थान पर रहे। जापान के मत्सुदा से फाइनल मुकाबला भी बेहद रोचक रहा और आखिरी गोली तक चला। आठवें राउंड के समाप्त होने तक सौरभ चौधरी का स्कोर 220.1 तक पहुंचा, जबकि जापान के मत्सुदा का स्कोर था 220.5, यही नहीं हरियाणा के अभिषेक वर्मा ने आठवें राउंड में 219.3 का स्कोर किया।
आठवें राउंड के बाद कम स्कोर के चलते अभिषेक को कांस्य पदक से संतोष कर फाइनल से हटना पड़ा। यहां से दिल की धड़कने रोकने वाला मुकाबला शुरू हो गया। दोनों निशानेबाजों के पास दो-दो गोलियां थी। मत्सुदा की 23वीं गोली से स्कोर लगा सिर्फ 8.9 पर। इससे मत्सुदा का स्कोर 229.4 पर पहुंच गया। सौरभ ने 23वीं गोली चलाई स्कोर पहुंच गया 230.3 पर। दोनों खिलाड़ियों के पास आखिरी बारी थी और निशाना था स्वर्ण पदक। सौरभ चौधरी ने 10.4 का स्कोर किया, जबकि जापान के खिलाड़ी ने स्कोर किया 10.3 का। सौरभ का स्कोर पहुंचा 240.7 और जापान के खिलाड़ी का स्कोर पहुंचा 239.7 पर। एक अंक के अंतर से सौरभ ने गेम रिकॉर्ड के साथ इतिहास रच दिया।
कोच को भेजा संदेश
सौरभ ने स्वर्ण पदक जीत के बाद कोच अमित श्योराण को जीत का मैसेज भेजा कि उसने सोना जीत लिया है। मंगलवार को वह बाइक पर थे, इस बीच उन्हें मेसेज प्राप्त हुआ। श्योराण ने बताया कि सौरभ के गोल्ड जीतने की सूचना के बाद से उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है।
क्या कहते हैं कोच
अमित श्योराण कहते हैं कि सौरभ धुन का पक्का है, वह लाजवाब खिलाड़ी है। तीन साल में ही उसने दुनिया को दिखा दिया कि वह उसमें कुछ खास है। वह भविष्य में देश की निशानेबाजी का सबसे बड़ा सितारा बनकर उभरेगा।