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खुले में घूम रहे पशु फसल को पहुंचा रहे नुकसान
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खुले में घूम रहे पशु फसल को पहुंचा रहे नुकसान
बहसूमा। गेहूं की फसल पर पहले मौसम की मार पड़ी और अब सैकड़ों गोवंशीय पशु खेतों में घुसकर गेहूं, सरसों व बरसीम की फसल को नष्ट कर रहे हैं। जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा मार उन किसानों को झेलनी पड़ रही है, जिनके खेत कस्बे से सटे हुए हैं। ऐसे में ये आवारा गोवंश कस्बे से निकलकर पास के खेतों में घुस जाते हैं।
खराब मौसम के कारण पहले ही गेहूं की बुवाई पिछड़ गई है। रही सही कमी बीते एक सप्ताह से रुक-रुककर हो रही बारिश ने पूरी कर दी है। ऐसे में
देरी से गन्ने के खाली हुए खेत से किसान असमंजस की स्थिति में हैं। कृषि वैज्ञानिक 26 जनवरी तक गेहूं की बुवाई को सही ठहराते हैं। किसान महेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, जयबीर अहलावत व विरेंद्र नागर का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए गोवंशीय पशु और बंदरों के झुंड खतरा बने हुए हैं। अब इनके अतिरिक्त कस्बे के पालतू सूकर भी कस्बे से सटे खेतों में फसलों को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लावारिस गोवंश खतरनाक होते जा रहे हैं। कभी-कभी ये झुंड के रूप में राहगीरों पर हमला बोलकर घायल तक कर देते हैं। लावारिस गोवंश खेतों में घुसकर फसल उजाड़ रहा है। इसका असर फसल के उत्पादन पर भी पडे़गा।
कस्बे में जिला पंचायत ने खंडहर पडे़ एकमात्र कांजी हाउस को निर्मित कर गोआश्रय स्थल बनाया है। इससे 12 गांव व एक कस्बा जुड़ा है। इसमें 18 पशु रखे जा सकते हैं, जबकि उसमें 28 पशु हैं। एसडीएम मवाना का कहना है कि हस्तिनापुर क्षेत्र में एक बड़ी गोशाला का निर्माण कराया गया है। इसी गोशाला में पशुओं को भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
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बहसूमा। गेहूं की फसल पर पहले मौसम की मार पड़ी और अब सैकड़ों गोवंशीय पशु खेतों में घुसकर गेहूं, सरसों व बरसीम की फसल को नष्ट कर रहे हैं। जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा मार उन किसानों को झेलनी पड़ रही है, जिनके खेत कस्बे से सटे हुए हैं। ऐसे में ये आवारा गोवंश कस्बे से निकलकर पास के खेतों में घुस जाते हैं।
खराब मौसम के कारण पहले ही गेहूं की बुवाई पिछड़ गई है। रही सही कमी बीते एक सप्ताह से रुक-रुककर हो रही बारिश ने पूरी कर दी है। ऐसे में
देरी से गन्ने के खाली हुए खेत से किसान असमंजस की स्थिति में हैं। कृषि वैज्ञानिक 26 जनवरी तक गेहूं की बुवाई को सही ठहराते हैं। किसान महेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, जयबीर अहलावत व विरेंद्र नागर का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए गोवंशीय पशु और बंदरों के झुंड खतरा बने हुए हैं। अब इनके अतिरिक्त कस्बे के पालतू सूकर भी कस्बे से सटे खेतों में फसलों को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लावारिस गोवंश खतरनाक होते जा रहे हैं। कभी-कभी ये झुंड के रूप में राहगीरों पर हमला बोलकर घायल तक कर देते हैं। लावारिस गोवंश खेतों में घुसकर फसल उजाड़ रहा है। इसका असर फसल के उत्पादन पर भी पडे़गा।
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कस्बे में जिला पंचायत ने खंडहर पडे़ एकमात्र कांजी हाउस को निर्मित कर गोआश्रय स्थल बनाया है। इससे 12 गांव व एक कस्बा जुड़ा है। इसमें 18 पशु रखे जा सकते हैं, जबकि उसमें 28 पशु हैं। एसडीएम मवाना का कहना है कि हस्तिनापुर क्षेत्र में एक बड़ी गोशाला का निर्माण कराया गया है। इसी गोशाला में पशुओं को भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
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