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यूपी: नगर निगम को लगा 8.55 करोड़ का फटका, सामने आई ये बड़ी लापरवाही, पढ़िए खास रिपोर्ट

Wed, 07 Jul 2021 11:05 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजकुमार सैनी, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजकुमार सैनी, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 07 Jul 2021 11:05 AM IST
सार

मेरठ में नगर निगम को डेढ़ साल में आठ करोड़ 55 लाख रुपये का फटका लगा है। अमर उजाला की खास रिपोर्ट पढ़िए।

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Amar Ujala Special Report: The municipal corporation has suffered loss of 8.55 crore in one and a half year in Meerut
मेरठ नगर निगम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ शहर के विकास के लिए यूजर चार्ज संबंधी शासनादेश को लागू न करने से नगर निगम को 18 महीने में आठ करोड़ 55 लाख रुपये का फटका लग चुका है। निगम अधिकारियों की उदासीनता और धन की कमी का नतीजा है कि सड़कें टूटी पड़ी हैं और पर्याप्त सफाई नहीं हो रही है। 

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए नगर निगम ने 90 वार्डों में 180 कूड़ा गाड़ियां लगाई हैं। इसमें लगाए गए गाड़ी चालकों और सफाई कर्मचारियों पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इसकी पूर्ति करने और निगम की आय बढ़ाने के लिए 18 जनवरी, 2020 को सरकार ने स्वच्छता उप नियमावली पर मुहर लगाते हुए एक जनवरी, 20 से कूड़ा उठाने के बदले यूजर चार्ज लेने के आदेश दिए थे। 18 माह बाद भी निगम प्रशासन ने यूजर चार्ज वसूली शुरू नहीं की है। 
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पांच लाख भवनों से एक साल में होती 5.70 करोड़ की आय  
नगर निगम के रिकॉर्ड में भले ही साढ़े तीन लाख आवासीय और कॉमर्शियल भवन रजिस्टर्ड हों लेकिन, सच्चाई यह है कि महानगर में पांच लाख भवन हैं। इनमें साढ़े तीन लाख आवासीय और डेढ़ लाख कॉमर्शियल भवन हैं। सभी भवनों पर निगम टैक्स ही नहीं लगा पाया है। इसको लेकर कई बार बोर्ड बैठक में हंगामा भी हुआ। एक अनुमान के आधार पर छोटे-बड़े कॉमर्शियल भवनों पर अगर 200 रुपये प्रतिमाह और आवासीय भवनों पर 50 रुपये प्रतिमाह यूजर चार्ज मान लिया जाए तो यूजर चार्ज से वार्षिक आय लगभग पांच करोड़ 70 लाख होती। जून तक 18 माह में यही आंकड़ा आठ करोड़ 55 लाख हो गया है।  
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यूजर चार्ज के जारी हुए थे बिल, रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं  
तत्कालीन नगरायुक्त अरविंद चौरसिया ने स्वच्छता यूजर चार्ज वसूली के लिए बिल जारी कराने के साथ ही किताबें भी छपवाई थीं। इतना ही नहीं, हाउस टैक्स बिल के साथ ही यूजर चार्ज वसूली का निर्णय लिया गया था। कई परिवारों को यूजर चार्ज के बिल भी दिए गए। इसकी वसूली का रिकॉर्ड निगम के पास नहीं है।

आवासीय भवनों पर प्रस्तावित मासिक यूजर चार्ज 
गृहकर से छूट वाले परिवार और धर्मशालाएं: 30 रुपये
200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल तक के भवन: 80 रुपये
हाउसिंग सोसायटी एवं अपार्टमेंट प्रति फ्लैट: 40 रुपये
200 वर्ग मीटर से अधिक के भवन: 100 रुपये 

व्यावसायिक भवनों पर लगने वाला यूजर चार्ज 
चाय और जूस की दुकान: 10 रुपये 
100 वर्ग फीट तक की दुकान, पब्लिक स्कूल, 100 छात्र वाले कोचिंग सेंटर: 50 रुपये
100-200 वर्ग फीट की दुकान, क्लीनिक, सरकारी स्कूल व प्रिंटिंग  प्रेस: 100 रुपये
200 वर्ग फीट से अधिक की दुकान, दवाई की दुकान: 150 रुपये
पेट्रोल  पंप, शोरूम और सर्विस सेंटर: 200 रुपये
पब्लिक स्कूल और 101 से 500 छात्र वाले कोचिंग सेंटर:  300 रुपये
स्कूल-कॉलेज, मेडिकल, बैंक, एलआईसी, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम, गोदाम, वेयर हाउस, शराब की दुकान: 500 रुपये
मैरिज होम, सिनेमा हॉल, होटल, 20  बेड तक के नर्सिंग होम और बिग बाजार: 1000 रुपये

अधिकारियों की लापरवाही से हुआ नुकसान
अधिकारियों की लापरवाही के कारण यूजर चार्ज की वसूली शुरू नहीं हुई है। निगम को लाखों का नुकसान हुआ है। बोर्ड की अगली बैठक में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। - सुनीता वर्मा, महापौर 

नगर आयुक्त को लेना है फैसला
यूजर चार्ज वसूली के लिए कुछ बिल भी जारी किए गए थे। लेकिन कोरोना के चलते वसूली शुरू नहीं हो पाई थी। इस पर नगर आयुक्त स्तर पर निर्णय लिया जाना है। - संतोष शर्मा, एफसी, नगर निगम 

केवल कागजों में चल रहीं योजनाएं
निगम अधिकारियों के लिए शासनादेश और बोर्ड में पास प्रस्ताव कोई मायने नहीं रखते हैं। योजना केवल कागजों में ही चलती हैं। निगम को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। - गफ्फार अहमद, पार्षद

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