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आकिब...लाल भारत का, जन्मभूमि पाकिस्तान
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 16 Apr 2016 01:16 AM IST
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मेरठ में परिवार के साथ आकिब।
- फोटो : अमर उजाला
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साढ़े तीन साल के आकिब ने जन्म तो पाकिस्तान में लिया, लेकिन वह लाल भारत का है। उसके माता-पिता अपनी रिश्तेदारी में पाकिस्तान गए थे, वहीं उसका जन्म हुआ। पाक सरकार के तमाम अड़ंगों के बावजूद सात माह में आकिब को लेकर परिजन भारत लौटे। उसका जन्म प्रमाणपत्र पाकिस्तान का है और बाशिंदा है मेरठ का। अब फिर से वह अपनी बुआ के याद करने पर पाकिस्तान जाने की तैयारी में है।
यह है पूरा प्रकरण
कोटला निवासी मोहम्मद हसीन कोटला में ही छोटा सा फूड सेंटर चलाते हैं। उनकी बहन यासमीन का निकाह पाकिस्तान के सिंध में हुआ और वह अपने परिवार के साथ वहीं रहती हैं। 31 मई 2012 को यासमीन के बुलावे पर हसीन अपनी पत्नी रेशमा के साथ पाकिस्तान गया था। उस समय रेशमा प्रेगनेंट थी। तीन माह के लिए परिवार पाकिस्तान गया था। जैसे ही लौटने वाले थे, तो अचानक रेशमा की तबीयत बिगड़ गई। एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने जान के जोखिम को देखते हुए रेशमा को हवाई जहाज से ले जाने से इंकार कर दिया। ऐसे में उसे सिंध हॉस्पिटल एवं हार्ट सेंटर कराची में भर्ती कराया गया, जहां उसने आकिब को जन्म दिया।
फंस गया परिवार
यह परिवार जब भारत लौटने लगा, तो पाकिस्तान सरकार ने आकिब को भेजने से इंकार कर दिया। कहा कि उसका जन्म पाक में हुआ है और वह भारत नहीं जा सकता। ऐसे में यह परिवार पाक में ही फंस गया। हसीन और रेशमा ने बिना बच्चे के भारत लौटने से इंकार कर दिया और पाकिस्तान तथा भारत दूतावास के चक्कर काटने शुरू कर दिए।
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सात माह बाद दिखी भारत की धरती
इस्लामाबाद में इंडियन हाईकमीशन ने हसीन का पूरा साथ दिया। सरकार के स्तर पर बात हुई। एक बार तो पाक सरकार ने हसीन के परिवार को तत्काल पाक छोड़ने का फरमान सुना दिया, वह भी बिना नवजात के। इसके बावजूद परिवार अड़ा रहा और इंडियन हाईकमीशन के सहयोग से पाक में ही टिका रहा। आखिरकार 12 दिसंबर 2013 को हसीन और रेशमा आकिब के साथ भारत लौटे।
कोटला के लोगों ने की मदद
कोटला में हसीन के ठीक सामने लाला हरिओम गुप्ता का आवास है। उनके परिवार के लोग लगातार फोन से हसीन के संपर्क में रहे। स्थानीय व्यापारी सुधीर ने भी मदद की। कोटला के लोगों ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करते हुए समय-समय पर जरूरी दस्तावेज फैक्स और मेल से पाकिस्तान भेजे।
पाक का है जन्म प्रमाणपत्र
आकिब को सेक्रेटरी यूनियन काउंसिल जमशेद टाउन कराची द्वारा जन्म प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इसमें लिखा है कि वह पाकिस्तान की नागरिकता लेने के लिए भी अधिकृत है। भारत का बाश़िदा तो वह है ही।
दोनाें जगह मिलता है प्यार
जनवरी 2014 को आकिब फिर अपनी बुआ के पास पाकिस्तान गया, जहां उसे बेपनाह प्यार मिला। हसीन बताते हैं कि यासमीन की तबीयत खराब है। वह फिर से आकिब को बुला रही है। अब हम फिर पाकिस्तान जाने की तैयारी में हैं।
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यह है पूरा प्रकरण
कोटला निवासी मोहम्मद हसीन कोटला में ही छोटा सा फूड सेंटर चलाते हैं। उनकी बहन यासमीन का निकाह पाकिस्तान के सिंध में हुआ और वह अपने परिवार के साथ वहीं रहती हैं। 31 मई 2012 को यासमीन के बुलावे पर हसीन अपनी पत्नी रेशमा के साथ पाकिस्तान गया था। उस समय रेशमा प्रेगनेंट थी। तीन माह के लिए परिवार पाकिस्तान गया था। जैसे ही लौटने वाले थे, तो अचानक रेशमा की तबीयत बिगड़ गई। एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने जान के जोखिम को देखते हुए रेशमा को हवाई जहाज से ले जाने से इंकार कर दिया। ऐसे में उसे सिंध हॉस्पिटल एवं हार्ट सेंटर कराची में भर्ती कराया गया, जहां उसने आकिब को जन्म दिया।
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फंस गया परिवार
यह परिवार जब भारत लौटने लगा, तो पाकिस्तान सरकार ने आकिब को भेजने से इंकार कर दिया। कहा कि उसका जन्म पाक में हुआ है और वह भारत नहीं जा सकता। ऐसे में यह परिवार पाक में ही फंस गया। हसीन और रेशमा ने बिना बच्चे के भारत लौटने से इंकार कर दिया और पाकिस्तान तथा भारत दूतावास के चक्कर काटने शुरू कर दिए।
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सात माह बाद दिखी भारत की धरती
इस्लामाबाद में इंडियन हाईकमीशन ने हसीन का पूरा साथ दिया। सरकार के स्तर पर बात हुई। एक बार तो पाक सरकार ने हसीन के परिवार को तत्काल पाक छोड़ने का फरमान सुना दिया, वह भी बिना नवजात के। इसके बावजूद परिवार अड़ा रहा और इंडियन हाईकमीशन के सहयोग से पाक में ही टिका रहा। आखिरकार 12 दिसंबर 2013 को हसीन और रेशमा आकिब के साथ भारत लौटे।
कोटला के लोगों ने की मदद
कोटला में हसीन के ठीक सामने लाला हरिओम गुप्ता का आवास है। उनके परिवार के लोग लगातार फोन से हसीन के संपर्क में रहे। स्थानीय व्यापारी सुधीर ने भी मदद की। कोटला के लोगों ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करते हुए समय-समय पर जरूरी दस्तावेज फैक्स और मेल से पाकिस्तान भेजे।
पाक का है जन्म प्रमाणपत्र
आकिब को सेक्रेटरी यूनियन काउंसिल जमशेद टाउन कराची द्वारा जन्म प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इसमें लिखा है कि वह पाकिस्तान की नागरिकता लेने के लिए भी अधिकृत है। भारत का बाश़िदा तो वह है ही।
दोनाें जगह मिलता है प्यार
जनवरी 2014 को आकिब फिर अपनी बुआ के पास पाकिस्तान गया, जहां उसे बेपनाह प्यार मिला। हसीन बताते हैं कि यासमीन की तबीयत खराब है। वह फिर से आकिब को बुला रही है। अब हम फिर पाकिस्तान जाने की तैयारी में हैं।