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सेना का प्रशिक्षण मुख्यालय बनने के बाद देश-दुनिया में मशहूर होगी मेरठ छावनी, लिया गया ये बड़ा फैसला

Wed, 15 May 2019 03:40 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 15 May 2019 03:40 PM IST
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Army training headquarters will be shifted to Meerut soon
टैंक

1857 की क्रांति का शहर मेरठ दुनिया की सबसे बड़ी फौज का प्रशिक्षण मुख्यालय बनने के बाद देश ही नहीं दुनिया में भी मशहूर होगा। देश के 32 ए श्रेणी के शिक्षण प्रतिष्ठानों के साथ ही देशभर में सेना की ट्रेनिंग में बदलाव से लेकर नई पॉलिसी यहीं से तय होगी। सेना के जवानों की ट्रेनिंग को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने से लेकर सेना प्रशिक्षण और युद्ध से जुड़ी विभिन्न नीतियां बनाने में भी सेना का प्रशिक्षण कमान मुख्यालय ही निर्णय देगा।



भारतीय सेना के पास एक रेजिमेंटल प्रणाली है जो विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और संचालन के आधार पर सात कमानों में विभाजित है। प्रत्येक कमान (कमांड) लेफ्टिनेंट जनरल के पद के साथ जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के नियंत्रण में होती है। देश में छह संचालन और एक प्रशिक्षण कमांड हैं। प्रत्येक सेना कमान सीधे नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय से संबद्ध है। देश की इन सात कमानों में प्रशिक्षण मुख्यालय सबसे अहम है।

Army training headquarters will be shifted to Meerut soon
कैंट बोर्ड मेरठ

पूरे देश में 32 ए श्रेणी के शिक्षण प्रतिष्ठानों जिनमें आईएमए, एनडीए शामिल हैं। कॉर्प्स बैटल स्कूल में होने वाली विशेष ट्रेनिंग का पूरा खाका भी यहीं से तय होता है। सभी यूनिटों के ट्रेनिंग सेंटर को निर्देश भी प्रशिक्षण मुख्यालय से ही दिए जाते हैं। सेना की तमाम यूनिटों में चलने वाले ट्रेनिंग सेंटर और ट्रेनिंग के लगातार बदलते स्वरूप को लेकर पॉलिसी भी यहीं से बनाकर भेजी जाती है। प्रशिक्षण मुख्यालय होने के कारण दूसरे देशों के ऑफिसर की ट्रेनिंग और दूसरे मामलों के चलते उनका आना-जाना रहता है।

सेना के पुनर्गठन की चल रही कवायद
सेना के पुनर्गठन को लेकर सैन्य अफसर लगातार अध्ययन करते रहे हैं। इस कड़ी में पूरी कवायद चल रही है। इसमें ब्रिगेडियर के पद को खत्म करने के साथ ही सैन्य बल को घटाने और सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण एवं हथियारों की खरीद को लेकर सर्र्वोच्च जनरलों के नेतृत्व में अध्ययन हो रहा है। इसी के तहत दिल्ली सेना मुख्यालय के नजदीक होने की वजह से मेरठ छावनी को इसके लिए चुना गया है।

Army training headquarters will be shifted to Meerut soon
थल सेनाध्यक्ष जरनल बिपिन रावत - फोटो : अमर उजाला

हाल ही में सेनाध्यक्ष आए थे मेरठ
देश की 62 छावनियों में मेरठ बेहद अहम है। यहां पर सेना के पास जमीन की भी कोई कमी नहीं है। दिल्ली के सबसे नजदीक है। कुछ दिन पहले ही सेनाध्यक्ष बिपिन रावत मेरठ आए थे। जनरल रावत ने घंटों चले निरीक्षण के दौरान फॉॅर्मेशन के युद्ध संबंधी तत्परता की समीक्षा और युद्ध संबंधी तैयारियों, वर्तमान सुरक्षा स्थिति तथा फॉर्मेशन के विशेष प्रशिक्षण के बारे में बात की थी। 

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थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत - फोटो : अमर उजाला

सेना के सात कमान और उनके मुख्यालय 
प्रशिक्षण कमान -मुख्यालय:  शिमला, हिमाचल प्रदेश
सेना का प्रशिक्षण कमान मुख्यालय इस समय शिमला, हिमाचल प्रदेश में है। इसे एआरटीआरएसी के रूप में भी जाना जाता है। आर्मी ट्रेनिंग कमांड 1 अक्टूबर 1991 को स्थापित की गई थी। यह पहले मध्य प्रदेश के महू क्षेत्र में स्थित था। लेकिन सन 1993 में हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थानांतरित कर दिया गया। कमांड का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ ही प्रशिक्षण की कार्य साधकता बढ़ाने और तमाम पॉलिसी तय करना है।

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थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत - फोटो : अमर उजाला

सेंट्रल कमांड-मुख्यालय: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
लखनऊ में स्थित सेंट्रल कमांड की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के समय 1942 में हुई थी। 1946 में इसे बर्खास्त कर दिया गया। चीन-भारतीय युद्ध के कारण 1 मई 1963 को फिर से इसे स्थापित किया गया।

पूर्वी कमान-मुख्यालय: कोलकाता, पश्चिम बंगाल
भारतीय सेना के पूर्वी कमान का गठन 1920 में हुआ था। उस समय सेना के दक्षिणी कमान, पूर्वी कमान, उत्तरी कमान और पश्चिमी कमान थे। 1 मई 1963 तक लखनऊ को पूर्वी कमान के मुख्यालय के रूप में चुना गया था। जब सेंट्रल कमांड को फिर से स्थापित किया गया तब लखनऊ को पूर्वी  कमान के बजाय सेंट्रल कमांड का मुख्यालय बनाया गया था। पूर्वी कमान का मुख्यालय कोलकाता पश्चिम बंगाल में है।

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