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ऑनर किलिंग के खिलाफ उतरी बेटियों की सेना, अन्याय के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत

Fri, 21 Feb 2020 04:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा शालू अग्रवाल, मेरठ
शालू अग्रवाल, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 21 Feb 2020 04:15 AM IST
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Army of daughters came against honor killing in meerut
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

ऑनर किलिंग जैसे जघन्य अपराध के खिलाफ अब बेटियों की सेना मोर्चा संभालेगी। पश्चिमी उप्र में जहां प्यार का मतलब ऑनर किलिंग है, वहां स्कूल, कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों ने मिलकर एक सेना बनाई है। इस सेना का ध्येय बेटियों की सुरक्षा है। ये लड़कियां कहती हैं कि बेटा बिगड़ता है तो कोई सजा नहीं, लेकिन बेटी बिगड़ जाए तो हत्या करना कहां का न्याय है। समाज में ऑनर किलिंग के नाम पर बेटियों के साथ जो अपराध हो रहा है उसके खिलाफ शहर की लड़कियों ने आवाज बुलंद कर इस आंदोलन की शुरुआत की है।  

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कंकरखेड़ा की निशा ने अपनी सहेलियों के साथ मिलकर वॉर अगेंस्ट ऑनर किलिंग नामक समूह शुरू किया है। पढ़ाई के साथ जॉब कर रही निशा ने दोस्तों के साथ मिलकर इस अभियान को शुरू किया है। निशा कहती है हमारे समाज में सारी बंदिशें केवल लड़कियों पर लागू हैं। बुराई हमेशा लड़की को, सजा भी केवल लड़की को क्यों मिलती है?  मेरी दो सहेलियों की उनके घरवालों ने हत्या कर दी। 
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वो गलत थीं या नहीं, यह जानने की भी कोशिश नहीं की गई। पुलिस ने पूछा तो कह दिया कि लड़की बिगड़ गई थी। अपनी सहेली टीना को न्याय दिलाने से हमने अभियान शुरू किया है। मेरी सहेलियों की तरह दूसरी लड़कियां भी बेवजह मारी न जाएं इसलिए जंग छेड़ी है। हर उस लड़की के लिए न्याय की मांग करेंगे, विरोध करेंगे, जिसे उसके घरवालों ने बिना किसी गुनाह के ही मार डाला। 
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लड़कियों के साथ लड़के भी जुड़े 
ऑनर किलिंग के खिलाफ इस जंग में 70 लोग शामिल हैं, इसमें 30 से अधिक लड़कियां हैं। सोशल मीडिया के जरिए इस अभियान को आगे बढ़ाने का कदम उठाया। लोगों ने अभियान को सराहा और जुड़ते गए। निशा, गरिमा के साथ अभियान में कोचिंग, स्कूल विद्यार्थी व नौकरीपेशा युवा जुड़ते गए। 

घरवालों ने रोका, लेकिन नहीं रुकेंगे कदम 

ऑनर किलिंग की शिकार लड़की को न्याय दिलाने के लिए जब दूसरी लड़कियां आवाज उठाती हैं तो अपना ही परिवार विरोध करता है। कोई नहीं चाहता कि उनकी बेटी सड़क पर उतरे और ऑनर किलिंग का विरोध करे। निशा, गरिमा, प्रियंका और समूह से जुड़ी लड़कियों के साथ भी यही हुआ। बकौल निशा परिवार ने हमें रोका, तुम फंस जाओगी लेकिन हमने उनकी बात नहीं मानी। हमने परिवार को समझाया कि  लड़कियों पर अत्याचार होता रहेगा, किसी को इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। 

लड़का, लड़की जो भी है, माता-पिता को लगता है कि वो गलत राह पर जा रहा है तो उसकी काउंसिलिंग होना चाहिए। उसे समझाना चाहिए। हत्या करना अपराध है, सजा का विकल्प नहीं। 
 डॉ. पूनम देवदत्त, मनोविज्ञानी

पश्चिमी उप्र में अक्सर लड़कियों के साथ ऑनर किलिंग की घटनाएं होती हैं। अपराध के खिलाफ बेटियों ने जो जंग छेड़ी है वो एक संदेश है। 
-मारियो नोरोन्हो, चरखा फाउंडेशन
 
2019 में जिलेवार ऑनर किलिंग की घटनाएं 
मेरठ- 05
मुजफ्फरनगर- 04 
बिजनौर- 01
शामली- 02
सहारनपुर- 02
बागपत- 02

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