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Meerut News: प्रसव पूर्व जांच के लिए गर्भवतियों सूची तैयार करेंगी आशा-एएनएम
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मेरठ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) को गति देने के लिए अब टीकाकरण की तर्ज पर प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के लिए सूची तैयार होगी। गर्भवती को एंबुलेंस-102 के जरिए घर से स्वास्थ्य केंद्र तक लाने ले जाने की व्यवस्था एएनएम करेंगी। स्वास्थ्य केंद्र पर एमबीबीएस चिकित्सक या स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में जांच की जाएगी और केंद्र पर पहुंचने वाली गर्भवती के लिए जलपान की भी व्यवस्था की जाएगी। दूसरे और तीसरे त्रैमास की सभी गर्भवती को पीएमएसएमए बुलावा पर्ची दी जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डाॅ. अखिलेश मोहन ने बताया कि मातृ-शिशु मृत्यु पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि हर गर्भवती की प्रसव पूर्व चार जांच जरूर हों। एएनसी के दौरान गर्भवती को निशुल्क अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से संपर्क किया जा रहा है। हर अल्ट्रासाउंड के लिए 250 रुपये का भुगतान विभाग की ओर से ई-वाउचर के जरिए किया जाएगा। 10 निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं, जहां ई- वाउचर के जरिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। जिले में चार स्थानों पर यह सुविधा शुरू हो गई है, जबकि अन्य पर शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हर माह की नौ व 24 तारीख को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर एएनसी भी कराएंगी।
ये है एएनसी
प्रसव काल के नौ माह में गर्भवती की चार बार प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की जाती है। पहली जांच 12 सप्ताह के अंदर, दूसरी 14 से 26 सप्ताह में, तीसरी जांच 28 से 34 और चौथी 36 सप्ताह के बाद करानी होती है। प्रसव पूर्व जांच का उद्देश्य मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। प्रसव पूर्व जांच के दौरान रक्तचाप, वजन, ऊंचाई, रक्त की जांच, मूत्र में शक्कर व प्रोटीन की जांच, पेट की जांच (अल्ट्रासाउंड), गर्भवती को टिटनेस का टीका लगाना और आयरन की गोलियां देना शामिल है। इन जांचों का उद्देश्य अधिक जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) की पहचान और चिकित्सकीय प्रबंधन करना है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डाॅ. अखिलेश मोहन ने बताया कि मातृ-शिशु मृत्यु पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि हर गर्भवती की प्रसव पूर्व चार जांच जरूर हों। एएनसी के दौरान गर्भवती को निशुल्क अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से संपर्क किया जा रहा है। हर अल्ट्रासाउंड के लिए 250 रुपये का भुगतान विभाग की ओर से ई-वाउचर के जरिए किया जाएगा। 10 निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं, जहां ई- वाउचर के जरिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। जिले में चार स्थानों पर यह सुविधा शुरू हो गई है, जबकि अन्य पर शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हर माह की नौ व 24 तारीख को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर एएनसी भी कराएंगी।
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ये है एएनसी
प्रसव काल के नौ माह में गर्भवती की चार बार प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की जाती है। पहली जांच 12 सप्ताह के अंदर, दूसरी 14 से 26 सप्ताह में, तीसरी जांच 28 से 34 और चौथी 36 सप्ताह के बाद करानी होती है। प्रसव पूर्व जांच का उद्देश्य मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। प्रसव पूर्व जांच के दौरान रक्तचाप, वजन, ऊंचाई, रक्त की जांच, मूत्र में शक्कर व प्रोटीन की जांच, पेट की जांच (अल्ट्रासाउंड), गर्भवती को टिटनेस का टीका लगाना और आयरन की गोलियां देना शामिल है। इन जांचों का उद्देश्य अधिक जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) की पहचान और चिकित्सकीय प्रबंधन करना है।
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