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औद्योगिक लड़ाई: चीन से नहीं होगा अब कारोबार, स्वदेशी विकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा ये शहर

Sat, 20 Jun 2020 03:18 PM IST
कपिल kapil शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 20 Jun 2020 03:18 PM IST
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Amar Ujala Special Report, Businessmen of Meerut will now no business with China
शेखर भल्ला, एमडी भल्ला इंटरनेशनल और पुनीत मोहन शर्मा, अध्यक्ष ऑल इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफेक्चरर्स फेडरेशन - फोटो : अमर उजाला

चीन के साथ लगातार बिगड़ते संबंधों के कारण मेरठ के औद्योगिक भवन अब न तो बंद होंगे, और न उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा। इंडस्ट्री ने चीन के खिलाफ औद्योगिक लड़ाई के लिए कमर कस ली है। शहर के उद्योग धंधे तेजी से स्वदेशी विकल्प की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मेरठ से चीन को मशीनरी और कच्चे माल को मिलाकर 250 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। इसमें बड़ी हिस्सेदारी मशीनरी आइटम, पार्ट्स और मशीनों की है। 

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लॉकडाउन में जीता भरोसा 
लॉकडाउन के दौरान भारतीय उत्पादकों ने एक दूसरे का भरोसा जीतने का पूरा प्रयास किया। कच्चे माल के विकल्प पहले से भारत में उपलब्ध हैं, लेकिन अधिक मुनाफे के चक्कर में निर्माता चीन के माल से महंगा बेचते हैं। पर अब भारतीय विक्रेताओं ने मुनाफा कम कर चीन से सस्ता माल और अच्छी गुणवत्ता का माल देने की बात कही। निर्माताओं ने वेबिनार, संदेश और ईमेल के जरिये उत्पादकों से संपर्क कर माल लेने के की चर्चा की, जिसकी वजह से उत्पादकों ने भारतीय निर्माताओं से माल लेना शुरू कर दिया है। 
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मशीनरी क्षेत्र में कुशलता की दरकार शेष 
पेपर इंडस्ट्री में चीन की मशीनों का बड़ा रोल है। हमने लॉकडाउन से पहले डेढ़ सौ करोड़ की मशीन चीन से ऑर्डर की थी, लेकिन भुगतान न होने के कारण वह मशीन नहीं ले पाए। अब उस मशीन को हम भारत में ही तैयार कराएंगे। सरकार श्रमिकों की कुशलता को बढ़ाने पर काम करे तभी हम चीन को मात दे सकेंगे। - अरविंद अग्रवाल, एमडी पसवाड़ा पेपर मिल   


सप्लायर घटा रहे अपना मुनाफा
लॉकडाउन में जो माहौल चीन के खिलाफ बना है उसमें भारतीय वितरकों को काम करने के लिए अच्छा मौका दिया। वितरकों ने अपने मुनाफे को कम कर दिया है। अब हमें माल चीन से सस्ता भारत में मिल रहा है, इसलिए हमने चीन के बजाय हिंदुस्तानी वितरकों से माल लेना शुरू कर दिया है। - शेखर भल्ला, एमडी भल्ला इंटरनेशनल 

भविष्य के लिए बनाई रणनीति 
रैकेट, जिम, टेबल टेनिस, फिटनेस उपकरण, ट्रैक सूट, रबर, शॉक बॉल, फुटबॉल मैटीरियल सहित तमाम खेल आइटम हैं जिनके लिए कच्चा माल चीन से ही आता है। लगभग 50 फीसदी कारोबार चीन पर निर्भर है। अब भविष्य की रणनीति बनाई है। - पुनीत मोहन शर्मा, अध्यक्ष ऑल इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफेक्चरर्स फेडरेशन

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