यूपी: किसानों के नाम बड़ा कारोबार, नुकसान झेल रही सरकार, पढ़िए अमर उजाला की ये खास रिपोर्ट
यूपी के इस दिले में एग्रीकल्चर में पंजीकृत ट्रैक्टरों से बड़ा खेल चल रहा है। यहां किसानों के नाम पर कारोबार हो रहा है, जबकि इससे सरकार को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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कारोबारी गतिविधियों में बढ़ती ट्रांसपोर्ट की मांग को पूरा करने के लिए अब खेती कार्य में प्रयोग होने वाले ट्रैक्टरों का भी खूब प्रयोग हो रहा है। शहर की मंडियों से लेकर बाजारों तक जहां ट्रैक्टर सब्जी, फल और खाद्यान्न की ढुलाई कर रहे हैं, वहीं टीपीनगर क्षेत्र में निर्माण सामग्री में भी सैकड़ों ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। इन ट्रैक्टरों में काफी ट्रैक्टर ऐसे हैं जिनका पंजीकरण किसान के नाम पर कृषि में कराया गया है। इनके पास न तो परमिट है और न ही इनके पीछे जुड़ने वाली ट्रॉलियों का पंजीकरण हुआ है। इससे सरकारी राजस्व को हर साल लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। परिवहन अधिकारी भी यदाकदा अभियान चलाकर चालान की औपचारिकता कर देते हैं।
वहीं अवैध ट्रैक्टरों की बढ़ती संख्या के चलते ट्रांसपोर्टर भी नाराज है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इनसे उनके कारोबार पर असर पड़ रहा है। परिवहन एक्ट में ट्रैक्टर को कामर्शियल और एग्रीकल्चर श्रेणी में बांट रखा है। किसानों को राहत देने के लिए एग्रीकल्चर में प्रयोग होने वाले ट्रैक्टर पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन कामर्शियल कार्य में रजिस्ट्रेशन होने वाले ट्रैक्टर व ट्राली पर प्रति तिमाही टैक्स लिया जाता है। इसके अलावा परमिट भी लेना पड़ता है। 7100 रुपये परमिट और औसतन तीन हजार रुपये प्रति तिमाही टैक्स से बचने के लिए ट्रैक्टरों को एग्रीकल्चर में पंजीकृत कराकर उसका व्यावसायिक प्रयोग किया जा रहा है। ये सब कार्य आरटीओ अधिकारियों और पुलिस के संरक्षण में चल रहा है। आरटीओ में 551 ट्रैक्टरों को ही कामर्शियल में पंजीकृत कराया गया है, जबकि शहर में इससे कहीं ज्यादा ट्रैक्टर व्यावसायिक कार्यों में लगे हुए हैं।
टीपीनगर और सब्जी मंडी बना अवैध ट्रैक्टरों का गढ़
टीपीनगर में सड़क के दोनों और निर्माण सामग्री रेत, रोड़ी, डस्ट, सीमेंट आदि का खुला कारोबार होता है। इस कारोबार में अधिकतर ट्रैक्टरों का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें से काफी ट्रैक्टरों का कामर्शियल में पंजीकरण नहीं है। इसके अलावा नवीन सब्जी मंडी, सदर दाल मंडी, महताब सिनेमा आदि के पास भी ट्रैक्टरों की बड़ी संख्या माल ढुलाई में लगी हैं।
ट्रॉली का भी होता है पंजीकरण
कामर्शियल कार्य के लिए ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली का भी पंजीकरण कराना पड़ता है। पंजीकरण कराने के लिए पहले ट्रैक्टर व ट्रॉली की फिटनेस 1200 रुपये में होती है। इसके बाद 7100 रुपये फीस लेकर परमिट जारी होता है। पंजीकरण के बाद ट्रैक्टर स्वामी को ट्रैक्टर के लिए प्रति तिमाही एक हजार रुपये और ट्रॉली के लिए 200 रुपये प्रति टन प्रति तिमाही टैक्स देना होता है। ट्राली पर टैक्स उसके साइज और वजन के हिसाब से लगता है। अमूमन ट्राली लोड 7 से 9 टन में पास किया जाता है।
यह है स्थिति
जनपद में एग्रीकल्चर ट्रैक्टर 15350
कामर्शियल ट्रैक्टर 551
एग्रीकल्चर ट्रॉली 31
कॉमर्शियल ट्रॉली 511
अवैध ट्रैक्टर-ट्रॉली करीब 2300
क्या कहते हैं ट्रांसपोर्टर
माल ढुलाई के लिए ट्रांसपोर्टरों ने छोटी-बड़ी गाड़ी बनाई हुई हैं, लेकिन इस कारोबार में अवैध ट्रैक्टरों की एंट्री से ट्रांसपोर्टरों की आय पर असर पड़ रहा है। आरटीओ से इन पर लगाम लगाने को कहा जाता है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। - गौरव शर्मा, अध्यक्ष मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
फिर चलेगा अभियान
कामर्शियल ट्रैक्टरों की आड़ में कुछ अवैध ट्रैक्टर संचालित हो रहे हैं। इनके खिलाफ कई बार अभियान चलाकर चालान किया गया है। कोरोना महामारी में धरपकड़ में कमी आई थी, अब इसे फिर से तेज किया जाएगा। अवैध वाहनों को चलने नहीं दिया जाएगा। - दिनेश कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन मेरठ