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अमर उजाला की खास रिपोर्ट: आखिर कुछ महीनों से क्यों बंद हो गई जरूरतमंदों की पेंशन, ये है बड़ा कारण

Mon, 28 Jun 2021 01:26 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दीपक भारद्वाज, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दीपक भारद्वाज, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 28 Jun 2021 01:26 PM IST
सार

अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि पिछले कुछ महीनों से जरूरतमंदों की पेंशन बंद हो गई है। जानिए इसके पीछे क्या बड़ा कारण है।

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Amar Ujala Special Report: The pension of widows, old people and disabled people has stopped due to the merger of banks in Meerut
फाइल फोटो।

विस्तार

विधवा, वृद्वा और दिव्यांग पेंशन के लिए भाग-दौड़ और सिफारिशें लगाने के बाद भी यह गिने-चुने लोगों को ही मिल पाती है। अब बैंकों के विलय होने के बाद पिछले कुछ महीनों से पेंशन लाभार्थियों के खाते में नहीं पहुंच रही है। मेरठ जिले के हजारों पात्र लाभार्थियों के खातों में पेंशन आनी बंद होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। लाभार्थियों के संबंधित विभागों में पूछताछ करने पर पता चला कि बैंक बदल गए हैं। विभागीय प्रक्रिया की जा रही है। विभागीय अधिकारी सब कुछ ठीक रहने पर सितंबर तक पेंशन के सामान्य ढंग से खातों में पहुंचने का दावा कर रहे हैं। 

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विधवा, वृद्वावस्था और दिव्यांग पात्र लाभार्थियों को तीन महीने में एक बार 1500 रुपये बैंक में भेजे जाते हैं। कोरोना काल में इनमें से ज्यादातर को यह धनराशि नहीं मिल पाई। बैंकों के विलय के कारण वृद्धावस्था पेंशन के छह हजार लाभार्थियों के खातों में तीन महीने से कोई धनराशि नहीं आई है। विधवा पेंशन भी तीन महीने पहले ही खातों में पहुंची थी। यही नहीं, छात्रवृत्ति के करीब तीन सौ खाते भी इससे प्रभावित हुए हैं। अब संबंधित विभाग बैंकों को पत्र लिखकर आईएफएससी कोड बदलने के लिए कह रहे हैं, ताकि पात्र लाभार्थियों के खाते में दोबारा से पेंशन राशि पहुंचाई जा सके।
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केस नंबर - 1
शास्त्री नगर निवासी कमलेश का खाता आंध्रा बैंक में था। हाल ही में उनकी विधवा पेंशन बनी थी। आंध्रा बैंक का यूनियन बैंक में विलय होने से अभी तक खाते में पेंशन नहीं पहुंची है। तीन महीने में मात्र 1500 रुपये मिलते हैं। 
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केस नंबर - दो 
शास्त्री नगर निवासी कृष्णा देवी की विधवा पेंशन मार्च, 2020 में बनी थी। पहले उनकी पेंशन तीन महीने में आ जाती थी। कई बार विभाग के चक्कर लगाने पर बताया गया कि बैंक का विलय होने के कारण दिक्कत आ रही है। 

केस नंबर - तीन
मोरीपाड़ा निवासी हिमांशु की छात्रवृत्ति आनी थी लेकिन बैंकों के विलय होने से नहीं आ सकी। उसने समाज कल्याण विभाग में संपर्क किया। कहा गया कि शासन को पत्र भेज रहे हैं। छात्रवृत्ति में कुछ खातों में धनराशि नहीं आई है।

जिले में कुल लाभार्थी
वृद्वावस्था पेंशन 32,347
 विधवा पेंशन 44,036 
दिव्यांग पेंशन  14,497

इन बैंकों का हुआ है विलय
पंजाब नेशनल बैंक - ओरियंटल बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
यूनियन बैंक - आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक
केनरा बैंक - सिंडिकेट बैंक
इंडियन बैंक - इलाहाबाद बैंक
बैंक ऑफ बड़ौदा - देना बैंक और विजया बैंक
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया - भारतीय महिला बैंक, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद

प्रक्रिया में तेजी के लिए शासन को पत्र भिजवाएंगे
पेंशन राशि के भुगतान में दिक्कत आ रही है। बैंकों को पत्र भेजे जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को और जल्द कराने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भी पत्र भिजवाएंगे। - मो. मुश्ताक अहमद, समाज कल्याण अधिकारी

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